बिहार में बनेगी सरदार पटेल की सबसे ऊंची प्रतिमा, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का बड़ा ऐलान
पटना। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर एक बड़ी घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में सरदार पटेल की सबसे ऊंची प्रतिमा स्थापित की जाएगी। उन्होंने यह घोषणा शनिवार को पटना के बापू सभागार में आयोजित राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह को संबोधित करते हुए की। साझी विरासत अभियान की ओर से आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सरदार वल्लभभाई पटेल के तैलचित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर उन्होंने देश की एकता, अखंडता और राष्ट्र निर्माण में सरदार पटेल के योगदान को याद किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरदार पटेल भारत के सबसे मजबूत गृह मंत्रियों में से एक थे और उन्होंने देश को एक सूत्र में पिरोने के लिए ऐतिहासिक कार्य किए।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल का जीवन देशभक्ति, दृढ़ इच्छाशक्ति और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत के सामने अनेक चुनौतियां थीं। उस समय देश की रियासतों को एकजुट करना बड़ी जिम्मेदारी थी। सरदार पटेल ने अपनी राजनीतिक दूरदर्शिता और प्रशासनिक क्षमता से इस चुनौती का सामना किया। उनके प्रयासों ने आधुनिक भारत की एकता और अखंडता की नींव को मजबूत किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरदार पटेल के योगदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से बिहार में उनकी भव्य प्रतिमा स्थापित करने की घोषणा की गई है। प्रस्तावित प्रतिमा के माध्यम से लोगों, विशेषकर युवाओं को सरदार पटेल के जीवन और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका से परिचित कराने का अवसर मिलेगा। हालांकि, प्रतिमा कहां स्थापित की जाएगी, उसकी ऊंचाई कितनी होगी और निर्माण पर कितना खर्च आएगा, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
पटना के बापू सभागार में आयोजित समारोह के दौरान सरदार पटेल के व्यक्तित्व और उनके ऐतिहासिक योगदान को याद किया गया। मुख्यमंत्री ने उनके तैलचित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए। उन्होंने कहा कि देश की एकता को मजबूत बनाने में सरदार पटेल की भूमिका हमेशा याद की जाएगी। राष्ट्रीय एकता दिवस का उद्देश्य भी नागरिकों को एकजुटता, भाईचारे और राष्ट्रहित के प्रति जागरूक करना है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रहे विकास कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत को वर्ष 2047 तक विकसित और आर्थिक रूप से सशक्त राष्ट्र बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने विकसित भारत के लक्ष्य को देश के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण संकल्प बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की प्रगति के लिए मजबूत अर्थव्यवस्था, आधुनिक आधारभूत संरचना और नागरिकों की भागीदारी आवश्यक है। विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में राज्यों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। बिहार जैसे राज्य में शिक्षा, रोजगार, उद्योग, कृषि और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार इस दिशा में अहम योगदान दे सकता है।
सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाद में हुआ था। वे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शामिल थे। स्वतंत्रता के बाद उन्होंने देश के पहले उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली। देशी रियासतों के भारतीय संघ में एकीकरण में उनकी निर्णायक भूमिका के कारण उन्हें लौह पुरुष के नाम से जाना जाता है।
भारत में हर वर्ष 31 अक्टूबर को सरदार पटेल की जयंती राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाई जाती है। इस अवसर पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। राष्ट्रीय एकता की शपथ, दौड़, सांस्कृतिक आयोजन और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से सरदार पटेल के योगदान को याद किया जाता है। इन आयोजनों का उद्देश्य देश की विविधता के बीच एकता की भावना को मजबूत करना है।
बिहार में सरदार पटेल की सबसे ऊंची प्रतिमा स्थापित करने की घोषणा को राज्य की स्मारक परियोजनाओं से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है। किसी महापुरुष की प्रतिमा स्थापित करने का उद्देश्य केवल उनके व्यक्तित्व को सम्मान देना नहीं, बल्कि उनके विचारों और योगदान को सार्वजनिक स्मृति में बनाए रखना भी होता है।
हालांकि, मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल प्रस्तावित प्रतिमा की ऊंचाई और स्थान को लेकर है। गुजरात के केवड़िया स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी सरदार वल्लभभाई पटेल की 182 मीटर ऊंची प्रतिमा है और इसे विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा माना जाता है। ऐसे में बिहार में प्रस्तावित प्रतिमा को लेकर यह स्पष्ट होना बाकी है कि मुख्यमंत्री का आशय राज्य में सरदार पटेल की सबसे ऊंची प्रतिमा से है या किसी अन्य ऊंचाई के लक्ष्य से। आधिकारिक परियोजना विवरण सामने आने के बाद स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
प्रतिमा निर्माण के लिए भूमि चयन, डिजाइन, बजट, तकनीकी अध्ययन और निर्माण एजेंसी जैसी प्रक्रियाओं की आवश्यकता हो सकती है। परियोजना का आकार और स्वरूप तय होने के बाद ही इसके निर्माण की समय सीमा का अनुमान लगाया जा सकेगा। फिलहाल मुख्यमंत्री ने प्रतिमा स्थापित करने की घोषणा की है, लेकिन परियोजना के विस्तृत क्रियान्वयन की जानकारी प्रतीक्षित है।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सरदार पटेल की मजबूत नेतृत्व क्षमता को याद करते हुए राष्ट्रीय एकता को देश की सबसे बड़ी ताकतों में से एक बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की इस घोषणा के बाद बिहार में सरदार पटेल की प्रस्तावित प्रतिमा को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा बढ़ने की संभावना है। अब राज्य सरकार की ओर से परियोजना का स्थान, आकार और निर्माण संबंधी योजना घोषित किए जाने का इंतजार रहेगा। राष्ट्रीय एकता दिवस पर की गई यह घोषणा सरदार पटेल की विरासत को सम्मान देने और उनके विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के प्रयास के रूप में सामने आई है।