Andhra Pradesh आंध्र प्रदेश। पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण नीति को लेकर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी (IIPE) विशाखापत्तनम के निदेशक शालिवहन श्रीवास्तव ने इसके आर्थिक और पर्यावरणीय लाभों पर बात की है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल में मिलाया जाने वाला हर लीटर एथेनॉल देश में आयातित जीवाश्म ईंधन की जगह घरेलू स्तर पर उत्पादित नवीकरणीय ईंधन का उपयोग बढ़ाता है। शालिवहन श्रीवास्तव ने कहा कि एथेनॉल मिश्रण से भारत की कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होती है और इससे देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है। उन्होंने कहा कि एथेनॉल उत्पादन का सीधा लाभ किसानों को भी मिलता है, क्योंकि इसे कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है।
उन्होंने कहा कि एथेनॉल नीति केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण रोजगार बढ़ाने और कृषि आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन देने में भी मदद करती है। उनके अनुसार, एथेनॉल के इस्तेमाल से पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्योंकि यह स्वच्छ ईंधन विकल्प के रूप में काम करता है। IIPE निदेशक ने कहा कि जब देश में उत्पादित एथेनॉल का उपयोग पेट्रोल में किया जाता है, तो ईंधन पर खर्च होने वाला अधिक मूल्य देश के भीतर ही रहता है। इससे घरेलू अर्थव्यवस्था को फायदा पहुंचता है और विदेशी मुद्रा की बचत होती है।
उन्होंने बताया कि भारत सरकार एथेनॉल ब्लेंडिंग को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसका उद्देश्य पेट्रोलियम आयात को कम करना, वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देना और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करना है। विशेषज्ञों के अनुसार, एथेनॉल मिश्रण नीति ऊर्जा सुरक्षा, किसानों की आय और हरित विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। हालांकि, इसके साथ वाहन क्षमता, ईंधन दक्षता और तकनीकी बदलाव जैसे मुद्दों पर भी लगातार चर्चा जारी है।