पटना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिमागी नक्सल संबंधी बयान को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने प्रधानमंत्री की टिप्पणी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उन्हें दिमागी नक्सली होने पर गर्व है। उनके इस बयान पर भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने कड़ी आपत्ति जताई और इसे शर्मनाक, भद्दा तथा गैर-जिम्मेदाराना करार दिया।
रविशंकर प्रसाद ने रविवार को बिहार भाजपा के प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान चिदंबरम पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश के पूर्व गृह मंत्री, राज्यसभा सांसद और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता रह चुके नेता से ऐसे बयान की उम्मीद नहीं की जा सकती। उनके मुताबिक, चिदंबरम को प्रधानमंत्री के भाषण का संदर्भ और उसके पीछे का उद्देश्य समझना चाहिए था।
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए दिमागी नक्सल शब्द का इस्तेमाल किया था। प्रधानमंत्री ने कहा था कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई और विकास योजनाओं के कारण सशस्त्र नक्सलवाद कमजोर हुआ है। हालांकि उन्होंने दावा किया कि कुछ लोग अब भी वैचारिक रूप से नक्सलवाद का समर्थन करते हुए व्यवस्था और नीतियों को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने लोगों से ऐसी प्रवृत्तियों को पहचानने और अलग-थलग करने की अपील की थी।
प्रधानमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए चिदंबरम ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्हें दिमागी नक्सली होने पर गर्व है। उनकी टिप्पणी को सरकार के आलोचकों और असहमति रखने वालों पर लगाए जाने वाले राजनीतिक आरोपों के खिलाफ कटाक्ष माना गया। विपक्ष का आरोप है कि इस तरह के शब्दों के इस्तेमाल के जरिए सरकार वैचारिक असहमति और लोकतांत्रिक विरोध को नक्सलवाद से जोड़ने की कोशिश कर रही है।
रविशंकर प्रसाद ने कहा कि चिदंबरम की ओर से स्वयं को दिमागी नक्सल बताना बेहद आपत्तिजनक है। उन्होंने सवाल उठाया कि पूर्व गृह मंत्री रहते हुए नक्सलवाद की गंभीरता को समझने वाले नेता ने ऐसा वक्तव्य क्यों दिया। उन्होंने कहा कि नक्सली हिंसा के कारण देश के विभिन्न हिस्सों में सुरक्षाकर्मियों और आम नागरिकों को जान गंवानी पड़ी है, इसलिए इस विषय को राजनीतिक मजाक के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
भाजपा सांसद ने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की नीतियों के कारण देश में माओवाद और नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि कभी नक्सलवाद से प्रभावित रहे बस्तर और आसपास के इलाकों में अब तिरंगा शान से लहरा रहा है। छत्तीसगढ़ का भाजपा प्रभारी रहने के दौरान उन्होंने स्वयं इन क्षेत्रों का दौरा किया था और वहां आए बदलाव को देखा है।
रविशंकर प्रसाद ने प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस संबोधन को विकसित भारत का रोडमैप बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य सामने रखा और युवाओं, किसानों, महिलाओं तथा समाज के अन्य वर्गों से जुड़े मुद्दे उठाए। ऐसे में भाषण के एक शब्द को संदर्भ से अलग करके विवाद पैदा करना उचित नहीं है।
वहीं, विपक्षी दल प्रधानमंत्री की टिप्पणी को असहमति रखने वालों पर निशाना साधने का प्रयास बता रहे हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि लोकतंत्र में सरकार की आलोचना करना या उसकी नीतियों पर सवाल उठाना देशविरोधी गतिविधि नहीं हो सकती। कांग्रेस ने इसे राजनीतिक विरोध को बदनाम करने वाली भाषा बताया है।
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी स्पष्ट किया है कि प्रधानमंत्री ने विपक्षी नेताओं को दिमागी नक्सल नहीं कहा था। उनके मुताबिक, यह टिप्पणी माओवादी विचारधारा का समर्थन करने, संविधान को अस्वीकार करने और अलगाववादी सोच रखने वाले लोगों के संदर्भ में की गई थी।
फिलहाल दिमागी नक्सल शब्द को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच बयानबाजी जारी है। यह विवाद नक्सलवाद के साथ लोकतांत्रिक असहमति और वैचारिक विरोध की सीमाओं पर भी नई राजनीतिक बहस खड़ी कर रहा है।
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