पटना। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार को पर्यावरण संरक्षण और जनजागरूकता का संदेश लेकर निकले 'प्रकृति ही प्रभु है' साइकिल अभियान दल से मुलाकात की और उनका स्वागत किया। यह यात्रा नेपाल के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल जनकपुर धाम से प्रारंभ होकर भारत के विभिन्न राज्यों से गुजरते हुए उत्तराखंड के देहरादून की ओर बढ़ रही है। अभियान का उद्देश्य जल संरक्षण, पर्यावरण सुधार, नदियों के पुनरुद्धार और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना है।मुख्यमंत्री ने पटना स्थित लोक सेवक आवास के 'नेक संवाद' में अभियान दल के सदस्यों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए यात्रा की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं।
पद्म भूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी के नेतृत्व में निकली यात्रा
इस साइकिल अभियान का नेतृत्व प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और पद्म भूषण से सम्मानित डॉ. अनिल प्रकाश जोशी कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में अभियान दल विभिन्न राज्यों में पहुंचकर लोगों को प्रकृति और पर्यावरण के महत्व के बारे में जागरूक कर रहा है।मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान दल के सदस्यों ने बिहार सरकार द्वारा पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि बिहार पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अलग तरीके से काम कर रहा है। राज्य सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने जल संरक्षण और नदियों के पुनरुद्धार पर दिया जोर
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अभियान दल का स्वागत करते हुए कहा कि जल संरक्षण, पर्यावरण सुधार और नदियों को पुनर्जीवित करने का संदेश समाज के हर वर्ग तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने डॉ. अनिल प्रकाश जोशी और अभियान के सभी सदस्यों को इस महत्वपूर्ण पहल के लिए शुभकामनाएं दीं।मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें समाज के प्रत्येक नागरिक की सहभागिता आवश्यक है। प्राकृतिक संसाधनों का उचित उपयोग और उनका संरक्षण भविष्य की पीढ़ियों के लिए बेहद जरूरी है।
बिहार में हरित आवरण बढ़कर 15 प्रतिशत हुआ
मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने बिहार में पर्यावरण संरक्षण के लिए किए गए कार्यों की जानकारी भी साझा की। उन्होंने बताया कि बिहार और झारखंड के विभाजन के बाद राज्य का हरित आवरण करीब छह प्रतिशत था, जो अब बढ़कर 15 प्रतिशत हो गया है।उन्होंने इस उपलब्धि का उल्लेख करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और दिवंगत सुशील कुमार मोदी के कार्यकाल में जल संरक्षण तथा वृक्षारोपण के लिए किए गए प्रयासों को भी याद किया।मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में सिंचित भूमि का क्षेत्रफल पहले 21 लाख हेक्टेयर था, जो बढ़कर 44 लाख हेक्टेयर हो गया है। उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं के साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने पर भी जोर दिया जा रहा है।
नदियों के जल प्रबंधन के लिए चल रही योजनाएं
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार में नदियों के जल प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए कई योजनाओं पर काम किया जा रहा है। उन्होंने गंडक, कोसी और गंगा नदियों से जुड़े जल प्रबंधन कार्यों का उल्लेख किया।इसके अलावा सोन नदी के पानी के उपयोग और फल्गु नदी से उसे जोड़ने की योजना पर भी चर्चा की। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में जल संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से प्रयास किए जा रहे हैं।
पर्यावरण संतुलन के साथ विकास सरकार की प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में विकास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है, लेकिन इस प्रक्रिया में पर्यावरण संरक्षण का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है। उन्होंने हरित ऊर्जा और पर्यावरण पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।उन्होंने कहा कि सरकार विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने अभियान दल के सदस्यों से बिहार के विकास और पर्यावरण संरक्षण को लेकर सुझाव भी आमंत्रित किए।मुलाकात के अंत में मुख्यमंत्री ने डॉ. अनिल प्रकाश जोशी और उनके साथियों को सुरक्षित एवं सफल यात्रा की शुभकामनाएं दीं। इस अभियान के माध्यम से लोगों को प्रकृति के संरक्षण, जल बचाने और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश दिया जा रहा है।
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