मुंबई। बॉलीवुड के दमदार अभिनेता सनी देओल की आगामी फिल्म 'सूर्या- अंत से आरंभ तक' रिलीज से पहले ही विवादों में घिर गई है। हाल ही में फिल्म का टीजर जारी किया गया था, जिसमें स्वास्थ्य सेवाओं में कथित भ्रष्टाचार और मरीजों के शोषण के खिलाफ सनी देओल का किरदार आवाज उठाता दिखाई देता है। हालांकि, टीजर सामने आने के बाद इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने फिल्म में डॉक्टरों के चित्रण पर गंभीर आपत्ति जताई है। संगठन ने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर फिल्म की तत्काल और निष्पक्ष समीक्षा करने की मांग की है। आईएमए का कहना है कि फिल्म में चिकित्सा पेशे को जिस तरीके से दिखाया गया है, उससे डॉक्टरों के प्रति लोगों का भरोसा कमजोर हो सकता है और स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ हिंसा बढ़ने का खतरा पैदा हो सकता है।
सनी देओल के जन्मदिन पर रिलीज हुआ था टीजर
फिल्म 'सूर्या- अंत से आरंभ तक' का टीजर 19 अक्टूबर 2026 को सनी देओल के 69वें जन्मदिन के मौके पर रिलीज किया गया था।टीजर में सनी देओल अपने पुराने आक्रामक अंदाज में नजर आते हैं। हालांकि, इस बार उनका किरदार एक ऐसे पिता का है, जो अपनी बेटी की मौत के बाद सच्चाई जानने के लिए संघर्ष करता है।
फिल्म में दिखाया गया है कि बेटी की मौत के बाद पिता को स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जानकारी मिलती है। इसके बाद वह इस व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष शुरू कर देता है।
निर्माताओं ने फिल्म को वास्तविक घटनाओं से प्रेरित बताया है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कहानी किन वास्तविक घटनाओं पर आधारित है।डॉक्टरों की छवि को लेकर IMA ने जताई चिंता
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने अपने पत्र में कहा है कि फिल्म के प्रचार से जुड़ी सामग्री में चिकित्सा पेशे को लेकर ऐसा चित्रण किया गया है, जिससे पूरे डॉक्टर समुदाय की छवि प्रभावित होने की आशंका है।संगठन के अनुसार, कुछ व्यक्तियों द्वारा किए गए गलत कार्यों के आधार पर पूरे चिकित्सा समुदाय को भ्रष्ट दिखाना उचित नहीं है।
आईएमए ने कहा कि देशभर में बड़ी संख्या में डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी मरीजों के इलाज के लिए समर्पण के साथ काम करते हैं। ऐसे में किसी फिल्म के माध्यम से पूरे पेशे को संदेह के घेरे में खड़ा करना चिंता का विषय है।संगठन ने सरकार से मांग की है कि फिल्म की सामग्री की समीक्षा कर संबंधित चिंताओं पर उचित कार्रवाई की जाए।
डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा बढ़ने की आशंका
आईएमए ने फिल्म के टीजर में चिकित्सा पेशेवरों के खिलाफ दिखाई गई हिंसा को लेकर भी आपत्ति जताई है।संगठन का कहना है कि यदि किसी फिल्म में डॉक्टरों या अस्पताल कर्मचारियों पर हमले को सही अथवा वीरतापूर्ण कदम के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, तो इससे गलत संदेश जा सकता है।आईएमए के अनुसार, देश में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा पहले से ही महत्वपूर्ण मुद्दा है।
ऐसी परिस्थितियों में फिल्मों और अन्य मनोरंजन माध्यमों को स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देने वाली प्रस्तुति से बचना चाहिए।संगठन ने आशंका जताई है कि इस प्रकार का चित्रण अस्पतालों में स्वास्थ्यकर्मियों के प्रति आक्रोश और अविश्वास बढ़ा सकता है।
मरीज और डॉक्टर के रिश्ते पर पड़ सकता है असर
आईएमए ने अपने पत्र में डॉक्टर और मरीज के बीच विश्वास को स्वास्थ्य सेवाओं की महत्वपूर्ण आधारशिला बताया है।संगठन के मुताबिक, मरीज इलाज के दौरान डॉक्टरों पर भरोसा करते हैं और अपनी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों की जानकारी साझा करते हैं।यदि किसी फिल्म के माध्यम से चिकित्सा पेशे के प्रति व्यापक अविश्वास पैदा होता है, तो इससे मरीजों और डॉक्टरों के संबंध प्रभावित हो सकते हैं।
