बिहार विधानसभा सत्र: तेजस्वी और राबड़ी देवी की अनुपस्थिति बनी चर्चा का केंद्र
बिहार: विधानमंडल का पांच दिवसीय मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो गया। सत्र के पहले दिन सदन की कार्यवाही से ज्यादा चर्चा विपक्ष के प्रमुख नेताओं की गैरमौजूदगी को लेकर रही। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी पहले दिन सदन में मौजूद नहीं रहे। दोनों नेताओं की खाली कुर्सियां राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गईं।
मानसून सत्र के पहले दिन सरकार ने अपने विधायी और प्रशासनिक एजेंडे को आगे बढ़ाया। हालांकि विपक्ष की ओर से जिस तरह की आक्रामक रणनीति की उम्मीद की जा रही थी, वह नजर नहीं आई। विपक्ष के प्रमुख चेहरों की अनुपस्थिति को लेकर सत्ता पक्ष ने सवाल खड़े किए और इसे विपक्ष की गंभीरता से जोड़कर देखा।
सदन की कार्यवाही के दौरान एनडीए नेताओं ने तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी की गैरमौजूदगी पर निशाना साधा। सत्ता पक्ष के नेताओं का कहना था कि विपक्ष को जनता से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए सदन में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए, लेकिन पहले ही दिन विपक्ष के शीर्ष नेता मौजूद नहीं रहे।
विधान पार्षद अनामिका सिंह ने तेजस्वी यादव पर हमला बोलते हुए कहा कि वे सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहते हैं, लेकिन जब सदन में जनता की आवाज उठाने का मौका आता है तो उनकी उपस्थिति नहीं दिखती। उन्होंने विपक्ष की भूमिका और जिम्मेदारी पर सवाल खड़े किए।
हालांकि विपक्ष के अन्य सदस्यों ने सदन में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई और कई जनसरोकार से जुड़े मुद्दों को उठाने की कोशिश की। लेकिन नेता प्रतिपक्ष की अनुपस्थिति के कारण सदन में विपक्ष का तेवर पहले दिन कमजोर दिखाई दिया।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधानसभा सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। विपक्ष सरकार की नीतियों, योजनाओं और फैसलों पर सवाल उठाकर जनता से जुड़े मुद्दों को सामने रखता है। ऐसे में पहले दिन दोनों प्रमुख विपक्षी नेताओं का सदन से दूर रहना चर्चा का विषय बनना स्वाभाविक है।
बिहार विधानमंडल का यह मानसून सत्र कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आगामी दिनों में विपक्ष कानून व्यवस्था, विकास योजनाओं, रोजगार, शिक्षा और अन्य मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। ऐसे में अब सभी की नजर इस बात पर होगी कि तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी कब सदन की कार्यवाही में शामिल होते हैं और विपक्ष किस रणनीति के साथ सरकार का सामना करता है।
सत्ता पक्ष जहां विपक्ष की गैरमौजूदगी को मुद्दा बना रहा है, वहीं विपक्ष की ओर से आगे की कार्यवाही में सरकार को घेरने की तैयारी की जा रही है। मानसून सत्र के आने वाले दिनों में सदन का माहौल और ज्यादा राजनीतिक होने की संभावना है।
पहले दिन की कार्यवाही भले ही शांत रही हो, लेकिन आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति से जुड़े कई अहम मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि विपक्ष अपनी रणनीति के तहत किन मुद्दों को प्रमुखता से उठाता है और सरकार उनका किस तरह जवाब देती है।