‘समस्या-समाधान करने वाले संस्थान बनें’ मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालयों से किया आह्वान
मुख्यमंत्री की पूर्वोत्तर विश्वविद्यालयों से अपील
गुवाहाटी: मुख्यमंत्री ने पूर्वोत्तर के विश्वविद्यालयों से केवल डिग्री और अकादमिक शिक्षा तक सीमित न रहने, बल्कि क्षेत्र की वास्तविक चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान खोजने वाले संस्थान बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को समाज, अर्थव्यवस्था और स्थानीय जरूरतों से सीधे जुड़कर काम करना चाहिए।
शोध को स्थानीय समस्याओं से जोड़ने पर जोर
मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालयों से स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए शोध और नवाचार को बढ़ावा देने की अपील की। उनका कहना था कि पूर्वोत्तर की भौगोलिक, सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों के समाधान के लिए विश्वविद्यालयों में होने वाला शोध जमीन पर उपयोगी साबित होना चाहिए।
युवाओं को नवाचार के अवसर देने की जरूरत
उन्होंने विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों को स्टार्टअप, उद्यमिता, तकनीक और नवाचार से जोड़ने पर भी जोर दिया। इससे युवाओं को रोजगार तलाशने के साथ-साथ रोजगार पैदा करने के अवसर मिल सकते हैं।
पूर्वोत्तर के विकास में विश्वविद्यालयों की बड़ी भूमिका
पूर्वोत्तर में बुनियादी ढांचे, कनेक्टिविटी, कृषि, पर्यटन, पर्यावरण और रोजगार जैसे कई क्षेत्रों में विशेष चुनौतियां हैं। विश्वविद्यालय इन विषयों पर शोध कर सरकार और समाज को बेहतर नीतियां और समाधान उपलब्ध करा सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने अकादमिक संस्थानों, उद्योग और सरकार के बीच सहयोग बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया, ताकि शोध का लाभ आम लोगों तक पहुंच सके।
सिर्फ डिग्री देने तक सीमित न रहें संस्थान
उन्होंने विश्वविद्यालयों से ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित करने का आग्रह किया, जिसमें छात्रों में समस्या पहचानने, समाधान विकसित करने और उसे जमीन पर लागू करने की क्षमता पैदा हो।