दिल्ली सरकार: महत्वाकांक्षी दिल्ली लक्ष्मी योजना (Delhi Laxmi Yojana) रक्षा बंधन के अवसर पर लागू होने जा रही है। इस योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। हालांकि सरकार ने योजना के लिए पात्रता के साथ कुछ कड़े नियम भी तय किए हैं। जिन महिलाओं के तीन से अधिक जीवित बच्चे हैं, उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। इसके अलावा ज्यादा बिजली खपत करने वाले परिवारों और कई अन्य श्रेणियों की महिलाओं को भी योजना से बाहर रखा गया है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में दिल्ली लक्ष्मी योजना को मंजूरी दी गई। सरकार का कहना है कि इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाना है। योजना के तहत दिल्ली के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की 21 वर्ष से 60 वर्ष तक की लगभग 17 लाख पात्र महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये की सहायता राशि दी जाएगी।
दिल्ली सरकार ने इस योजना के लिए वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में 5,110 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। योजना शुरुआती तौर पर तीन वर्ष के लिए लागू की जाएगी। इसके बाद जरूरत और समीक्षा के आधार पर इसमें बदलाव करते हुए आगे बढ़ाया जा सकता है।
योजना का लाभ लेने के लिए महिलाओं को ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इसके लिए दिल्ली लक्ष्मी योजना पोर्टल तैयार किया गया है। पात्र महिलाएं एक अगस्त से इस पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकेंगी। आवेदन की जांच, स्वीकृति और शिकायतों के समाधान के लिए जिला स्तर पर विशेष व्यवस्था बनाई जाएगी, जिससे प्रक्रिया पारदर्शी और आसान हो सके।
सरकार ने योजना में मिलने वाली 2500 रुपये की राशि के इस्तेमाल को लेकर भी विकल्प दिए हैं। पहले विकल्प के तहत 1500 रुपये की राशि आरडी या एफडी के रूप में जमा की जाएगी, जबकि 1000 रुपये सीबीडीसी डिजिटल रुपये वॉलेट के माध्यम से दिए जाएंगे। इस डिजिटल राशि का उपयोग सरकार द्वारा तय वस्तुओं और सेवाओं के लिए किया जा सकेगा।
दूसरे विकल्प में महिला पूरी 2500 रुपये की राशि आरडी या एफडी के रूप में प्राप्त कर सकती है। सरकार का उद्देश्य महिलाओं को केवल तत्काल आर्थिक मदद देना ही नहीं बल्कि उन्हें बचत और भविष्य के लिए निवेश के प्रति भी प्रोत्साहित करना है।
योजना में कई श्रेणियों की महिलाओं को पात्र नहीं माना गया है। इनमें पहले से किसी अन्य आर्थिक सहायता योजना या पेंशन का लाभ लेने वाली महिलाएं शामिल हैं। आयकर जमा करने वाली, जीएसटी रिटर्न दाखिल करने वाली और सरकारी नौकरी करने वाली महिलाओं को भी योजना से बाहर रखा गया है।
इसके अलावा जिन परिवारों में तीन से अधिक जीवित बच्चे हैं, वहां की महिलाएं इस योजना का लाभ नहीं ले पाएंगी। ऐसे परिवार जिनकी सालाना बिजली खपत 2400 यूनिट से अधिक है, उन्हें भी योजना से बाहर रखा गया है। परिवार का कोई सदस्य यदि केंद्र या राज्य सरकार, सार्वजनिक उपक्रम या किसी सरकारी संस्था में नौकरी करता है, तब भी महिला योजना के लिए पात्र नहीं होगी।
चार पहिया वाहन रखने वाले परिवारों और आपराधिक रिकॉर्ड वाले परिवारों की महिलाओं को भी इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। सरकार का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंद महिलाओं तक पहुंचाना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली लक्ष्मी योजना केवल आर्थिक सहायता देने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि महिलाओं के सामाजिक और व्यक्तिगत विकास से भी जुड़ी होगी। योजना के तहत लाभार्थी महिलाओं को बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और सामाजिक जिम्मेदारियों से जोड़ा जाएगा।
इसके तहत बच्चों का स्कूल में नामांकन, अपार आईडी, आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता (आभा) आईडी, समय पर टीकाकरण और पोषण ट्रैकर जैसे कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके अलावा महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों और कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जोड़ने की भी योजना है।
सरकार महिलाओं को पर्यावरण और सामाजिक अभियानों से भी जोड़ेगी। इनमें एक पेड़ मां के नाम अभियान, स्वच्छ भारत अभियान और सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग को रोकने जैसे कार्यक्रम शामिल हैं।
दिल्ली लक्ष्मी योजना के जरिए सरकार का लक्ष्य महिलाओं को आर्थिक मजबूती देने के साथ-साथ उन्हें आत्मनिर्भर और सामाजिक रूप से अधिक सक्रिय बनाना है। हालांकि पात्रता के सख्त नियमों के कारण कई महिलाएं योजना के दायरे से बाहर भी हो सकती हैं।