Guwahati , गुवाहाटी : असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शनिवार को गुवाहाटी के ज्योति विष्णु इंटरनेशनल कला मंदिर में एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF) पर राज्य-स्तरीय वर्कशॉप में हिस्सा लिया। इस वर्कशॉप और जागरूकता कार्यक्रम में पूरे असम से किसान, किसान उत्पादक संगठन (FPOs), कृषि-उद्यमी और बैंकों व वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 अगस्त 2020 को 'आत्मनिर्भर भारत अभियान' के तहत एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF) लॉन्च किया था। यह भारत सरकार की एक प्रमुख योजना है, जो फसल कटाई के बाद के प्रबंधन और सामुदायिक खेती के लिए ज़रूरी सुविधाओं (एसेट्स) के लिए ब्याज में छूट वाले लोन देती है।
इस योजना के तहत, योग्य व्यक्ति और संस्थान प्रति प्रोजेक्ट 2 करोड़ रुपये तक का लोन ले सकते हैं। इस पर सात साल तक सालाना 3% ब्याज में छूट मिलती है और बिना किसी गिरवी (कोलेटरल) के क्रेडिट गारंटी सपोर्ट भी मिलता है। लोगों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह योजना कृषि उत्पादों में वैल्यू एडिशन (मूल्यवर्धन) को बढ़ावा देने और आधुनिक कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए शुरू की गई थी। उन्होंने कहा कि यह पहल किसानों को न केवल फसल उगाने के लिए, बल्कि वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज, कस्टम हायरिंग सेंटर, ड्रोन, सेंसर, पंप, हाइड्रोपोनिक्स, एरोपोनिक्स, पॉलीहाउस, मिलिंग यूनिट और तेल निकालने वाली यूनिट जैसी सुविधाओं के ज़रिए उनकी प्रोसेसिंग, स्टोरेज और मार्केटिंग करने के लिए भी प्रोत्साहित करती है।
उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत राष्ट्रीय स्तर पर आवंटित 1 लाख करोड़ रुपये में से लगभग 95,000 करोड़ रुपये का इस्तेमाल देश भर के किसानों द्वारा किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि संस्थागत लोन (बैंक लोन) पाने में किसानों के सामने आने वाली सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक कोलेटरल (गिरवी रखने के लिए संपत्ति) की ज़रूरत है।उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत बनाया गया क्रेडिट गारंटी फंड बैंकों को गारंटी कवर देकर इस समस्या का समाधान करता है, जिससे किसानों को बिना कोलेटरल के लोन मिल पाता है।
उन्होंने यह भी बताया कि असम का क्रेडिट-डिपॉज़िट रेश्यो 32% से बढ़कर 70% हो गया है, हालांकि इसे और बढ़ाकर लगभग 90% तक ले जाने की गुंजाइश है। योजना के वित्तीय फायदों के बारे में बताते हुए सरमा ने कहा कि सरकार 2 करोड़ रुपये तक के लोन पर 3% ब्याज में छूट देती है और लोन की ब्याज दर अधिकतम 9% तय की गई है। आम तौर पर इस स्कीम के तहत लाभार्थियों को प्रोजेक्ट की लागत का 10% हिस्सा देना होता है, लेकिन उन्होंने घोषणा की कि असम सरकार लाभार्थी के हिस्से का 5% खुद उठाएगी। किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के मामले में, राज्य सरकार लाभार्थी का पूरा 10% हिस्सा उठाएगी।
उन्होंने यह भी बताया कि लाभार्थी साथ ही दूसरी सरकारी स्कीमों, जैसे PM-KUSUM, PMFME, MIDH और RKVY का भी लाभ उठा सकते हैं। एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के तहत असम के लिए तय रकम का ज़िक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य को 2,050 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिसमें से 893 किसानों, FPOs और एग्री-एंटरप्रेन्योर्स को 1,181 करोड़ रुपये के लोन मंज़ूर किए जा चुके हैं। इसमें से 736 करोड़ रुपये पहले ही बांटे जा चुके हैं।
उन्होंने कई सफल लाभार्थियों का ज़िक्र किया जिन्होंने इस स्कीम के तहत 13 करोड़ रुपये तक के लोन लिए हैं और बताया कि नागांव ज़िले में सबसे ज़्यादा 131 लाभार्थी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि असम अभी भी अपने मौजूदा आवंटन से लगभग 900 करोड़ रुपये का लाभ उठा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत सरकार ने पूरे देश में एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के तहत अतिरिक्त 1 लाख करोड़ रुपये मंज़ूर किए हैं और भरोसा जताया कि असम अगले चरण में 4,000 करोड़ रुपये का आवंटन हासिल करने की कोशिश करेगा, जो पहले लगभग 2,000 करोड़ रुपये था। असम में बाढ़ के खतरे को देखते हुए, सरमा ने पारंपरिक धान की खेती से हटकर बागवानी और ज़्यादा कीमत वाले कृषि उत्पादों को बढ़ावा देने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।
उन्होंने डेवलपमेंट ब्लॉक्स में चावल स्टोर करने की सुविधाओं की बढ़ती मांग और राज्य में सरसों के तेल की प्रोसेसिंग को बढ़ाने की बड़ी संभावनाओं की ओर इशारा किया। मुख्यमंत्री ने कार्बी आंगलोंग और धोलाई के अदरक और अनानास, असम लेमन, भूत जोलोकिया, लाल चावल, कोकराझार के मशरूम और अन्य स्थानीय कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग के ज़रिए वैल्यू एडिशन के मौकों पर भी ज़ोर दिया।
उन्होंने कहा कि पारंपरिक तरीकों से प्रोसेस की गई पारंपरिक ऑर्गेनिक चाय की बाज़ार में खास मांग है और बताया कि चाय की प्रोसेसिंग भी इस स्कीम के तहत एक योग्य गतिविधि है। जापान के अपने हालिया अनुभव को साझा करते हुए, सरमा ने होटलों में पर्यावरण के अनुकूल बांस के टूथब्रश के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल का ज़िक्र किया और कहा कि बांस का इस्तेमाल टूथपेस्ट समेत लगभग 180 उत्पाद बनाने में किया जा सकता है। उन्होंने नुमालीगढ़ में बांस के तेल के उत्पादन का ज़िक्र करते हुए इसे राज्य में वैल्यू-एडिशन (मूल्य-वर्धन) की उभरती क्षमता का एक उदाहरण बताया। इस बात पर खुशी ज़ाहिर करते हुए कि इस योजना के तहत 800 से ज़्यादा उद्यमी पहले ही आगे आ चुके हैं, मुख्यमंत्री ने असम के युवाओं से 'एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड' का फ़ायदा उठाने और आत्मनिर्भर असम बनाने में योगदान देने का आह्वान किया।