मुजफ्फरपुर। ठगी की शिकार हुईं जीविका दीदियों की समस्याओं का अब तक समाधान नहीं होने से उनमें नाराजगी बढ़ती जा रही है। अपनी मांगों को लेकर जीविका दीदियों ने पिछले दिनों जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर समस्या के समाधान के लिए 10 अगस्त तक का समय दिया था। उनका कहना है कि तय समय बीत जाने के बावजूद प्रशासन की ओर से उनकी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद अब उन्होंने मंगलवार से समाहरणालय परिसर में धरना-प्रदर्शन शुरू करने का निर्णय लिया है।
जीविका दीदियों का आरोप है कि उन्हें मशरूम क्लस्टर शुरू करने और रोजगार उपलब्ध कराने के नाम पर लोन की राशि दी गई थी, लेकिन योजना के मुताबिक काम आगे नहीं बढ़ सका। इसके चलते वे आर्थिक संकट में फंस गई हैं। अब उन पर लोन चुकाने का दबाव है, जबकि उनके मुताबिक लोन की निर्धारित पांच साल की अवधि में तीन साल पहले ही बीत चुके हैं।
जिलाधिकारी को सौंपा था ज्ञापन
जीविका दीदियों ने अपनी समस्याओं को लेकर पिछले दिनों जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा था। ज्ञापन के माध्यम से उन्होंने प्रशासन के सामने अपनी मांगें रखीं और 10 अगस्त तक समाधान किए जाने की मांग की थी।
उनकी प्रमुख मांगों में मशरूम क्लस्टर की शुरुआत करना और उनके नाम से दिए गए लोन की राशि को माफ करना शामिल है। उनका कहना है कि यदि मशरूम क्लस्टर शुरू हो जाता तो उन्हें रोजगार का साधन मिलता और लोन की राशि चुकाने में भी मदद मिल सकती थी।
लेकिन निर्धारित समय सीमा बीतने के बाद भी कोई ठोस समाधान नहीं निकलने से जीविका दीदियों ने आंदोलन का रास्ता अपनाने का फैसला किया है।
मंगलवार से समाहरणालय में धरना
बोचहां की रहने वाली गीता देवी ने बताया कि अब जीविका दीदियां मंगलवार से समाहरणालय में धरना-प्रदर्शन करेंगी। उनका कहना है कि कई बार अधिकारियों के सामने अपनी समस्या रखी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
गीता देवी के अनुसार, जीविका दीदियों को उम्मीद थी कि जिलाधिकारी को ज्ञापन देने के बाद उनकी समस्या का समाधान किया जाएगा। इसके लिए प्रशासन को 10 अगस्त तक का समय भी दिया गया था। लेकिन समय सीमा खत्म होने के बावजूद जब कोई निर्णय नहीं हुआ तो अब धरना देने का फैसला लिया गया है।
लोन चुकाने का समय हो रहा खत्म
जीविका दीदियों की सबसे बड़ी चिंता उनके नाम पर लिए गए लोन को लेकर है। उनका कहना है कि लोन चुकाने के लिए कुल पांच साल का समय निर्धारित किया गया था। इस अवधि में करीब तीन साल पहले ही गुजर चुके हैं। ऐसे में उनके पास लोन चुकाने के लिए केवल दो साल का समय बचा है।
दीदियों का कहना है कि जब मशरूम क्लस्टर शुरू ही नहीं हुआ और उससे उन्हें अपेक्षित रोजगार या आमदनी नहीं मिली, तो लोन की किस्त चुकाना उनके लिए मुश्किल हो रहा है।
उनकी मांग है कि उनके नाम पर जारी की गई लोन राशि को लेकर उन्हें नो ड्यूज प्रमाणपत्र दिया जाए। इससे वे भविष्य में लोन की देनदारी से मुक्त हो सकेंगी और उनके सामने आर्थिक संकट और गहरा नहीं होगा।
मशरूम क्लस्टर शुरू करने की मांग
जीविका दीदियों की दूसरी प्रमुख मांग मशरूम क्लस्टर शुरू करने की है। उनका कहना है कि जिस उद्देश्य से उन्हें योजना से जोड़ा गया था, उस उद्देश्य को जमीन पर लागू किया जाना चाहिए।
मशरूम उत्पादन को ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय का अच्छा साधन माना जाता है। जीविका दीदियों को उम्मीद थी कि क्लस्टर के माध्यम से वे उत्पादन शुरू करेंगी और इससे होने वाली आय से परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर होगी।
लेकिन क्लस्टर की शुरुआत नहीं होने के कारण योजना का लाभ उन्हें नहीं मिल सका। अब वे प्रशासन से मांग कर रही हैं कि मशरूम क्लस्टर को जल्द शुरू किया जाए, ताकि महिलाओं को रोजगार मिल सके और उनकी आर्थिक स्थिति सुधर सके।
ठगी के बाद बढ़ी आर्थिक परेशानी
जीविका दीदियों का कहना है कि वे पहले ही ठगी के कारण परेशान हैं। योजना और लोन से संबंधित मामले में उन्हें आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा। इसके बाद अब लोन की देनदारी ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी है।
उनका कहना है कि यदि प्रशासन उनकी समस्या का समाधान नहीं करता है तो कई महिलाएं कर्ज के बोझ में दब सकती हैं। इसी वजह से वे लोन की राशि माफ करने और नो ड्यूज प्रमाणपत्र जारी करने की मांग कर रही हैं।
प्रशासन से समाधान की उम्मीद
धरना-प्रदर्शन के निर्णय के बावजूद जीविका दीदियों को उम्मीद है कि प्रशासन उनकी समस्या को गंभीरता से लेगा और कोई सकारात्मक समाधान निकालेगा। उनका कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर अधिकारियों से संपर्क कर रही हैं।
उनकी मांग है कि पूरे मामले की जांच कराई जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि लोन की राशि किस उद्देश्य से दी गई थी और मशरूम क्लस्टर की योजना क्यों शुरू नहीं हो सकी। साथ ही, जिन महिलाओं के नाम पर लोन जारी हुआ है, उनके हित में उचित निर्णय लिया जाए।
आंदोलन से प्रशासन पर बढ़ेगा दबाव
मंगलवार से प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन के कारण प्रशासन पर समस्या के समाधान का दबाव बढ़ सकता है। जीविका दीदियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं लिया जाता, तब तक वे अपना आंदोलन जारी रखेंगी।
फिलहाल उनकी प्रमुख मांग यही है कि उनके नाम पर जारी लोन का नो ड्यूज दिया जाए, लोन की राशि माफ की जाए और मशरूम क्लस्टर को शुरू कराया जाए। पांच साल की लोन अवधि में तीन साल बीत जाने के बाद महिलाओं का कहना है कि अब समय तेजी से निकल रहा है। ऐसे में प्रशासन की ओर से जल्द निर्णय लेना जरूरी है, ताकि वे और अधिक आर्थिक संकट में न फंसें।