नई दिल्ली। देश के प्रतिष्ठित केंद्रीय विश्वविद्यालय जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रसंघ बहाली की मांग को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को छात्रों की भूख हड़ताल 17वें दिन भी जारी रही। इस बीच विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच आठवें दौर की बातचीत हुई, लेकिन छात्रसंघ चुनाव की निश्चित समयसीमा को लेकर गतिरोध बरकरार रहा। छात्रों का कहना है कि जब तक विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रसंघ के संविधान को मंजूरी देने और चुनाव कराने की स्पष्ट तारीख घोषित नहीं करता, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रसंघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराने का आश्वासन दिया है। इसके बावजूद छात्र प्रदर्शन जारी रखे हुए हैं। उनका कहना है कि संविधान की मंजूरी के लिए कोई समयसीमा निर्धारित नहीं की गई है। ऐसे में चुनाव कराने की घोषणा अधूरी है।
12 अक्टूबर से जारी है छात्रों की भूख हड़ताल
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रसंघ की बहाली की मांग को लेकर 12 अक्टूबर से विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ था।प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय में करीब 20 वर्षों से छात्रसंघ चुनाव नहीं हुए हैं। अंतिम बार वर्ष 2006 में छात्रसंघ चुनाव आयोजित किए गए थे।छात्रों की मांग है कि विश्वविद्यालय में लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व की व्यवस्था दोबारा लागू की जाए, ताकि विद्यार्थी अपनी समस्याओं और सुझावों को प्रशासन के सामने प्रभावी तरीके से रख सकें।लगातार 17 दिनों से चल रहे आंदोलन में छात्रों ने भूख हड़ताल को विरोध का प्रमुख माध्यम बनाया है।
आठवें दौर की बातचीत के बाद भी नहीं बनी सहमति
बुधवार को शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल और छात्रों के बीच एक बार फिर बातचीत हुई।यह दोनों पक्षों के बीच आठवें दौर की वार्ता बताई जा रही है।बैठक में छात्रसंघ बहाली, चुनाव की समयसीमा और प्रदर्शनकारी छात्रों से संबंधित मुद्दों पर चर्चा हुई।विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों को आश्वस्त किया है कि छात्रसंघ चुनाव कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।हालांकि, छात्र प्रतिनिधियों ने चुनाव की स्पष्ट तारीख और लिखित समयसीमा की मांग दोहराई।छात्रों का कहना है कि केवल मौखिक आश्वासन के आधार पर आंदोलन समाप्त करना उचित नहीं होगा।
15 दिन में चुनाव कराने का आश्वासन
विश्वविद्यालय प्रशासन ने 26 अक्टूबर को जारी आदेश में छात्रसंघ चुनाव कराने का आश्वासन दिया था।आदेश के अनुसार, जामिया मिल्लिया इस्लामिया छात्रसंघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव आयोजित किए जाएंगे।इसके साथ ही प्रदर्शन के दौरान छात्रों को जारी निलंबन और कारण बताओ नोटिस वापस लेने की घोषणा भी की गई थी।विश्वविद्यालय प्रशासन ने सुरक्षा कर्मचारियों के आचरण की जांच के लिए समिति बनाने की बात भी कही।इसके बावजूद प्रदर्शनकारी छात्रों ने आंदोलन समाप्त नहीं किया। उनका कहना है कि प्रशासन ने संविधान की मंजूरी की तारीख स्पष्ट नहीं की है।
छात्रों की मांग- पहले तय हो संविधान की मंजूरी की तारीख
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि छात्रसंघ का संविधान मंजूर होने के बाद 15 दिनों के भीतर चुनाव कराने का आश्वासन पर्याप्त नहीं है।उनके अनुसार, यदि संविधान की मंजूरी के लिए कोई समयसीमा नहीं होगी, तो चुनाव प्रक्रिया अनिश्चितकाल तक लंबित रह सकती है।छात्र प्रतिनिधि चाहते हैं कि विश्वविद्यालय प्रशासन संविधान की मंजूरी और छात्रसंघ चुनाव के लिए स्पष्ट कार्यक्रम जारी करे।इसके अलावा छात्रों ने प्रदर्शन के दौरान हुई कथित अनुशासनात्मक कार्रवाई और सुरक्षा कर्मचारियों के व्यवहार से संबंधित मुद्दे भी उठाए हैं।छात्रों का कहना है कि उनकी मांग विश्वविद्यालय में लोकतांत्रिक भागीदारी बहाल करने से जुड़ी है।
परिसर में तोड़फोड़ का प्रशासन ने लगाया आरोप
छात्र आंदोलन के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसर में तोड़फोड़ के गंभीर आरोप लगाए हैं।बुधवार को जामिया प्रशासन ने टूटी हुई खिड़कियों और क्षतिग्रस्त संपत्ति की तस्वीरें साझा कीं।प्रशासन का आरोप है कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने परिसर के विभिन्न हिस्सों में जबरन प्रवेश किया और सीसीटीवी कैमरों समेत विश्वविद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया।हालांकि, आरोपों के संबंध में जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान और उनके खिलाफ की गई कार्रवाई का स्पष्ट विवरण उपलब्ध नहीं है।
