पटना। बिहार में शराबबंदी के बावजूद अवैध शराब की तस्करी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। राजधानी पटना में मद्य निषेध विभाग ने शराब तस्करी से जुड़े एक ठिकाने का खुलासा किया है। बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और हरियाणा से शराब मंगाकर पटना में खपाने का नेटवर्क संचालित किया जा रहा था। तस्करों ने शराब की खेप छिपाने और स्थानीय स्तर पर आपूर्ति करने के लिए किराये के एक कमरे को स्टोरेज पॉइंट बना रखा था। रविवार रात मद्य निषेध विभाग की टीम ने हवाई अड्डा थाना क्षेत्र के महुआबाग स्थित मीठाकुआं इलाके में छापेमारी कर इस ठिकाने का पता लगाया। इस कार्रवाई के बाद शराब की अवैध आपूर्ति से जुड़े नेटवर्क को लेकर जांच तेज होने की संभावना है।
जानकारी के अनुसार, शराब तस्करी से जुड़े लोग दूसरे राज्यों से शराब मंगाकर राजधानी पटना के विभिन्न इलाकों में इसकी आपूर्ति कर रहे थे। इसके लिए महुआबाग के मीठाकुआं इलाके में किराये पर लिया गया कमरा इस्तेमाल किया जा रहा था। कमरे को शराब रखने के अस्थायी ठिकाने के रूप में उपयोग किए जाने की बात सामने आई है। मद्य निषेध विभाग की कार्रवाई से यह स्पष्ट हुआ है कि शराबबंदी वाले राज्य में अवैध शराब पहुंचाने के लिए तस्कर अलग-अलग तरीकों का सहारा ले रहे हैं।
किराये के कमरे को बनाया शराब का स्टोरेज पॉइंट
मद्य निषेध विभाग की जांच में सामने आया कि शराब तस्करी के लिए किराये के कमरे का इस्तेमाल किया जा रहा था। बाहर से सामान्य आवासीय कमरा दिखाई देने वाले इस स्थान को शराब की खेप रखने के लिए उपयोग में लाया जा रहा था।
जानकारी के मुताबिक, दूसरे राज्यों से मंगाई जाने वाली शराब को यहां रखने के बाद पटना में खपाने की व्यवस्था की गई थी। हालांकि, इस ठिकाने से कितनी मात्रा में शराब बरामद हुई और कितने लोगों को पकड़ा गया, इसकी विस्तृत जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं है।किराये के कमरे का इस्तेमाल किए जाने से यह सवाल भी उठ रहा है कि इस स्थान को किस व्यक्ति ने किराये पर लिया था और मकान मालिक को वहां चल रही गतिविधियों की जानकारी थी या नहीं। इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
तीन राज्यों से पटना पहुंच रही थी शराब
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शराब तस्करी के इस नेटवर्क के तार उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और हरियाणा से जुड़े बताए जा रहे हैं। इन राज्यों से शराब मंगाकर बिहार की राजधानी पटना में उसकी अवैध बिक्री और आपूर्ति की जा रही थी।बिहार में शराबबंदी लागू होने के कारण शराब की अवैध आपूर्ति रोकने के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों और प्रमुख परिवहन मार्गों पर निगरानी की जाती है। इसके बावजूद दूसरे राज्यों से शराब की खेप पहुंचने के मामले सामने आते रहते हैं।
इस मामले में तीन राज्यों से शराब मंगाए जाने की जानकारी महत्वपूर्ण है। इससे आशंका जताई जा रही है कि अवैध कारोबार में एक से अधिक आपूर्तिकर्ता या परिवहन से जुड़े लोग शामिल हो सकते हैं। हालांकि, नेटवर्क के वास्तविक आकार और इसमें शामिल व्यक्तियों की संख्या का पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा।
रविवार रात मद्य निषेध विभाग की छापेमारी