आईएमए का कहना है कि चिकित्सा क्षेत्र में भ्रष्टाचार या अनियमितताओं की आलोचना की जा सकती है, लेकिन इसके लिए पूरे डॉक्टर समुदाय को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।संगठन ने स्वास्थ्य सेवाओं में जनता के विश्वास को बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया है।
फिल्म में मेडिकल सिस्टम के भ्रष्टाचार पर सवाल
फिल्म के टीजर में सनी देओल का किरदार स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े कई गंभीर मुद्दे उठाता नजर आता है।टीजर में डॉक्टरों द्वारा मरीजों से अधिक शुल्क वसूलने, अनावश्यक जांच कराने और इलाज के नाम पर कथित कमीशनखोरी जैसे आरोपों को कहानी का हिस्सा बनाया गया है।
सनी देओल का किरदार सवाल उठाता है कि जब लोग डॉक्टरों को भगवान मानकर अपनी जिंदगी उनके हाथों में सौंप देते हैं, तो भरोसा टूटने पर मरीजों और उनके परिवारों पर क्या गुजरती है।
फिल्म की कहानी एक पिता के निजी दुख से शुरू होकर स्वास्थ्य व्यवस्था की कथित खामियों को उजागर करने के संघर्ष तक पहुंचती दिखाई देती है।हालांकि, टीजर में प्रस्तुत आरोप फिल्म की काल्पनिक या वास्तविक घटनाओं से प्रेरित कहानी का हिस्सा हैं। इन्हें पूरे चिकित्सा क्षेत्र के बारे में प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।
अभिव्यक्ति की आजादी का भी किया सम्मान
आईएमए ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि वह रचनात्मक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करता है।संगठन का कहना है कि फिल्म निर्माताओं को सामाजिक मुद्दों पर कहानी प्रस्तुत करने का अधिकार है, लेकिन इस स्वतंत्रता का इस्तेमाल जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए।विशेष रूप से उन विषयों पर अतिरिक्त सावधानी जरूरी है, जिनका संबंध आवश्यक सेवाओं, सार्वजनिक विश्वास और कर्मचारियों की सुरक्षा से हो।
आईएमए ने केंद्रीय मंत्री से अनुरोध किया है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए फिल्म की समीक्षा कराई जाए।संगठन ने चिकित्सा शिक्षा के भविष्य पर संभावित प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई है।
सेंसर बोर्ड ने फिल्म को लेकर दी जानकारी
विवाद के बीच केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी भी सामने आई है।सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अनुसार, फिल्म 'सूर्या- अंत से आरंभ तक' को अभी प्रमाणन के लिए सीबीएफसी के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया है।इसका मतलब है कि फिल्म की औपचारिक प्रमाणन प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।आईएमए की ओर से समीक्षा की मांग की गई है, लेकिन फिलहाल फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
20 नवंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी फिल्म
सनी देओल की यह फिल्म 20 नवंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।फिल्म का निर्देशन एम. पद्मकुमार ने किया है। वहीं इसका निर्माण दीपक मुकुट, हेमंत मुकुट और लोकेश मुकुट ने किया है।
फिल्म में सनी देओल के अलावा रवि किशन, प्रज्ञा जायसवाल, टीनू आनंद, मनीष वाधवा और जिशु सेनगुप्ता जैसे कलाकार महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आएंगे।फिल्म की कहानी एक पिता के संघर्ष और व्यवस्था से न्याय पाने की कोशिश पर आधारित है।टीजर में सनी देओल का एक्शन और भावनात्मक अंदाज देखने को मिला है।
अब निर्माताओं की प्रतिक्रिया का इंतजार
आईएमए की आपत्ति सामने आने के बाद फिल्म की रिलीज और उसके कंटेंट को लेकर चर्चा तेज हो गई है।एक तरफ फिल्म चिकित्सा व्यवस्था में कथित भ्रष्टाचार जैसे गंभीर विषय को उठाती दिखाई दे रही है, वहीं दूसरी तरफ डॉक्टरों का संगठन पूरे चिकित्सा समुदाय की छवि और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित है।अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि फिल्म निर्माता इन आपत्तियों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और प्रमाणन प्रक्रिया के दौरान किन पहलुओं पर विचार किया जाता है।
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