पानी में तैरता अंडा खराब होता है या नहीं? फेंकने से पहले जान लें यह सच

Update: 2026-07-13 12:56 GMT

लाइफस्टाइल, नई दिल्ली। संडे हो या मंडे, रोज खाएं अंडे... यह कहावत तो हम सबने सुनी है। प्रोटीन और पोषक तत्वों से भरपूर अंडा भारतीय रसोई का एक अहम हिस्सा है। अक्सर जब हम बाजार से अंडे खरीदकर लाते हैं या घर में उन्हें उबालने जाते हैं, तो उनकी ताजगी जांचने के लिए एक पुराना और बेहद लोकप्रिय घरेलू नुस्खा अपनाते हैं— 'अंडों को पानी से भरे बर्तन में डालना'। इस टेस्ट के दौरान जो अंडा पानी की सतह के नीचे बिल्कुल तली में बैठ जाता है, उसे हम एकदम ताजा मान लेते हैं। वहीं, जो अंडा पानी के ऊपर तैरने लगता है, उसे पुराना या खराब मानकर अक्सर फेंक दिया जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर एक ठोस और भारी-भरकम अंडा पानी पर तैर कैसे सकता है? क्या इसके अंदर कोई जादू है, या फिर यह अंडा पूरी तरह सड़ चुका है? इसके पीछे कोई रहस्य नहीं, बल्कि विज्ञान का एक बेहद दिलचस्प नियम काम करता है, जिसे 'एयर पॉकेट' का सिद्धांत कहा जाता है।

अंडे के छिलके का छिपा हुआ रहस्य: हजारों सूक्ष्म छिद्र

पहली नजर में देखने पर अंडे का बाहरी छिलका (Eggshell) हमें एकदम कड़ा, चिकना और पूरी तरह से सील पैक्ड दिखाई देता है। हमें लगता है कि इसके भीतर बाहरी हवा प्रवेश नहीं कर सकती। लेकिन विज्ञान की नजर से देखें तो यह सच नहीं है। दरअसल, अंडे के इस कैल्शियम कार्बोनेट से बने छिलके में हजारों (लगभग 7,000 से 9,000) बहुत ही छोटे-छोटे और बारीक छिद्र (Microscopic Pores) होते हैं। ये छिद्र इतने सूक्ष्म होते हैं कि इन्हें हम अपनी नंगी आंखों से बिल्कुल नहीं देख सकते, लेकिन इनके जरिए हवा और नमी का आदान-प्रदान लगातार होता रहता है। कुदरत ने ये छेद इसलिए बनाए हैं ताकि अंडे के अंदर विकसित हो रहे भ्रूण को ऑक्सीजन मिल सके।

समय के साथ कैसे बदलती है अंडे की आंतरिक बनावट?

जब अंडा बिल्कुल ताजा होता है, तो उसके भीतर का लिक्विड (सफेद भाग यानी एल्ब्यूमिन और पीला भाग यानी योक) पूरी तरह से भरा होता है। जैसे-जैसे अंडा पुराना होने लगता है, इसके भीतर एक प्राकृतिक रासायनिक प्रक्रिया शुरू हो जाती है। अंडे के छिलके में मौजूद उन हजारों सूक्ष्म छिद्रों के जरिए अंडे के अंदर मौजूद नमी (Moisture) और तरल पदार्थ धीरे-धीरे भाप बनकर यानी इवेपोरेट होकर बाहर निकलने लगते हैं।

जब अंदर से तरल पदार्थ बाहर निकलता है, तो उसकी जगह लेने के लिए बाहर की हवा उन छिद्रों के रास्ते अंडे के भीतर प्रवेश करने लगती है। अंडे के भीतर दो झिल्लियां (Membranes) होती हैं। इन झिल्लियों के बीच में एक छोटा सा खाली स्थान होता है जिसे 'एयर सेल' या 'एयर पॉकेट' (Air Pocket) कहा जाता है। जैसे-जैसे अंडा पुराना होता जाता है, नमी बाहर निकलती जाती है और इस एयर पॉकेट में हवा का आकार लगातार बढ़ता जाता है।

तैरने और डूबने के पीछे आर्किमिडीज का सिद्धांत

अंडे का पानी में तैरना पूरी तरह से घनत्व (Density) के विज्ञान पर आधारित है। जब अंडा ताजा होता है, तो उसमें हवा बहुत कम और तरल पदार्थ ज्यादा होता है, जिससे अंडे का घनत्व पानी के घनत्व से अधिक होता है और वह पानी में डूब जाता है।

लेकिन जब अंडा पुराना हो जाता है और उसके अंदर की 'एयर पॉकेट' हवा से पूरी तरह भर जाती है, तो अंडे का कुल वजन तो लगभग उतना ही रहता है या थोड़ा कम होता है, लेकिन उसका आंतरिक घनत्व पानी की तुलना में काफी कम हो जाता है। हवा से भरा यह एयर पॉकेट एक छोटे बैलून (गुब्बारे) की तरह काम करता है, जो अंडे को पानी की सतह पर ऊपर की ओर धकेलता है। इसी वजह से पुराना होने पर भारी दिखने वाला अंडा भी पानी पर आसानी से तैरने लगता है।

क्या तैरने वाला हर अंडा सड़ा हुआ और खराब होता है?

आम तौर पर लोग मानते हैं कि जो अंडा तैर गया, वह सड़ चुका है और उसे तुरंत डस्टबिन में फेंक देना चाहिए। लेकिन यहाँ आपको सतर्क रहने की जरूरत है। पानी में तैरने का मतलब केवल यह है कि अंडा 'पुराना' हो चुका है, इसका यह कतई मतलब नहीं है कि वह 'सड़' चुका है या खाने लायक नहीं रहा।

अगर अंडा पानी में तैर रहा है, तो उसे फेंकने के बजाय पहले एक कटोरी में अलग से तोड़कर देखें। अगर अंडे को तोड़ने के बाद उसमें से किसी भी तरह की अजीब या दुर्गंध (Bad Smell) नहीं आ रही है, और उसका पीला भाग (Yolk) पूरी तरह गोल और ठीक है, तो वह अंडा खाने के लिए पूरी तरह सुरक्षित है। हां, ऐसे पुराने अंडों को हाफ-फ्राई या ऑमलेट बनाने के बजाय पूरी तरह उबालकर (Hard-Boiled) खाना ज्यादा बेहतर और सुरक्षित माना जाता है। इसलिए अगली बार अंडे को पानी में तैरता देख उसे सीधे कचरे में फेंकने की भूल न करें, बल्कि पहले विज्ञान के इस नियम और अंडे की महक को जरूर जांच लें।

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