पटना। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने शुक्रवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) की प्रक्रिया में अब भी योग्य मतदाताओं को बाहर रखा जा रहा है। तेजस्वी ने चुनाव आयोग पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए बिहार समेत हाल में चुनाव करा चुके सभी पांच राज्यों के चुनाव रद्द करने की मांग की।
तेजस्वी यादव ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए अपनी बात रखी। उन्होंने SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान योग्य मतदाताओं के नाम बाहर किए जा रहे हैं। तेजस्वी ने इसी आधार पर चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि आयोग लोकतंत्र को कमजोर करने का जरिया बन गया है। ये आरोप तेजस्वी के हैं और स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में इन्हें नहीं रखा जा सकता।
तेजस्वी का यह बयान ऐसे समय आया है जब चुनाव आयोग के भीतर SIR और मतदाता सूची से जुड़े कुछ फैसलों को लेकर कथित असहमति की रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी दल लगातार आयोग पर सवाल उठा रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी। इन मामलों में मतदाताओं के नाम जोड़ने, हटाने और बहाल करने तथा मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया में बदलाव जैसे मुद्दे शामिल बताए गए हैं।
इसी घटनाक्रम का हवाला देते हुए तेजस्वी यादव ने हाल में हुए पांच राज्यों के चुनावों को रद्द करने की मांग की। उन्होंने कहा कि बिहार समेत सभी पांच राज्यों में हुए चुनावों को रद्द किया जाना चाहिए। हालांकि, चुनाव रद्द करने की मांग तेजस्वी यादव की राजनीतिक मांग है और इससे यह स्वतः साबित नहीं होता कि संबंधित चुनावों में कोई अनियमितता हुई थी। चुनाव आयोग की ओर से भी इन आरोपों को लेकर उसका पक्ष सामने आया है।
इससे पहले भी तेजस्वी यादव चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। 23 सितंबर को उन्होंने बिहार और पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनावों को लेकर भी नए सिरे से चुनाव कराने की मांग की थी। उस समय उन्होंने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए थे और CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग भी उठाई थी।
वर्तमान विवाद की पृष्ठभूमि में चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों की रिपोर्ट महत्वपूर्ण बन गई है। रिपोर्टों में दावा किया गया कि दो चुनाव आयुक्तों ने आयोग के कुछ निर्णयों पर आपत्तियां दर्ज कराई थीं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि उसके फैसले सर्वसम्मति से लिए जाते हैं। इस तरह आयोग के कामकाज को लेकर विपक्ष के आरोपों और आयोग के अपने पक्ष के बीच अंतर बना हुआ है।
तेजस्वी यादव ने अपने बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग का इस्तेमाल लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने के लिए किया जा रहा है। ये भी राजनीतिक आरोप हैं, जिनका उल्लेख संबंधित नेताओं के बयानों के रूप में किया जाना चाहिए।
इस पूरे मामले को लेकर विपक्षी दलों की ओर से चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किए जा रहे हैं। RJD ने शुक्रवार को बिहार के जिला मुख्यालयों पर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन और पुतला दहन की घोषणा की थी। वहीं, अलग-अलग विपक्षी नेताओं ने SIR प्रक्रिया और आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर अपनी आपत्तियां सार्वजनिक की हैं।
वहीं केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने विवाद पर कहा कि यदि चुनाव आयोग के ऊपर सवाल उठ रहे हैं तो आयोग की जिम्मेदारी है कि वह मजबूती से अपना पक्ष रखे। उन्होंने चुनाव आयोग को स्वतंत्र संवैधानिक संस्था बताते हुए कहा कि उठाए जा रहे सवालों पर आयोग को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
SIR को लेकर विवाद का मुख्य केंद्र मतदाता सूची में नामों के सत्यापन, जोड़ने, हटाने और बहाल करने की प्रक्रिया है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया से योग्य मतदाता प्रभावित हो रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग की ओर से प्रक्रिया और उसके निर्णयों को लेकर अपना पक्ष रखा गया है। ऐसे में इस विवाद से जुड़े आरोपों और आधिकारिक जवाबों को अलग-अलग देखना जरूरी है।
फिलहाल तेजस्वी यादव ने बिहार समेत पांच राज्यों में हुए चुनावों को रद्द करने की मांग दोहराई है। साथ ही उन्होंने SIR के जरिए योग्य मतदाताओं के नाम हटाए जाने का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग और CEC ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा है। आने वाले दिनों में चुनाव आयोग की ओर से इस मांग और आरोपों पर क्या विस्तृत प्रतिक्रिया आती है, इस पर राजनीतिक और कानूनी चर्चा आगे बढ़ सकती है।