रविवार की रात मद्य निषेध विभाग की टीम ने हवाई अड्डा थाना क्षेत्र के महुआबाग स्थित मीठाकुआं इलाके में छापेमारी की। इसी कार्रवाई के दौरान किराये के कमरे में संचालित शराब के कथित भंडारण ठिकाने का खुलासा हुआ।मद्य निषेध विभाग की यह कार्रवाई राजधानी में अवैध शराब की आपूर्ति रोकने के प्रयासों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विभाग के सामने अब यह पता लगाने की चुनौती होगी कि शराब की खेप किन माध्यमों से पटना तक पहुंचाई जा रही थी और स्थानीय स्तर पर इसकी आपूर्ति किस तरह की जा रही थी।इसके अलावा शराब के परिवहन, भंडारण और बिक्री से जुड़े लोगों की पहचान भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकती है।
शराबबंदी के बावजूद सक्रिय तस्करी नेटवर्क
बिहार में अप्रैल 2016 से पूर्ण शराबबंदी लागू है। राज्य में शराब के निर्माण, बिक्री, भंडारण और सेवन से संबंधित गतिविधियों पर बिहार मद्य निषेध एवं उत्पाद अधिनियम के तहत प्रतिबंध लागू हैं।शराबबंदी के बाद से पुलिस और मद्य निषेध विभाग की ओर से अवैध शराब के खिलाफ लगातार अभियान चलाए जाते रहे हैं। इसके बावजूद दूसरे राज्यों से शराब लाकर बिहार में बेचने के मामले समय-समय पर सामने आते हैं।पटना में किराये के कमरे को शराब के भंडारण केंद्र के रूप में इस्तेमाल किए जाने का मामला इसी चुनौती को सामने लाता है। इस तरह की गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए केवल शराब की बरामदगी ही नहीं, बल्कि आपूर्ति करने वाले और स्थानीय स्तर पर बिक्री से जुड़े पूरे नेटवर्क की पहचान करना भी जरूरी है।
स्थानीय आपूर्ति नेटवर्क की जांच महत्वपूर्ण
महुआबाग में सामने आए इस मामले में जांच एजेंसियों के लिए शराब के स्रोत से लेकर अंतिम खरीदार तक की जानकारी जुटाना महत्वपूर्ण होगा।यह पता लगाना जरूरी होगा कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और हरियाणा से शराब किसके माध्यम से मंगाई जा रही थी। इसके अलावा पटना में शराब की आपूर्ति किन इलाकों में की जाती थी और इस कारोबार से जुड़े आर्थिक लेनदेन का स्वरूप क्या था, इसकी भी जांच की जा सकती है।यदि इस मामले में संगठित अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क के साक्ष्य मिलते हैं, तो अन्य राज्यों की संबंधित एजेंसियों से समन्वय कर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
मकान किराये पर देने की व्यवस्था पर भी सवाल
शराब तस्करी के लिए किराये के कमरे का इस्तेमाल सामने आने के बाद आवासीय परिसरों में संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी का विषय भी चर्चा में आ गया है।किराये के मकानों और कमरों का उपयोग सामान्यतः आवासीय जरूरतों के लिए किया जाता है। लेकिन किसी परिसर में अवैध गतिविधि संचालित होने की स्थिति में किरायेदार की पहचान और परिसर के उपयोग से जुड़ी जानकारी जांच के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।हालांकि, केवल किसी कमरे में अवैध शराब का भंडारण पाए जाने से मकान मालिक की संलिप्तता साबित नहीं होती। इसके लिए उसकी जानकारी, भूमिका और अन्य साक्ष्यों की जांच आवश्यक होगी।
शराब तस्करों के खिलाफ कार्रवाई पर नजर
पटना के महुआबाग स्थित मीठाकुआं इलाके में मद्य निषेध विभाग की छापेमारी ने राजधानी में शराब की अवैध आपूर्ति से जुड़े एक ठिकाने को उजागर किया है।तीन राज्यों से शराब मंगाकर पटना में खपाने की जानकारी सामने आने के बाद इस मामले की गंभीरता बढ़ गई है। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि इस नेटवर्क से कितने लोग जुड़े थे और अवैध शराब की आपूर्ति कितने समय से की जा रही थी।फिलहाल रविवार रात की कार्रवाई के बाद मामले में आगे की जांच और संभावित कानूनी कार्रवाई पर नजर बनी हुई है। इस घटना ने एक बार फिर बिहार में शराबबंदी को प्रभावी तरीके से लागू करने और अंतरराज्यीय शराब तस्करी पर नियंत्रण की चुनौती को सामने ला दिया है।