अमरावती। आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनाव की नामांकन प्रक्रिया के दौरान हिंसा और तनाव की घटनाओं ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को राज्य के 13 जिलों में चुनाव से जुड़ी कुल 31 घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें उम्मीदवारों के बीच झड़प, मारपीट, पथराव, वाहनों में आगजनी और नामांकन पत्र छीनने तथा फाड़ने जैसी गंभीर घटनाएं शामिल हैं। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) हरीश कुमार गुप्ता ने गुरुवार देर रात जारी बयान में इन घटनाओं की जानकारी दी और स्पष्ट किया कि चुनावी हिंसा में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
पुलिस के मुताबिक, कुल 31 घटनाओं में से 22 मामले हिंसा, झड़प और कानून-व्यवस्था बिगड़ने से संबंधित हैं। वहीं, नौ घटनाएं विशेष रूप से नामांकन पत्र छीनने या फाड़ने से जुड़ी हैं। अलग-अलग घटनाओं में नामांकन दस्तावेजों को छीनने, फाड़ने या नष्ट करने के कुल 16 मामले सामने आए हैं।
13 जिलों में चुनावी हिंसा, अनंतपुर सबसे ज्यादा प्रभावित
स्थानीय निकाय चुनाव की नामांकन प्रक्रिया के दौरान राज्य के कई हिस्सों में तनावपूर्ण स्थिति देखने को मिली। पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार, सबसे अधिक आठ घटनाएं अनंतपुर जिले में दर्ज की गईं।इसके अलावा अन्नमय्या, कडप्पा, प्रकाशम और तिरुपति जिलों में तीन-तीन घटनाएं सामने आईं। चित्तूर, श्री सत्य साईं और पलनाडु जिलों में दो-दो मामले दर्ज किए गए।
नेल्लोर, कुरनूल, मरकापुरम, नंद्याल और एलुरु जिलों में एक-एक घटना सामने आई।इन घटनाओं में अलग-अलग राजनीतिक दलों के उम्मीदवार और समर्थक प्रभावित हुए हैं। कई स्थानों पर चुनावी प्रतिस्पर्धा के कारण विवाद बढ़ा और स्थिति हिंसक हो गई।नामांकन पत्र छीनने और फाड़ने की घटनाएंचुनाव के दौरान सबसे गंभीर घटनाओं में उम्मीदवारों के नामांकन पत्र छीनने और फाड़ने के मामले शामिल हैं।पुलिस महानिदेशक हरीश कुमार गुप्ता ने इन घटनाओं को लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला बताया है।उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को चुनाव लड़ने से रोकना या उसके नामांकन दस्तावेजों को नुकसान पहुंचाना गंभीर अपराध है।डीजीपी के अनुसार, प्रत्येक योग्य नागरिक को चुनाव में भाग लेने का अधिकार है। किसी भी राजनीतिक दल या व्यक्ति को इस अधिकार में बाधा डालने की अनुमति नहीं दी जा सकती।उन्होंने स्पष्ट किया कि नामांकन प्रक्रिया में बाधा डालने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पथराव और आगजनी से बिगड़े हालात
चुनावी हिंसा के दौरान राज्य के विभिन्न इलाकों में पथराव और लाठी-डंडों से हमले की छह घटनाएं दर्ज की गईं।इन घटनाओं में चार वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया। इनमें दो कारें और दो मोटरसाइकिल शामिल थीं।इसके अलावा दो आवासीय मकानों पर हमला किया गया या उन्हें नुकसान पहुंचाया गया। एक मामले में अर्थमूवर मशीन की मदद से मकान को क्षतिग्रस्त करने की जानकारी भी सामने आई है।चुनावी तनाव के बीच एक स्थान पर हवा में फायरिंग की घटना भी दर्ज की गई।पुलिस के मुताबिक, कई स्थानों पर हिंसा के कारण आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त बल लगाना पड़ा।
पुलिस वाहन पर हमला, जवान गंभीर घायल
चुनावी हिंसा के दौरान पुलिसकर्मियों को भी निशाना बनाया गया। एक घटना में उम्मीदवारों को सुरक्षा प्रदान कर रहे पुलिस वाहन पर पथराव किया गया।हमले में पुलिस वाहन क्षतिग्रस्त हो गया और एक पुलिस कांस्टेबल के सिर में गंभीर चोट आई।इसके अलावा हिंसक घटनाओं में एक चुनावी उम्मीदवार सहित दो लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी सामने आई है।
