55 साल पुराना गाना बना स्कूलों की प्रार्थना की पहचान

Update: 2026-07-15 12:16 GMT

नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा में कई ऐसे गीत बने हैं, जो समय के साथ और भी यादगार होते चले गए। कुछ गाने प्रेम और भावनाओं को दर्शाते हैं तो कुछ जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। ऐसा ही एक गीत है, जिसे 55 साल पहले मशहूर गीतकार गुलजार साहब ने लिखा था और आज भी यह लोगों के दिलों में खास जगह बनाए हुए है। खास बात यह है कि यह गीत अब सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के कई स्कूलों की सुबह की प्रार्थना का हिस्सा बन चुका है।

स्कूलों में सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान बच्चों द्वारा गाए जाने वाले इस गीत ने कई पीढ़ियों को प्रेरणा दी है। शिक्षकों के लिए भी यह गीत केवल एक प्रार्थना नहीं, बल्कि बच्चों में सकारात्मक सोच और अच्छे संस्कार विकसित करने का माध्यम बन गया है।

यह गीत साल 1971 में रिलीज हुई फिल्म ‘गुड्डी’ का है, जिसमें अभिनेत्री जया बच्चन पर इसे फिल्माया गया था। गीत के बोल ‘हमको मन की शक्ति देना’ हैं। इस गीत को गुलजार ने लिखा था, जबकि इसे अपनी मधुर आवाज दी थी मशहूर गायिका वाणी जयराम ने। अपनी सरल भाषा और गहरे भावों के कारण यह गीत लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय हो गया।

गीत में ईश्वर से मन की शक्ति, सही रास्ते पर चलने और मुश्किल परिस्थितियों का सामना करने की प्रार्थना की गई है। यही वजह है कि यह गीत स्कूलों की प्रार्थना सभाओं में इतना पसंद किया जाता है। बच्चों को इस गीत के जरिए ईमानदारी, आत्मविश्वास और अच्छे विचारों की सीख मिलती है।

हिंदी सिनेमा में गुलजार साहब अपनी अलग लेखन शैली के लिए जाने जाते हैं। उनके लिखे गीतों में भावनाओं की गहराई और जीवन की सच्चाई देखने को मिलती है। ‘हमको मन की शक्ति देना’ भी उनके ऐसे ही गीतों में शामिल है, जिसने समय की सीमाओं को पार कर अपनी पहचान बनाई है।

जया बच्चन पर फिल्माया गया यह गीत उस दौर में भी काफी पसंद किया गया था और आज भी इसकी लोकप्रियता कम नहीं हुई है। नई पीढ़ी के बच्चे भी इसे स्कूलों में गाते हैं, जिससे यह गीत लगातार आगे बढ़ता जा रहा है।

स्कूलों की प्रार्थना सभाओं में एक और लोकप्रिय गीत ‘ऐ मालिक तेरे बंदे हम’ भी लंबे समय से गाया जाता रहा है। लता मंगेशकर की आवाज में यह गीत भी लोगों के बीच बेहद प्रसिद्ध है। इन दोनों गीतों ने भारतीय स्कूल संस्कृति में अपनी खास जगह बनाई है।

‘हमको मन की शक्ति देना’ की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके शब्द हर उम्र के व्यक्ति को प्रेरणा देते हैं। यह केवल एक फिल्मी गीत नहीं, बल्कि जीवन में अच्छे रास्ते पर चलने की सीख देने वाला संदेश बन चुका है।

55 साल बाद भी गुलजार का लिखा यह गीत लोगों की जुबान पर है और आने वाली पीढ़ियां भी इसे याद रखेंगी। यही किसी रचना की असली सफलता होती है कि समय बदलने के बावजूद उसका महत्व और प्रभाव बरकरार रहे।

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