पटना। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री सचिवालय में आयोजित राज्य स्तरीय सहयोग कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे 101 आवेदकों की समस्याएं सुनीं। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को जनता की शिकायतों का पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य आम लोगों को उनकी समस्याओं से राहत दिलाना और उन्हें न्याय उपलब्ध कराना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी अधिकारी और कर्मचारी संवेदनशीलता के साथ आवेदनों का निपटारा करें, ताकि जनता का प्रशासन पर विश्वास बना रहे।
मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित राज्य स्तरीय सहयोग कार्यक्रम हॉल में आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से आए लोगों ने मुख्यमंत्री के सामने अपनी शिकायतें रखीं। सम्राट चौधरी ने एक-एक कर आवेदकों की समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
101 आवेदकों ने रखीं अपनी समस्याएं
कार्यक्रम में कुल 101 आवेदक पहुंचे थे। इनमें राजस्व एवं भूमि सुधार, शिक्षा, गृह, ग्रामीण कार्य, स्वास्थ्य, समाज कल्याण, नगर विकास एवं आवास और ऊर्जा विभाग से जुड़े मामले शामिल थे।मुख्यमंत्री ने संबंधित जिलाधिकारियों और विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया कि शिकायतों का समाधान निर्धारित समयसीमा के भीतर किया जाए। उन्होंने कहा कि नागरिकों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ें।कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने लंबित मामलों पर कार्रवाई और समाधान का आश्वासन दिया। जिन आवेदकों की समस्याओं का समाधान हो चुका था, उन्होंने सहयोग कार्यक्रम की सराहना भी की।
अधिकारियों को संवेदनशीलता से काम करने के निर्देश
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि प्रत्येक नागरिक की समस्या को गंभीरता से लेना प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों को आवेदन निपटाने में पूरी तत्परता और संवेदनशीलता दिखाने को कहा।मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ पात्र लोगों तक समय पर पहुंचना चाहिए। यदि किसी नागरिक को प्रशासनिक स्तर पर परेशानी हो रही है, तो उसकी शिकायत का उचित समाधान किया जाना आवश्यक है।उन्होंने कहा कि सभी की समस्याओं का समाधान करना और उन्हें न्याय दिलाना सरकार का दायित्व है। इसके लिए प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी को पूरा सहयोग देना चाहिए।
सरकारी भवनों और स्कूलों की मरम्मत पर जोर
सहयोग कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने सरकारी भवनों और बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए।उन्होंने सभी जिलाधिकारियों से कहा कि सेवा संकल्प एवं कायाकल्प अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी भवनों, अस्पतालों, विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों और स्वास्थ्य संस्थानों की मरम्मत तथा रखरखाव का काम प्राथमिकता से पूरा किया जाए।मुख्यमंत्री ने छूटे हुए टोलों तक सड़क संपर्क की व्यवस्था और सरकारी भवनों की साफ-सफाई पर भी ध्यान देने को कहा।उन्होंने निर्देश दिया कि इन कार्यों को 31 मार्च 2027 से पहले पूरा कराया जाए। इसके अलावा विद्यालयों में रंग-रोगन, चहारदीवारी, शौचालय, पेयजल और बिजली जैसी सुविधाओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए।
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शिकायतों के समाधान से बढ़ेगा जनता का भरोसा
मुख्यमंत्री ने कहा कि सहयोग कार्यक्रम का उद्देश्य केवल लोगों के आवेदन प्राप्त करना नहीं, बल्कि उनकी समस्याओं का वास्तविक समाधान सुनिश्चित करना है।उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन मामलों में तत्काल समाधान संभव है, वहां तेजी से कार्रवाई की जाए। अन्य मामलों को निर्धारित समयसीमा के भीतर निपटाया जाए।बिहार सरकार का सहयोग पोर्टल नागरिकों को ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने, उसकी स्थिति जानने और समाधान नहीं मिलने पर रिमाइंडर भेजने की सुविधा भी उपलब्ध कराता है।इस व्यवस्था के माध्यम से शिकायतों की निगरानी और संबंधित विभागों की जवाबदेही सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाता है।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े जिलों के अधिकारी
राज्य स्तरीय कार्यक्रम में संबंधित विभागों के मंत्री और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी उपस्थित रहे।इस दौरान मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, पुलिस महानिदेशक प्रीता वर्मा और मुख्यमंत्री सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।प्रदेश के सभी जिलों के जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, पुलिस अधीक्षक और अन्य अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े।मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ काम करें, ताकि लोगों की शिकायतों के निपटारे में अनावश्यक देरी न हो।सम्राट चौधरी ने कहा कि सहयोग शिविर के माध्यम से आम लोगों की समस्याओं का निष्पक्ष और समयबद्ध समाधान करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को जनता के प्रति जवाबदेही निभाने और शिकायतों के समाधान में पूरी गंभीरता बरतने के निर्देश दिए।
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