पटना। आईजीआईएमएस के पास स्थित एक निजी नर्सिंग होम में सिजेरियन ऑपरेशन से बेटे को जन्म देने के कुछ घंटे बाद प्रखंड कृषि पदाधिकारी राजलक्ष्मी की मौत हो गई। इस घटना के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है। वहीं, मृतका के स्वजन ने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि रात में राजलक्ष्मी की तबीयत बिगड़ गई थी और उनकी पल्स रेट 162 तक पहुंच गई थी, इसके बावजूद डॉक्टर करीब डेढ़ घंटे बाद पहुंचे। स्वजन के अनुसार, डॉक्टर के पहुंचने तक राजलक्ष्मी की मौत हो चुकी थी।
परिजनों ने इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाते हुए इलाज के दौरान समय पर चिकित्सकीय सहायता नहीं मिलने का आरोप लगाया है। हालांकि, मामले में लापरवाही की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर घटना ने प्रसव के बाद मरीजों की निगरानी और आपात स्थिति में तत्काल उपचार की व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
12 अक्टूबर को नर्सिंग होम में कराया गया था भर्ती
स्वजन के अनुसार, राजलक्ष्मी को 12 अक्टूबर को पूनम सर्जिकल एवं मैटरनिटी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। यहां सिजेरियन ऑपरेशन के जरिए उन्होंने बेटे को जन्म दिया। परिवार के लिए यह खुशी का अवसर था, लेकिन बच्चे के जन्म के कुछ ही घंटे बाद राजलक्ष्मी की मौत की खबर से खुशियां मातम में बदल गईं।
परिवार के मुताबिक, प्रसव के बाद राजलक्ष्मी की तबीयत बिगड़ने लगी थी। इस दौरान उनकी पल्स रेट 162 तक पहुंच गई। परिजनों का आरोप है कि स्थिति गंभीर होने के बावजूद डॉक्टर तत्काल उपचार के लिए नहीं पहुंचे। पिता केके लाल ने बताया कि डॉक्टर के आने में करीब डेढ़ घंटे की देरी हुई। उनके अनुसार, जब तक डॉक्टर पहुंचे, तब तक राजलक्ष्मी की मौत हो चुकी थी।
पिता ने इलाज में देरी का लगाया आरोप
राजलक्ष्मी के पिता केके लाल ने आरोप लगाया कि बेटी की तबीयत बिगड़ने के बाद समय पर डॉक्टर की मौजूदगी जरूरी थी। उनका कहना है कि पल्स रेट काफी बढ़ने के बावजूद तत्काल चिकित्सकीय सहायता नहीं मिली। परिवार का आरोप है कि यदि समय पर उपचार उपलब्ध कराया जाता, तो स्थिति को संभालने का प्रयास किया जा सकता था।
हालांकि, किसी मरीज की मौत के पीछे वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए चिकित्सकीय रिकॉर्ड, उपचार के दौरान की गई निगरानी, डॉक्टरों की प्रतिक्रिया और अन्य जरूरी तथ्यों की जांच करना आवश्यक होता है। केवल परिजनों के आरोपों के आधार पर चिकित्सकीय लापरवाही को अंतिम रूप से साबित नहीं माना जा सकता।
इस मामले में अस्पताल की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या जांच के निष्कर्ष उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में घटना से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण होगी।
प्रसव के बाद मरीज की निगरानी क्यों जरूरी
सिजेरियन ऑपरेशन के बाद मां की सेहत पर लगातार नजर रखना बेहद जरूरी होता है। प्रसव के बाद रक्तचाप, नाड़ी की गति, सांस लेने की स्थिति, रक्तस्राव और अन्य महत्वपूर्ण संकेतों की निगरानी की जाती है। यदि मरीज की स्थिति में अचानक बदलाव आता है, तो डॉक्टरों को तुरंत उसकी जांच कर आवश्यक उपचार शुरू करना पड़ सकता है।
पल्स रेट में असामान्य वृद्धि कई कारणों से हो सकती है। इसकी वजह जानने के लिए मरीज की पूरी चिकित्सकीय स्थिति का आकलन करना जरूरी होता है। ऐसे में मरीज की निगरानी करने वाली टीम के लिए समय पर स्थिति को पहचानना और जरूरत पड़ने पर वरिष्ठ चिकित्सक की सहायता लेना अहम होता है।
राजलक्ष्मी के मामले में परिजनों ने इसी पहलू पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि तबीयत बिगड़ने और पल्स रेट बढ़ने के बावजूद डॉक्टर के पहुंचने में देरी हुई। हालांकि, इस दौरान नर्सिंग स्टाफ की मौजूदगी, उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं और किए गए उपचार के बारे में विस्तृत जानकारी सामने आना अभी बाकी है।
नवजात बेटे के जन्म के बाद परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
बेटे के जन्म के कुछ घंटे बाद ही राजलक्ष्मी की मौत से परिवार गहरे सदमे में है। जिस घर में नवजात के आने की खुशी होनी चाहिए थी, वहां अब दुख का माहौल है। मां की मौत के बाद नवजात की देखभाल को लेकर भी परिवार के सामने भावनात्मक और व्यावहारिक चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
इस तरह की घटनाएं परिवार के लिए असहनीय पीड़ा का कारण बनती हैं। ऐसे समय में परिवार को भावनात्मक सहयोग के साथ नवजात की उचित देखभाल सुनिश्चित करने की जरूरत होती है।
निष्पक्ष जांच से स्पष्ट हो सकेगी घटना की वजह
राजलक्ष्मी की मौत के मामले में परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है। अब घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए भर्ती से लेकर ऑपरेशन और प्रसव के बाद की गई निगरानी तक के सभी पहलुओं की जांच जरूरी है। चिकित्सकीय रिकॉर्ड और संबंधित लोगों के बयान यह समझने में मदद कर सकते हैं कि मरीज की हालत कब बिगड़ी और उस समय क्या कदम उठाए गए।
यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, निष्पक्ष जांच से परिवार को घटना की परिस्थितियों को समझने में मदद मिलेगी।
फिलहाल, आईजीआईएमएस के पास स्थित निजी नर्सिंग होम में राजलक्ष्मी की मौत का मामला गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। परिजनों के आरोपों की पुष्टि और मौत के कारणों का स्पष्ट पता लगाने के लिए संबंधित तथ्यों की जांच महत्वपूर्ण है।