रक्सौल। बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के रक्सौल से मुंबई के लोकमान्य तिलक टर्मिनस तक नई नियमित सुपरफास्ट ट्रेन चलाने की मांग जोर पकड़ने लगी है। स्थानीय यात्रियों, व्यापारियों, प्रवासी मजदूरों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने रेलवे प्रशासन से इस दिशा में आवश्यक कदम उठाने की अपील की है। लोगों का कहना है कि रक्सौल और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग रोजगार, व्यापार, शिक्षा और अन्य कार्यों के लिए मुंबई तथा महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों की यात्रा करते हैं। ऐसे में प्रस्तावित मार्ग से नियमित सुपरफास्ट ट्रेन का संचालन शुरू होने पर यात्रियों को अतिरिक्त सुविधा मिलेगी।

स्थानीय लोगों ने रेलवे से मांग की है कि रक्सौल से बैरगनिया, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, हाजीपुर और पाटलिपुत्र होते हुए मुंबई के लिए नियमित ट्रेन सेवा उपलब्ध कराई जाए। इस मार्ग से बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के कई महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन जुड़ सकेंगे।

स्थानीय लोगों ने उठाई नियमित ट्रेन की मांग

रक्सौल के शिक्षक विजय कुमार, व्यवसायी सुशील कुमार, फिल्म जगत से जुड़े निर्देशक प्रभात भूषण और विजय राय सहित कई स्थानीय लोगों ने इस मांग को प्रमुखता से उठाया है।

इन लोगों का कहना है कि क्षेत्र से बड़ी संख्या में लोग मुंबई जाते हैं, लेकिन यात्रियों की जरूरतों को देखते हुए प्रस्तावित मार्ग पर नियमित सुपरफास्ट सेवा उपलब्ध कराना आवश्यक है।

उन्होंने रेलवे प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से इस दिशा में पहल करने की अपील की है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नई सेवा से रक्सौल के साथ सीतामढ़ी, बैरगनिया और आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को भी लाभ मिलेगा।

इन प्रमुख स्टेशनों से होकर ट्रेन चलाने का प्रस्ताव

स्थानीय लोगों ने नई सुपरफास्ट ट्रेन के लिए विस्तृत मार्ग भी सुझाया है।

प्रस्ताव के अनुसार, ट्रेन रक्सौल जंक्शन से रवाना होकर बैरगनिया, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, हाजीपुर, पाटलिपुत्र और दानापुर पहुंचे।

इसके बाद आरा, बक्सर, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन, प्रयागराज, सतना, कटनी, जबलपुर, इटारसी, खंडवा, भुसावल, नासिक रोड, कल्याण और ठाणे होते हुए मुंबई के लोकमान्य तिलक टर्मिनस तक चले।

लोगों का कहना है कि इस मार्ग से कई प्रमुख शहरों को सीधी रेल सुविधा मिल सकेगी।

हालांकि, यह स्थानीय नागरिकों का प्रस्ताव है। नई ट्रेन, उसके ठहराव और समयसारिणी को लेकर रेलवे की कोई नई आधिकारिक स्वीकृति सामने नहीं आई है।

मुंबई में बड़ी संख्या में रहते हैं बिहार के लोग

मुंबई और महाराष्ट्र के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में बिहार के बड़ी संख्या में लोग रोजगार और व्यवसाय से जुड़े हुए हैं।

रक्सौल, सीतामढ़ी, पूर्वी चंपारण और आसपास के जिलों से भी लोग काम की तलाश में मुंबई जाते हैं।

इनमें मजदूर, छोटे व्यापारी, निजी कंपनियों के कर्मचारी और अन्य क्षेत्रों में कार्यरत लोग शामिल हैं।

त्योहारों, शादी-विवाह और पारिवारिक कार्यक्रमों के दौरान इन यात्रियों की घर आने-जाने की जरूरत बढ़ जाती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अतिरिक्त नियमित ट्रेन सेवा मिलने से यात्रा की योजना बनाना आसान हो सकता है।

त्योहारों के दौरान बढ़ जाती है यात्रियों की भीड़

दीपावली, छठ पूजा, होली और अन्य प्रमुख त्योहारों के दौरान बिहार आने-जाने वाली ट्रेनों में यात्रियों की संख्या बढ़ जाती है।

विशेष रूप से मुंबई से बिहार लौटने वाले यात्रियों के लिए कई बार आरक्षित टिकट मिलना मुश्किल हो जाता है।

ऐसे समय में अतिरिक्त रेल सेवाओं की मांग बढ़ जाती है।

रक्सौल के लोगों का मानना है कि प्रस्तावित नियमित ट्रेन से त्योहारों के दौरान भी यात्रियों को अतिरिक्त विकल्प मिल सकेगा।

हालांकि, नई ट्रेन से कितने यात्रियों को लाभ होगा, इसका आकलन रेलवे की मांग और परिचालन क्षमता संबंधी समीक्षा के बाद ही किया जा सकेगा।

रक्सौल-मुंबई के बीच पहले से भी हैं रेल सेवाएं

रक्सौल से मुंबई के लोकमान्य तिलक टर्मिनस तक पहले से कर्मभूमि एक्सप्रेस और अन्य रेल सेवाएं उपलब्ध हैं।

