बिहार में निगरानी विभाग की बड़ी कार्रवाई

Update: 2026-07-19 04:10 GMT

पटना : बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी विभाग की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी कड़ी में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (SVU) ने पर्यटन विभाग के अधीक्षण अभियंता अवधेश कुमार सिन्हा के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए उनके तीन ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। शुरुआती जांच में तीन फ्लैट, 12 भूखंड, 19 बैंक खाते, लाखों रुपये के आभूषण और भारी निवेश से जुड़े दस्तावेज मिलने से अधिकारियों के भी होश उड़ गए। जांच एजेंसी अब बरामद दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की गहन पड़ताल कर रही है।

जानकारी के अनुसार, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो को अवधेश कुमार सिन्हा के खिलाफ आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायतें मिली थीं। प्रारंभिक जांच में आरोपों में प्रथम दृष्टया तथ्य मिलने के बाद विशेष न्यायालय से तलाशी वारंट प्राप्त किया गया। इसके बाद ब्यूरो की अलग-अलग टीमों ने पटना सहित तीन स्थानों पर एक साथ छापेमारी शुरू की।

छापेमारी के दौरान पटना के आशियाना नगर स्थित अभियंता के आलीशान आवास की भी तलाशी ली गई। इसके अलावा उनके अन्य ठिकानों पर भी कई घंटों तक दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड, संपत्ति से जुड़े कागजात और निवेश संबंधी अभिलेखों की जांच की गई। कार्रवाई के दौरान अधिकारियों को तीन फ्लैटों के दस्तावेज मिले, जबकि 12 भूखंडों से संबंधित रिकॉर्ड भी बरामद किए गए हैं।

जांच एजेंसी के अनुसार, फिलहाल यह पता लगाया जा रहा है कि ये 12 भूखंड बिहार के किन-किन जिलों या अन्य राज्यों में स्थित हैं। बरामद दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है और राजस्व अभिलेखों से उनका मिलान कराया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि सभी संपत्तियों का वास्तविक बाजार मूल्य और खरीद के समय घोषित मूल्य का भी आकलन किया जाएगा।

निगरानी विभाग की जांच में यह भी सामने आया है कि अवधेश कुमार सिन्हा के नाम या उनसे जुड़े खातों में 19 बैंक खाते संचालित हो रहे थे। इन खातों में जमा राशि, लेन-देन और निवेश की जानकारी जुटाई जा रही है। बैंक खातों के माध्यम से हुए वित्तीय लेन-देन की विस्तृत जांच की जाएगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि धन का स्रोत क्या था और उसका उपयोग किन-किन माध्यमों से किया गया।

छापेमारी के दौरान अधिकारियों को लगभग 10 लाख रुपये मूल्य के आभूषण भी मिले हैं। इसके अलावा विभिन्न वित्तीय योजनाओं, बीमा पॉलिसियों, म्यूचुअल फंड, सावधि जमा (एफडी) और अन्य निवेश से जुड़े दस्तावेज भी बरामद हुए हैं। जांच एजेंसी इन सभी निवेशों की वैधता और उनके लिए उपयोग किए गए धन के स्रोत की जांच कर रही है।

सूत्रों के अनुसार, शुरुआती जांच से यह संकेत मिला है कि अभियंता ने अपनी सेवा अवधि के दौरान बड़ी मात्रा में अचल और चल संपत्ति अर्जित की। हालांकि, इन संपत्तियों का वास्तविक मूल्यांकन जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। निगरानी विभाग का कहना है कि बरामद दस्तावेजों का विश्लेषण करने के बाद कुल संपत्ति का विस्तृत ब्यौरा तैयार किया जाएगा।

जांच अधिकारियों ने बताया कि छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और वित्तीय रिकॉर्ड भी जब्त किए गए हैं। इनकी फोरेंसिक जांच कराई जाएगी ताकि यदि किसी प्रकार के डिजिटल वित्तीय लेन-देन या बेनामी निवेश के साक्ष्य मिलते हैं, तो उन्हें भी जांच में शामिल किया जा सके।

निगरानी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आय से अधिक संपत्ति के मामलों में केवल संपत्ति की बरामदगी ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि यह भी जांचा जाता है कि संबंधित अधिकारी की वैध आय कितनी थी और उसके मुकाबले अर्जित संपत्ति कितनी अधिक है। इसी आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।

बिहार में हाल के वर्षों में भ्रष्टाचार के मामलों में निगरानी विभाग ने कई सरकारी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की है। विभिन्न विभागों के अधिकारियों के यहां छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी, आभूषण, अचल संपत्ति और निवेश से जुड़े दस्तावेज सामने आए हैं। सरकार भ्रष्टाचार के मामलों में सख्त रुख अपनाने की बात लगातार दोहराती रही है और इसी क्रम में निगरानी विभाग सक्रिय रूप से कार्रवाई कर रहा है।

फिलहाल अवधेश कुमार सिन्हा के खिलाफ जांच जारी है। जांच एजेंसी सभी बैंक खातों, संपत्तियों और निवेश के स्रोतों की पुष्टि करने में जुटी है। यदि जांच में यह साबित होता है कि संपत्तियां आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक हैं, तो उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

निगरानी विभाग ने फिलहाल मामले की विस्तृत जांच पूरी होने तक बरामद संपत्तियों के कुल मूल्य का आधिकारिक खुलासा नहीं किया है। अधिकारियों का कहना है कि सभी दस्तावेजों के सत्यापन, बाजार मूल्यांकन और वित्तीय विश्लेषण के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इस कार्रवाई को बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान की एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है, जिससे सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में सरकार की मंशा स्पष्ट होती है।

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