प्रदर्शनकारी छात्रों की मांगों और प्रशासन की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच अलग-अलग तथ्यों के आधार पर की जानी आवश्यक है।
स्थापना दिवस का कार्यक्रम भी हुआ प्रभावित
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में जारी आंदोलन का असर विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और प्रशासनिक गतिविधियों पर भी पड़ा है।तनावपूर्ण स्थिति के कारण विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस से संबंधित कार्यक्रमों में बदलाव किया गया।प्रशासन की ओर से परिसर की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कुछ गतिविधियों को स्थगित करने का निर्णय लिया गया।विश्वविद्यालय में लंबे समय से चल रहे विरोध प्रदर्शन के कारण छात्रों और कर्मचारियों के सामने भी कई तरह की चुनौतियां पैदा हुई हैं।
विश्वविद्यालय के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
आंदोलन के मद्देनजर जामिया परिसर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है।कई प्रवेश द्वारों पर बैरिकेडिंग की गई है और पुलिस तथा अर्धसैनिक बलों की तैनाती बढ़ाई गई है।विश्वविद्यालय के आसपास सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश भी लागू किए गए हैं।कुछ प्रवेश द्वार बंद होने और आवाजाही पर प्रतिबंध से विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना आवश्यक है, जबकि प्रदर्शनकारी छात्र शांतिपूर्ण आंदोलन के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं।
आठ नवंबर तक ऑनलाइन कक्षाएं जारी रखने का फैसला
विश्वविद्यालय परिसर में जारी तनाव के बीच शैक्षणिक गतिविधियों को लेकर भी निर्णय लिया गया है।रिपोर्टों के अनुसार, जामिया प्रशासन ने ऑनलाइन कक्षाओं की व्यवस्था आठ नवंबर तक बढ़ा दी है।इसके अलावा दूसरे मिड-सेमेस्टर की परीक्षाएं भी ऑनलाइन आयोजित करने का फैसला किया गया है।इस व्यवस्था का उद्देश्य परिसर की मौजूदा परिस्थितियों के बीच पढ़ाई और परीक्षाओं की निरंतरता बनाए रखना बताया गया है।हालांकि, छात्रों के एक वर्ग ने परिसर में प्रतिबंधों और प्रवेश द्वारों के बंद होने पर चिंता व्यक्त की है।
पूर्व छात्रों और सामाजिक संगठनों का मिला समर्थन
जामिया छात्रसंघ बहाली आंदोलन को विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों और विभिन्न छात्र संगठनों का भी समर्थन मिला है।सोमवार को जामिया नगर के सैयदा मंजिल में जामिया कलेक्टिव की ओर से संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया गया।इसमें विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों, संस्थापक परिवारों के सदस्यों, कलाकारों, वकीलों और छात्र प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।सम्मेलन में छात्रसंघ चुनाव की बहाली और विश्वविद्यालय में लोकतांत्रिक गतिविधियों के लिए स्थान उपलब्ध कराने की मांग उठाई गई।एनएसयूआई, एआईएसएफ, एसएफआई, आइसा और अन्य छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी प्रदर्शनकारी छात्रों की मांगों पर संवाद जारी रखने की आवश्यकता जताई।
केंद्रीय मंत्री ने भी आंदोलन पर दी प्रतिक्रिया
छात्र आंदोलन को लेकर केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी की प्रतिक्रिया भी सामने आई है।उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच बातचीत चल रही है।जोशी ने छात्रों से परिसर में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगाड़ने से बचने की अपील की।उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में लंबे समय से छात्रसंघ चुनाव नहीं हुए हैं और प्रशासन इस विषय पर काम कर रहा है।दूसरी ओर छात्र प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि चुनाव की ठोस समयसीमा तय होने तक उनकी प्रमुख मांग अधूरी रहेगी।
अब प्रशासन और छात्रों के बीच सहमति पर नजर
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में 17 दिनों से जारी भूख हड़ताल के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल छात्रसंघ चुनाव की तारीख को लेकर है।प्रशासन ने चुनाव कराने का आश्वासन दिया है, लेकिन संविधान की मंजूरी की समयसीमा पर अभी सहमति नहीं बन सकी है।विश्वविद्यालय के सामने एक ओर शैक्षणिक गतिविधियों को सामान्य बनाने और परिसर की सुरक्षा सुनिश्चित करने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर छात्र प्रतिनिधित्व से जुड़ी मांगों का समाधान करना भी महत्वपूर्ण है।
फिलहाल छात्रों ने अपना आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है। आने वाले दिनों में प्रशासन और छात्र प्रतिनिधियों के बीच होने वाली बातचीत से यह स्पष्ट हो सकेगा कि जामिया में छात्रसंघ चुनाव की प्रक्रिया कब और किस तरह आगे बढ़ेगी।