इसके अतिरिक्त रेलवे ने यात्रियों की मांग को देखते हुए रक्सौल-लोकमान्य तिलक टर्मिनस विशेष ट्रेन का संचालन भी किया है।

ट्रेन संख्या 05557 के लिए सितंबर से नवंबर 2026 तक साप्ताहिक परिचालन का कार्यक्रम प्रकाशित किया गया है। इसी प्रकार वापसी दिशा में ट्रेन संख्या 05558 के संचालन की भी जानकारी उपलब्ध है।

इसलिए स्थानीय लोगों की मांग को रक्सौल और मुंबई के बीच पहली रेल सेवा शुरू करने की मांग के बजाय प्रस्तावित मार्ग से अतिरिक्त नियमित सुपरफास्ट ट्रेन चलाने की मांग के रूप में देखा जाना चाहिए।

सीतामढ़ी और बैरगनिया के यात्रियों को लाभ

प्रस्तावित ट्रेन का एक महत्वपूर्ण पहलू सीतामढ़ी और बैरगनिया को मुंबई के साथ बेहतर रेल संपर्क उपलब्ध कराना है।

इन क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग रोजगार और अन्य कार्यों के लिए महानगरों की यात्रा करते हैं।

यदि प्रस्तावित मार्ग पर अतिरिक्त नियमित सुपरफास्ट ट्रेन चलती है, तो यात्रियों को अधिक रेल विकल्प उपलब्ध हो सकते हैं।

इसके साथ ही मुजफ्फरपुर, हाजीपुर और पाटलिपुत्र जैसे प्रमुख स्टेशनों के यात्रियों को भी सुविधा मिल सकती है।

व्यापारियों ने भी किया प्रस्ताव का समर्थन

रक्सौल भारत-नेपाल सीमा पर स्थित एक महत्वपूर्ण व्यापारिक शहर है।

यहां से व्यापारिक गतिविधियों के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में लोगों का आवागमन होता है।

स्थानीय व्यवसायियों का कहना है कि मुंबई जैसे बड़े व्यापारिक केंद्र तक अतिरिक्त नियमित रेल सेवा उपलब्ध होने से व्यापारिक यात्राओं में सुविधा मिलेगी।

इससे छोटे कारोबारियों और व्यवसाय से जुड़े कर्मचारियों को भी लाभ मिल सकता है।

छात्रों और नौकरीपेशा लोगों को मिलेगी सुविधा

रक्सौल तथा आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में विद्यार्थी उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अन्य शहरों में जाते हैं।

इसी प्रकार नौकरीपेशा लोगों को भी नियमित अंतराल पर लंबी दूरी की यात्रा करनी पड़ती है।

अतिरिक्त सुपरफास्ट ट्रेन शुरू होने पर यात्रियों को यात्रा के लिए अधिक विकल्प उपलब्ध होंगे।

हालांकि, प्रस्तावित ट्रेन का किराया, यात्रा अवधि और परिचालन दिवस रेलवे की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होंगे।

रेलवे को करना होगा तकनीकी आकलन

नई ट्रेन शुरू करने के लिए रेलवे को कई महत्वपूर्ण पहलुओं की समीक्षा करनी होती है।

इनमें यात्रियों की मांग, उपलब्ध रेल मार्ग, ट्रैक की क्षमता, स्टेशन पर प्लेटफॉर्म की उपलब्धता और परिचालन समय शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त ट्रेन के डिब्बों की उपलब्धता और रखरखाव की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होती है।

स्थानीय लोगों द्वारा सुझाए गए सभी स्टेशनों पर ठहराव देना संभव होगा या नहीं, इसका निर्णय भी रेलवे प्रशासन ही करेगा।

प्रस्तावित मार्ग में बदलाव की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

जनप्रतिनिधियों से पहल करने की अपील

स्थानीय नागरिकों ने सांसदों और अन्य जनप्रतिनिधियों से इस मांग को रेलवे मंत्रालय के समक्ष उठाने की अपील की है।

उनका कहना है कि रक्सौल सीमावर्ती क्षेत्र होने के साथ महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र भी है।

ऐसे में यहां लंबी दूरी की रेल सुविधाओं का विस्तार होना चाहिए।

लोग चाहते हैं कि रेलवे यात्रियों की संख्या और प्रस्तावित मार्ग की उपयोगिता का अध्ययन करके नई नियमित सुपरफास्ट सेवा पर विचार करे।

आधिकारिक घोषणा का इंतजार

रक्सौल से मुंबई तक अतिरिक्त नियमित सुपरफास्ट ट्रेन चलाने की मांग ने स्थानीय स्तर पर जोर पकड़ा है।

शिक्षक, व्यापारी, फिल्म जगत से जुड़े लोग और अन्य नागरिक इस प्रस्ताव का समर्थन कर रहे हैं।

प्रस्तावित सेवा शुरू होने पर बिहार सहित चार राज्यों के विभिन्न शहरों के यात्रियों को अतिरिक्त रेल विकल्प मिल सकता है।

फिलहाल रेलवे की ओर से नई ट्रेन के संचालन, समयसारिणी या शुरुआत की तारीख की घोषणा नहीं की गई है।

अब यात्रियों की नजर रेलवे प्रशासन और संबंधित जनप्रतिनिधियों की अगली पहल पर है।

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