तीन झड़पों में कई अन्य लोगों को भी चोटें आईं। वहीं, तीन घटनाओं में सड़क जाम, धरना-प्रदर्शन और यातायात बाधित करने के मामले दर्ज किए गए।54 लोगों को बनाया गया आरोपीडीजीपी कार्यालय के अनुसार, चुनावी हिंसा से संबंधित मामलों में अब तक कम से कम 54 लोगों को आरोपी बनाया गया है।कुल 16 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें जवाबी शिकायतों के आधार पर दर्ज प्रकरण भी शामिल हैं। इसके अलावा 11 अन्य घटनाओं में मामले दर्ज करने की प्रक्रिया चल रही है।
पुलिस ने घटनास्थलों से चार लोगों को पकड़ा है।
डीजीपी ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि लंबित मामलों को जल्द दर्ज किया जाए और हिंसा में शामिल लोगों की पहचान कर कार्रवाई की जाए।उन्होंने संवेदनशील नामांकन केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के भी निर्देश दिए हैं।भीड़ नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमालकई जगह तनाव बढ़ने के बाद पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा।पुलिस के मुताबिक, तीन घटनाओं में लाठीचार्ज किया गया। वहीं, पुलिस वाहन पर हमला करने वाली भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के दो गोले छोड़े गए।डीजीपी ने बताया कि घटनास्थलों के सीसीटीवी फुटेज, वीडियो और तस्वीरों की जांच की जा रही है।इनकी मदद से हिंसा में शामिल अन्य आरोपियों की पहचान की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसी भी राजनीतिक दबाव के बिना निष्पक्ष कार्रवाई की जाए।
टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस के बीच बढ़ा तनाव
स्थानीय निकाय चुनाव को लेकर सत्तारूढ़ तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) और विपक्षी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के बीच राजनीतिक तनाव बढ़ गया है।वाईएसआर कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि उसके उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोका जा रहा है और उनके दस्तावेज छीने जा रहे हैं।वहीं, सत्तारूढ़ गठबंधन ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए उस पर चुनाव प्रक्रिया बाधित करने का आरोप लगाया है।पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार, घटनाओं में टीडीपी, वाईएसआरसीपी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और एक निर्दलीय उम्मीदवार सहित विभिन्न दलों के प्रत्याशी प्रभावित हुए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद चुनाव आयोग का फैसला
आंध्र प्रदेश में शहरी स्थानीय निकाय चुनाव को लेकर भी विवाद सामने आया है।विपक्षी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग को उन उम्मीदवारों की शिकायतों पर विचार करने का निर्देश दिया था, जिन्हें कथित तौर पर नामांकन दाखिल करने से रोका गया।इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने चार शहरी स्थानीय निकायों में नामांकन की समयसीमा बढ़ाने का फैसला किया।
इनमें कडप्पा नगर निगम, राजमपेट नगरपालिका, मैदुकुर नगरपालिका और तिरुपति नगर निगम शामिल हैं।आयोग ने 23 और 24 अक्टूबर को अतिरिक्त नामांकन का अवसर देने की घोषणा की। यह प्रक्रिया शहरी निकाय चुनाव से जुड़ी है, जबकि 22 अक्टूबर की 31 घटनाओं की पुलिस रिपोर्ट एमपीटीसी और जेडपीटीसी चुनावों के नामांकन से संबंधित है।
डीजीपी ने दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी
डीजीपी हरीश कुमार गुप्ता ने स्पष्ट किया कि कानून किसी भी राजनीतिक दल के आधार पर भेदभाव नहीं करता।उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ दल, विपक्ष या किसी अन्य संगठन से जुड़े व्यक्ति के खिलाफ अपराध साबित होने पर कानून के अनुसार कार्रवाई होगी।डीजीपी ने नागरिकों से अपील की कि चुनाव के दौरान धमकी, हिंसा या नामांकन में बाधा डालने की घटना सामने आने पर तुरंत पुलिस को जानकारी दें।
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