आंध्र प्रदेश के भोगापुरम एयरपोर्ट पर दिखेगी 90 फीट ऊंची एटिकोप्पका बोम्मालु की भव्य झलक, यात्रियों का होगा पारंपरिक स्वागत
आंध्र प्रदेश: भोगापुरम स्थित अल्लूरी सीताराम राजू इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर यात्रियों के स्वागत के लिए एक खास और आकर्षक तैयारी की जा रही है। एयरपोर्ट परिसर में 90 फीट ऊंची एटिकोप्पका बोम्मालु (Etikoppaka Bommalu) की विशाल कलाकृतियां स्थापित की जा रही हैं। ये पारंपरिक लकड़ी के खिलौने आंध्र प्रदेश की समृद्ध लोक कला और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक हैं। इन विशाल मूर्तियों के जरिए राज्य की संस्कृति को देश-विदेश से आने वाले यात्रियों के सामने पेश किया जाएगा।
एटिकोप्पका बोम्मालु आंध्र प्रदेश की प्रसिद्ध पारंपरिक कला शैली है, जिसका संबंध विशाखापत्तनम जिले के एटिकोप्पका गांव से है। यहां के कारीगर सदियों से प्राकृतिक रंगों और हल्की लकड़ी का इस्तेमाल कर खूबसूरत खिलौने तैयार करते आए हैं। इन खिलौनों को उनकी अनोखी डिजाइन, चमकदार रंगों और पर्यावरण अनुकूल निर्माण के लिए जाना जाता है। अब इसी कला को बड़े स्तर पर प्रदर्शित करने के लिए एयरपोर्ट पर 90 फीट ऊंची संरचनाएं तैयार की जा रही हैं।
भोगापुरम एयरपोर्ट को आंध्र प्रदेश के प्रमुख आधुनिक हवाई अड्डों में शामिल किया जा रहा है। सरकार और प्रशासन का उद्देश्य है कि यह एयरपोर्ट केवल यात्रा का केंद्र न बने, बल्कि राज्य की संस्कृति और पहचान का भी प्रतिनिधित्व करे। इसी सोच के तहत एयरपोर्ट के डिजाइन और सजावट में स्थानीय कला और परंपराओं को जगह दी जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार, यात्रियों के लिए एयरपोर्ट का अनुभव यादगार बनाने के लिए कई सांस्कृतिक तत्वों को शामिल किया जा रहा है। 90 फीट ऊंची एटिकोप्पका बोम्मालु इसी पहल का हिस्सा हैं। विशाल आकार की ये कलाकृतियां एयरपोर्ट पर आने वाले लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेंगी और आंध्र प्रदेश की कला को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में मदद करेंगी।
एटिकोप्पका कला को वर्ष 2017 में भारत सरकार की ओर से भौगोलिक संकेतक (GI Tag) भी मिला था। इस मान्यता के बाद इस कला को देश और दुनिया में नई पहचान मिली। स्थानीय कारीगरों द्वारा बनाए जाने वाले इन खिलौनों में पारंपरिक तकनीक और प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया जाता है। इनकी खासियत यह है कि इनमें किसी भी तरह के हानिकारक रसायनों का इस्तेमाल नहीं किया जाता।
भोगापुरम एयरपोर्ट पर इन विशाल कलाकृतियों की स्थापना से स्थानीय कलाकारों और हस्तशिल्प को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे पर्यटकों और यात्रियों में आंध्र प्रदेश की लोक कला के प्रति रुचि बढ़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सांस्कृतिक प्रदर्शन किसी भी नए इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को केवल उपयोगी नहीं बल्कि भावनात्मक रूप से भी जोड़ते हैं।
अल्लूरी सीताराम राजू इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने के बाद यह क्षेत्र व्यापार, पर्यटन और कनेक्टिविटी के लिहाज से महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। एयरपोर्ट पर लगाई जा रही 90 फीट ऊंची एटिकोप्पका बोम्मालु न केवल स्वागत की प्रतीक होंगी, बल्कि आंध्र प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को भी दर्शाएंगी।
इस पहल से यात्रियों को आधुनिक सुविधाओं के साथ-साथ राज्य की परंपराओं की झलक भी मिलेगी। उम्मीद की जा रही है कि ये विशाल कलाकृतियां भोगापुरम एयरपोर्ट की सबसे खास पहचान बन जाएंगी और आने वाले वर्षों में यहां पहुंचने वाले हर यात्री के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहेंगी।