पटना। बिहार में सड़क परिवहन और आधुनिक बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ी परियोजना पर काम आगे बढ़ रहा है। राज्य का पहला ग्रीनफील्ड पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे (NE-9) उत्तर बिहार की तस्वीर बदलने वाला साबित हो सकता है। करीब 245 किलोमीटर लंबी इस परियोजना पर लगभग 31,987 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। एक्सप्रेस-वे के निर्माण से राजधानी पटना और पूर्णिया के बीच यात्रा का समय घटकर लगभग तीन घंटे रह जाने की उम्मीद है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 20 नवंबर 2026 को प्रस्तावित बिहार दौरे को लेकर भी तैयारियां चल रही हैं। चर्चा है कि इस दौरान कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं का शुभारंभ किया जा सकता है। हालांकि, पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे के निर्माण कार्य का शुभारंभ प्रधानमंत्री इसी दिन करेंगे, इसकी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से दौरे का अंतिम कार्यक्रम भी जारी नहीं किया गया है।
245 किलोमीटर लंबा होगा एक्सप्रेस-वे
पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे बिहार की सबसे महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में शामिल है। इस परियोजना का उद्देश्य राजधानी पटना से कोसी और सीमांचल क्षेत्र तक तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक सड़क संपर्क उपलब्ध कराना है।प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे की लंबाई लगभग 244.96 किलोमीटर निर्धारित की गई है। इसे राष्ट्रीय एक्सप्रेस-वे संख्या 9 यानी NE-9 का दर्जा दिया गया है।परियोजना के अलग-अलग चरणों में चार से छह लेन की संरचना से संबंधित विवरण सामने आए हैं। अंतिम निर्माण व्यवस्था स्वीकृत विस्तृत परियोजना रिपोर्ट और संबंधित सरकारी मंजूरियों के अनुसार तय होगी।एक्सप्रेस-वे पूरी तरह नई सड़क के रूप में विकसित किया जाएगा। इसका अर्थ है कि मौजूदा सड़क को केवल चौड़ा करने के बजाय नए मार्ग पर आधुनिक सुविधाओं वाला राजमार्ग तैयार होगा।
पटना से पूर्णिया का सफर सिर्फ तीन घंटे में
वर्तमान में पटना से पूर्णिया तक सड़क मार्ग से यात्रा करने में यातायात और रास्ते की स्थिति के अनुसार लगभग छह से सात घंटे लग सकते हैं।नए एक्सप्रेस-वे का निर्माण पूरा होने के बाद यह सफर करीब तीन घंटे में पूरा होने की उम्मीद है।इससे यात्रियों के समय की बचत होगी और लंबी दूरी की यात्रा अधिक सुविधाजनक बन सकेगी। साथ ही सामान ढोने वाले वाहनों को भी तेज परिवहन सुविधा मिलेगी।कम यात्रा समय का फायदा व्यापारियों, विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों और चिकित्सा सुविधाओं के लिए बड़े शहरों की यात्रा करने वाले लोगों को हो सकता है।
उत्तर बिहार के कई जिलों को मिलेगा लाभ
पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे का लाभ केवल दो शहरों तक सीमित नहीं रहेगा। इसके प्रभाव क्षेत्र में वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा, सहरसा, मधेपुरा और पूर्णिया जैसे जिले शामिल हैं।प्रस्तावित मार्ग वैशाली क्षेत्र से शुरू होकर उत्तर बिहार के विभिन्न हिस्सों से गुजरते हुए पूर्णिया तक पहुंचेगा।इस परियोजना से कोसी और सीमांचल क्षेत्र के लोगों को राजधानी तथा दूसरे प्रमुख आर्थिक केंद्रों तक बेहतर पहुंच मिलने की उम्मीद है।एक्सप्रेस-वे से जुड़ने वाले संपर्क मार्ग आसपास के कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
20 नदियों पर बनाए जाएंगे पुल
इस परियोजना की एक बड़ी विशेषता बड़ी संख्या में पुलों और अन्य सड़क संरचनाओं का निर्माण है।उपलब्ध परियोजना विवरणों के अनुसार, प्रस्तावित मार्ग लगभग 29 प्रखंडों से होकर गुजरेगा। रास्ते में करीब 20 नदियों पर पुलों के निर्माण की योजना है।इसके अतिरिक्त रेलवे ओवरब्रिज, इंटरचेंज और अंडरपास जैसी सुविधाएं भी विकसित की जानी हैं।इन संरचनाओं के निर्माण से यातायात को बिना अनावश्यक रुकावट के आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।हालांकि, पुलों और अन्य संरचनाओं की अंतिम संख्या निर्माण से पहले स्वीकृत डिजाइन के आधार पर निर्धारित होगी।
किसानों और व्यापारियों को होगा बड़ा फायदा
पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे से उत्तर बिहार की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलने की संभावना है।कोसी और सीमांचल क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग खेती और उससे जुड़े व्यवसायों पर निर्भर हैं। बेहतर सड़क संपर्क मिलने से कृषि उपज को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में कम समय लग सकता है।खासकर मक्का, धान, सब्जियों और अन्य कृषि उत्पादों की ढुलाई के लिए तेज परिवहन सुविधा उपयोगी साबित हो सकती है।इसके अलावा स्थानीय व्यापार, भंडारण केंद्र, परिवहन सेवाओं और छोटे उद्योगों के विस्तार की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।एक्सप्रेस-वे के आसपास औद्योगिक गतिविधियां विकसित होने पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
जमीन अधिग्रहण और मंजूरी की प्रक्रिया महत्वपूर्ण
इतनी बड़ी सड़क परियोजना को जमीन पर उतारने के लिए भूमि अधिग्रहण, रेलवे से संबंधित मंजूरियों और अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं को पूरा करना जरूरी है।16 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे के लिए कई क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण की शुरुआती प्रक्रिया चल रही थी।परियोजना से जुड़े नौ रेलवे ओवरब्रिज के डिजाइन की मंजूरी भी संबंधित रेलवे अधिकारियों से लंबित बताई गई थी।इसके अलावा परियोजना की अंतिम केंद्रीय मंजूरी और निर्माण शुरू करने की तैयारियां भी महत्वपूर्ण चरण में थीं।
पर्यटन को भी मिलेगी नई रफ्तार
बिहार का सीमांचल और कोसी क्षेत्र प्राकृतिक, धार्मिक तथा सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।एक्सप्रेस-वे तैयार होने के बाद इन क्षेत्रों तक यात्रा आसान हो सकती है। इससे पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।पूर्णिया और आसपास के क्षेत्रों में आने वाले पर्यटकों के साथ स्थानीय कारोबारियों को भी बेहतर सड़क सुविधाओं का लाभ मिल सकता है।इसके अलावा आपातकालीन सेवाओं, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच बेहतर बनाने में भी यह सड़क मददगार साबित हो सकती है।
20 नवंबर के कार्यक्रम पर सबकी नजर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 20 नवंबर को संभावित बिहार दौरे को लेकर राज्य में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर गतिविधियां तेज हैं।इस दौरान सड़क, बिजली, शिक्षा और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को लेकर महत्वपूर्ण घोषणाएं होने की संभावना जताई जा रही है।हालांकि, पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे के शिलान्यास की तारीख और निर्माण की आधिकारिक शुरुआत को लेकर अंतिम घोषणा का इंतजार है।
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने अक्टूबर की शुरुआत में बताया था कि इस परियोजना को केंद्रीय कैबिनेट से जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद है। उन्होंने निर्माण पर लगभग 32 हजार करोड़ रुपये खर्च होने की बात कही थी।