नेल्लोर। आंध्र प्रदेश के नेल्लोर जिले में शनिवार को स्थानीय निकाय चुनावों की मतगणना के दौरान उस समय विवाद की स्थिति बन गई, जब पुलिस ने पूर्व विधायक और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के आत्मकुर निर्वाचन क्षेत्र प्रभारी मेकापति विक्रम रेड्डी को मतगणना केंद्र की ओर जाने से रोक दिया। आत्मकुर में जिला परिषद क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्र (ZPTC) और मंडल परिषद क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्र (MPTC) चुनावों की मतगणना चल रही थी। इसी दौरान मतगणना स्थल की ओर जा रहे विक्रम रेड्डी की कार को पुलिस अधिकारियों ने रास्ते में रोक दिया।
जानकारी के अनुसार, पुलिस अधिकारियों ने सड़क पर अपना वाहन खड़ा कर पूर्व विधायक की कार का रास्ता बंद कर दिया। अधिकारियों ने उन्हें बताया कि मतगणना केंद्र के परिसर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं है। पुलिस की इस कार्रवाई पर विक्रम रेड्डी ने नाराजगी जाहिर की और मौके पर तैनात अधिकारियों से सवाल किया कि आखिर उन्हें मतगणना स्थल की ओर जाने से किस आधार पर रोका जा रहा है।
पूर्व विधायक ने पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य मतगणना केंद्र के भीतर प्रवेश करना या सुरक्षा व्यवस्था में किसी तरह का हस्तक्षेप करना नहीं है। उन्होंने कहा कि वह चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों के अनुसार निर्धारित 100 मीटर की सीमा तक ही जाना चाहते हैं। उनका पुलिस के आधिकारिक कामकाज में बाधा डालने का कोई इरादा नहीं है। इसके बावजूद सुरक्षा अधिकारियों ने उनकी गाड़ी को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी।
इस घटनाक्रम के बाद विक्रम रेड्डी ने मौके पर मौजूद मीडिया प्रतिनिधियों से बातचीत करते हुए पुलिस की कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इस तरह विपक्षी नेताओं को मतगणना स्थल के आसपास जाने से रोकना लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है। उन्होंने पुलिस द्वारा लगाई गई पाबंदियों को अलोकतांत्रिक और अभूतपूर्व करार दिया।
वाईएसआरसीपी नेता ने सवाल उठाया कि जब उनकी पार्टी के उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं और उनके मतों की गिनती की जा रही है, तब विपक्षी नेताओं को मतगणना प्रक्रिया पर नजर रखने से क्यों रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है और विपक्षी नेताओं पर इस तरह की पाबंदियां लगाने से कई सवाल पैदा होते हैं।
विक्रम रेड्डी ने आरोप लगाया कि मतदान के दिन भी विपक्षी दलों के नेताओं के साथ इसी तरह का व्यवहार किया गया था। उनके मुताबिक, मतदान के दौरान लगाई गई मनमानी पाबंदियों से सत्ताधारी दल को कथित चुनावी धांधली करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि अब मतगणना के दौरान भी विपक्षी नेताओं को रोका जाना गंभीर चिंता का विषय है।
पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान विपक्षी नेताओं के अधिकारों को सीमित करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए सभी राजनीतिक दलों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए। मतगणना जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया के दौरान किसी भी राजनीतिक दल के प्रतिनिधियों के साथ भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने पुलिस अधिकारियों से यह भी जानना चाहा कि जब वह निर्धारित सीमा तक ही जाना चाहते हैं और किसी सरकारी कार्य में बाधा नहीं डाल रहे हैं, तब उन्हें आगे बढ़ने से रोकने का क्या औचित्य है। हालांकि, उनके स्पष्टीकरण के बाद भी पुलिस ने अपनी पाबंदी बरकरार रखी और उन्हें आगे जाने नहीं दिया।
इस घटना ने आत्मकुर में चल रही स्थानीय निकाय चुनावों की मतगणना के दौरान राजनीतिक विवाद को सामने ला दिया है। वाईएसआरसीपी नेता ने पुलिस की कार्रवाई को लेकर चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि विपक्षी नेताओं को मतगणना प्रक्रिया से दूर रखने जैसी कार्रवाई से लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास प्रभावित होता है।
विक्रम रेड्डी ने इस पूरे घटनाक्रम को विपक्षी नेताओं के अधिकारों से जुड़ा मामला बताया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव केवल मतदान तक सीमित नहीं होता, बल्कि मतगणना की पारदर्शिता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में विपक्षी नेताओं को निर्धारित नियमों के अंतर्गत मतगणना प्रक्रिया पर नजर रखने का अवसर मिलना चाहिए।
फिलहाल इस मामले में विक्रम रेड्डी के आरोप सामने आए हैं। पुलिस की ओर से उन्हें रोकने के विस्तृत कारणों को लेकर कोई अतिरिक्त आधिकारिक स्पष्टीकरण उपलब्ध कराई गई जानकारी में नहीं है।