नई दिल्ली/सुल्तानपुर : 5 नवंबर 2026। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा आम आदमी पार्टी (AAP) को भारतीय जनता पार्टी की 'बी-टीम' बताए जाने के बाद देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने खरगे के बयान पर तीखा पलटवार करते हुए कांग्रेस पर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को दूसरों पर आरोप लगाने से पहले अपने राजनीतिक इतिहास और चुनावी प्रदर्शन की समीक्षा करनी चाहिए। संजय सिंह ने दावा किया कि देश के कई राज्यों में कांग्रेस के विधायकों के दल-बदल के कारण भाजपा को सरकार बनाने का अवसर मिला। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कांग्रेस खुद भाजपा को सत्ता में पहुंचने का रास्ता देती रही है, तो वह आम आदमी पार्टी को भाजपा की बी-टीम कैसे बता सकती है।दरअसल, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बुधवार को पंजाब के संगरूर में आयोजित एक राजनीतिक रैली के दौरान आम आदमी पार्टी पर जमकर निशाना साधा था। उन्होंने आरोप लगाया था कि आम आदमी पार्टी विभिन्न राज्यों में चुनाव लड़कर कांग्रेस के वोटों को नुकसान पहुंचाती है और इसका सीधा फायदा भाजपा को मिलता है। खरगे ने गुजरात और गोवा जैसे राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि जिन जगहों पर कांग्रेस भाजपा को चुनौती देने की स्थिति में होती है, वहां आम आदमी पार्टी चुनावी मैदान में उतरकर विपक्षी वोटों का विभाजन करती है। उन्होंने आम आदमी पार्टी को भाजपा की 'बी-टीम' करार दिया था।
खरगे के इस बयान पर गुरुवार को संजय सिंह ने उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान जवाब दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को आम आदमी पार्टी की आलोचना करने के बजाय अपनी कमजोरियों को समझने की जरूरत है। सिंह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के भीतर राजनीतिक अस्थिरता और विधायकों के दल-बदल की घटनाओं ने कई राज्यों में भाजपा को सत्ता हासिल करने में मदद की है।संजय सिंह ने अरुणाचल प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, कर्नाटक और मध्य प्रदेश का उदाहरण देते हुए कांग्रेस के नेतृत्व पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 में अरुणाचल प्रदेश में कांग्रेस के कई विधायक भाजपा के साथ चले गए। इसी वर्ष उत्तराखंड में भी कांग्रेस के भीतर बगावत हुई। इसके अलावा वर्ष 2017 और 2022 में गोवा, वर्ष 2019 में कर्नाटक तथा वर्ष 2020 में मध्य प्रदेश में कांग्रेस विधायकों के दल-बदल और राजनीतिक घटनाक्रम ने भाजपा को फायदा पहुंचाया।उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के विधायक भाजपा में शामिल होते रहे हैं, लेकिन पार्टी नेतृत्व अपनी कमजोरियों पर ध्यान देने के बजाय आम आदमी पार्टी को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, इन राज्यों में सरकार बनने और बदलने की परिस्थितियां अलग-अलग थीं। संजय सिंह के आरोपों को कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक गठजोड़ का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
संजय सिंह ने कांग्रेस के लंबे समय से कमजोर चुनावी प्रदर्शन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात और अन्य राज्यों में कांग्रेस कई दशकों से सत्ता से बाहर है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब इन राज्यों में कांग्रेस लगातार चुनाव हार रही थी, तब आम आदमी पार्टी का अस्तित्व भी नहीं था। ऐसे में कांग्रेस अपनी हार के लिए आम आदमी पार्टी को जिम्मेदार कैसे ठहरा सकती है?उन्होंने कांग्रेस को आत्ममंथन करने की सलाह देते हुए कहा कि किसी दूसरे राजनीतिक दल पर आरोप लगाने से चुनावी सफलता नहीं मिलती। इसके लिए जनता के बीच विश्वास कायम करना, मजबूत संगठन तैयार करना और प्रभावी राजनीतिक नेतृत्व देना जरूरी है।आम आदमी पार्टी के नेताओं के खिलाफ हुई कानूनी कार्रवाइयों का जिक्र करते हुए संजय सिंह ने कहा कि अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन और वह स्वयं भाजपा के खिलाफ राजनीतिक संघर्ष करते हुए जेल गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस पार्टी के नेताओं ने भाजपा के खिलाफ इतना संघर्ष किया हो, उसे भाजपा की बी-टीम बताना कितना उचित है।संजय सिंह ने कहा कि आम आदमी पार्टी लगातार भाजपा की नीतियों का विरोध करती रही है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी ने विभिन्न राजनीतिक और जनहित के मुद्दों पर केंद्र सरकार के खिलाफ आवाज उठाई है और भविष्य में भी यह संघर्ष जारी रहेगा।
इस दौरान उन्होंने पंजाब की भगवंत मान सरकार की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। संजय सिंह ने दावा किया कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार ने आम नागरिकों को राहत पहुंचाने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की हैं। उन्होंने 300 यूनिट मुफ्त बिजली, स्वास्थ्य बीमा, सरकारी नौकरियों और किसानों के लिए सिंचाई सुविधाओं का उदाहरण दिया।उन्होंने विश्वास जताया कि पंजाब की जनता आम आदमी पार्टी के कामकाज से संतुष्ट है और आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी को एक बार फिर बहुमत मिलेगा। संजय सिंह ने कहा कि उनकी पार्टी जनता के मुद्दों और विकास कार्यों के आधार पर चुनाव लड़ेगी।वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने पंजाब की रैली में भगवंत मान सरकार पर भ्रष्टाचार, नशे की समस्या और प्रशासनिक विफलताओं को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया कि आम आदमी पार्टी की सरकार राज्य के युवाओं, किसानों और अन्य वर्गों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी है। कांग्रेस ने पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी राजनीतिक तैयारियां भी तेज कर दी हैं।संजय सिंह ने भाजपा पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी देश में नफरत और सामाजिक तनाव बढ़ाने की राजनीति करती है। उन्होंने केंद्र सरकार से घुसपैठ और अन्य राष्ट्रीय मुद्दों पर जवाब मांगा। इसके अलावा उन्होंने स्पष्ट किया कि आम आदमी पार्टी फिलहाल इंडिया गठबंधन का हिस्सा नहीं है और विभिन्न राज्यों में अपनी चुनावी रणनीति के अनुसार आगे बढ़ रही है।राजनीतिक विश्लेषण के लिहाज से कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच बढ़ती बयानबाजी पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दोनों दल पहले भाजपा के खिलाफ विपक्षी सहयोग का हिस्सा रह चुके हैं, लेकिन अब पंजाब में एक-दूसरे के प्रमुख राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हैं।ऐसे में खरगे और संजय सिंह के बीच आरोप-प्रत्यारोप से यह स्पष्ट हो रहा है कि आगामी चुनाव में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच मुकाबला तीखा हो सकता है। दोनों दल खुद को भाजपा का वास्तविक विरोधी साबित करने का प्रयास कर रहे हैं। अब देखना होगा कि इस राजनीतिक बयानबाजी का जनता और आगामी चुनावी समीकरणों पर कितना असर पड़ता है।