Mumbai. मुंबई। देवों के देव महादेव’ में देवी लक्ष्मी का किरदार निभा चुकीं अभिनेत्री रागिनी चौबे धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की कथा से लेकर श्रीराम की अयोध्या वापसी तक, त्यौहारों से जुड़ी कुछ अनसुनी और रोचक कहानियाँ सुनाएँगी। दीपावली का त्यौहार आते ही घर रोशनी से जगमगा उठते हैं, पकवानों की खुशबू फैल जाती है और परिवार के सभी लोग मिलकर खुशियाँ मनाते हैं। लेकिन, क्या हमने कभी सोचा है कि इन त्यौहारों को मनाने के पीछे क्या कहानियाँ हैं? भगवान धन्वंतरि कौन थे और धनतेरस पर उनकी पूजा क्यों की जाती है? श्रीराम के अयोध्या लौटने पर लोगों ने हजारों दीपक क्यों जलाए थे? भाई दूज का त्यौहार क्यों मनाया जाता है और इसके पीछे कौन-सी कहानी है?
इस दीपावली, शेमारू टीवी लेकर आ रहा है ‘शेमारू दीपोत्सव- हर उत्सव की कहानी’। यह चार खास कड़ियों की एक सीरीज़ है, जिसमें त्यौहारों से जुड़ी ऐसी कहानियाँ बताई जाएँगी, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। इस सीरीज़ के जरिए दर्शक भारत के अलग-अलग त्यौहारों, रीति-रिवाजों और उन्हें मनाने के पीछे की वजहों को जान सकेंगे। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी पुरानी परंपराओं से जोड़ना और परिवार के लोगों को साथ बैठकर इन कहानियों पर बात करने का मौका देना है। इस सीरीज़ की अलग-अलग कड़ियों में धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की कहानी और यम दीपदान का महत्व बताया जाएगा। वहीं, दीपावली पर श्रीराम की अयोध्या वापसी और लक्ष्मी-गणेश की पूजा के बारे में बताया जाएगा। गोवर्धन पूजा की कहानी के जरिए भगवान श्रीकृष्ण का यह संदेश दिखाया जाएगा कि आस्था के आगे अहंकार की कोई जगह नहीं है। इसके अलावा, भाई दूज पर यमराज और उनकी बहन यमुना से जुड़ी कहानी भी सुनाई जाएगी।
इस खास सीरीज़ को अभिनेत्री रागिनी चौबे प्रस्तुत करेंगी, जिन्हें लोकप्रिय पौराणिक धारावाहिक ‘देवों के देव महादेव’ में देवी लक्ष्मी की भूमिका निभाने के लिए जाना जाता है। वे हर त्यौहार से जुड़ी कहानी और उसका महत्व बताएँगी। साथ ही, इन कहानियों से मिलने वाली सीख भी साझा करेंगी, जो आज के समय में परिवारों के लिए भी उतनी ही जरूरी है।
इस सीरीज़ से जुड़ने पर खुशी जाहिर करते हुए, रागिनी चौबे ने कहा, “देवी लक्ष्मी का किरदार निभाने के बाद से ही इन कहानियों से मेरा खास जुड़ाव रहा है। ‘शेमारू दीपोत्सव’ के जरिए मेरी कोशिश है कि परिवार के लोग फिर से साथ बैठकर कहानियाँ सुनने और सुनाने की पुरानी परंपरा का आनंद लें। इससे बच्चों के मन में सवाल उठेंगे और माता-पिता व दादा-दादी को भी उन कहानियों को सुनाने का मौका मिलेगा, जो उन्होंने कई सालों से किसी को नहीं सुनाई हैं। इन कहानियों को जानने से हम अपनी परंपराओं और संस्कारों से जुड़े रहते हैं। ये हमें प्यार, आस्था, दूसरों के प्रति आभार और परिवार की अहमियत भी समझाती हैं। आने वाली पीढ़ी को हम सिर्फ अपनी परंपराएँ ही नहीं, बल्कि उनसे जुड़ी अच्छी सीख और भावनाएँ भी दे सकते हैं।” देखना न भूलें ‘शेमारू दीपोत्सव- हर उत्सव की कहानी’, 6, 8, 10 और 11 नवंबर, 2026 को रात 9 बजे, सिर्फ शेमारू टीवी पर। इस सीरीज़ की चारों कड़ियाँ शेमारू के यूट्यूब चैनल पर भी उपलब्ध होंगी।
Tags: