मन की बात में मोदी ने सीतामढ़ी मॉडल को सराहा

Update: 2026-07-26 06:22 GMT

सीतामढ़ी : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को प्रसारित अपने लोकप्रिय कार्यक्रम ‘मन की बात’ में बिहार के सीतामढ़ी जिले में चल रही प्लास्टिक कचरा प्रबंधन पहल का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने सिंगल यूज प्लास्टिक के पुन: उपयोग से इको-फ्रेंडली फर्नीचर तैयार करने के प्रयास की सराहना करते हुए इसे वेस्ट टू वेल्थ यानी कचरे से संपदा बनाने का प्रेरणादायक उदाहरण बताया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में पर्यावरण संरक्षण को लेकर कई सकारात्मक प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने सीतामढ़ी की पहल का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे बेकार समझे जाने वाले प्लास्टिक कचरे को उपयोगी उत्पादों में बदला जा रहा है। इस प्रयास से न केवल स्वच्छता को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने का काम भी हो रहा है।

सीतामढ़ी जिले में प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन को लेकर शुरू की गई पहल का उद्देश्य सिंगल यूज प्लास्टिक के दुष्प्रभाव को कम करना है। आमतौर पर इस्तेमाल के बाद फेंक दिए जाने वाले प्लास्टिक को एकत्र कर उसे नए रूप में तैयार किया जा रहा है। इससे प्लास्टिक कचरे का सही निपटारा हो रहा है और पर्यावरण पर पड़ने वाला नकारात्मक प्रभाव कम करने में मदद मिल रही है।

प्रधानमंत्री ने इस पहल को समाज में बदलाव लाने वाला प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि जब आम लोग, संस्थाएं और स्थानीय प्रशासन मिलकर काम करते हैं तो बड़े बदलाव संभव होते हैं। सीतामढ़ी का यह मॉडल देश के अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।

वेस्ट टू वेल्थ की अवधारणा के तहत बेकार वस्तुओं को उपयोगी संसाधनों में बदलने पर जोर दिया जाता है। सीतामढ़ी में प्लास्टिक कचरे से फर्नीचर तैयार करना इसी सोच का उदाहरण है। इससे एक ओर जहां कचरे की समस्या का समाधान हो रहा है, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण अनुकूल उत्पादों को बढ़ावा मिल रहा है।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में देशवासियों से सिंगल यूज प्लास्टिक का कम से कम इस्तेमाल करने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर नागरिक की भागीदारी जरूरी है।

सीतामढ़ी की इस पहल को लेकर स्थानीय स्तर पर भी उत्साह देखा जा रहा है। लोगों का मानना है कि प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रीय मंच पर इसका उल्लेख किए जाने से जिले के प्रयासों को नई पहचान मिली है। इससे अन्य लोग भी प्लास्टिक कचरे के बेहतर प्रबंधन के लिए प्रेरित होंगे।

पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, प्लास्टिक कचरा आज पूरी दुनिया के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है। लंबे समय तक नष्ट नहीं होने वाला प्लास्टिक मिट्टी, जल स्रोतों और जीव-जंतुओं के लिए नुकसानदायक साबित होता है। ऐसे में प्लास्टिक के पुनर्चक्रण और पुन: उपयोग की पहल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

सीतामढ़ी की पहल यह दिखाती है कि स्थानीय स्तर पर छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव ला सकते हैं। यदि हर शहर और गांव में कचरे को अलग-अलग एकत्र कर उसका सही उपयोग किया जाए तो स्वच्छता अभियान को और मजबूत बनाया जा सकता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात के माध्यम से कई बार देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे जनभागीदारी वाले कार्यों का उल्लेख किया है। उनका उद्देश्य ऐसे प्रयासों को प्रोत्साहित करना रहा है, जिनसे समाज और पर्यावरण दोनों को लाभ मिले।

सीतामढ़ी में प्लास्टिक कचरे से इको-फ्रेंडली फर्नीचर बनाने की पहल इसी दिशा में एक सफल उदाहरण के रूप में सामने आई है। इससे लोगों को यह संदेश मिलता है कि कचरा केवल बेकार वस्तु नहीं है, बल्कि सही प्रबंधन और सोच के साथ उसे उपयोगी संसाधन में बदला जा सकता है।

प्रधानमंत्री द्वारा इस पहल की सराहना किए जाने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि जिले में प्लास्टिक कचरा प्रबंधन को और बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, अन्य जिले भी इस मॉडल को अपनाकर पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता के क्षेत्र में नए कदम उठा सकते हैं।

सीतामढ़ी की यह पहल अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है। प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में स्थान मिलने से स्थानीय प्रयास को नई ऊर्जा मिली है और वेस्ट टू वेल्थ के संदेश को भी मजबूती मिली है।

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