आजादी के आखिरी गवाह अब भी जिंदा बिहार और तेलंगाना में सबसे ज्यादा स्वतंत्रता सेनानी
स्वतंत्रता संग्राम की विरासत संभाल रहे बुजुर्ग सेनानी बिहार-तेलंगाना में बड़ी संख्या मौजूद
नई दिल्ली : भारत अपनी आजादी के 80वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है, लेकिन स्वतंत्रता संग्राम की यादों को अपने भीतर संजोए कुछ योद्धा आज भी हमारे बीच मौजूद हैं। देश की आजादी के लिए संघर्ष करने वाले स्वतंत्रता सेनानियों की संख्या भले ही अब बहुत कम रह गई है, लेकिन उनका योगदान आज भी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।
केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार, देश के अलग-अलग हिस्सों में अभी भी कुछ स्वतंत्रता सेनानी जीवित हैं। इनमें बड़ी संख्या बिहार और तेलंगाना जैसे राज्यों में रहने वाले सेनानियों की बताई जाती है। इन बुजुर्गों ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ आंदोलन में हिस्सा लिया और स्वतंत्र भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
बिहार और तेलंगाना में बड़ी संख्या में स्वतंत्रता सेनानी
स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की पेंशन योजना से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक, देश में मौजूद जीवित स्वतंत्रता सेनानियों में बिहार और तेलंगाना के सेनानियों की संख्या काफी अधिक है। इन राज्यों का स्वतंत्रता आंदोलन में भी ऐतिहासिक योगदान रहा है। बिहार में महात्मा गांधी के चंपारण आंदोलन से लेकर भारत छोड़ो आंदोलन तक कई बड़े आंदोलन हुए। वहीं तेलंगाना क्षेत्र में भी निजाम शासन और अंग्रेजी सत्ता के खिलाफ कई संघर्ष हुए थे।
संघर्ष और बलिदान की कहानी हैं ये सेनानी
आजादी की लड़ाई में शामिल इन सेनानियों ने युवावस्था में देश की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया था। कई ने जेल यात्राएं कीं, यातनाएं सहीं और अपने परिवारों से दूर रहकर आंदोलन में भाग लिया। इन स्वतंत्रता सेनानियों की जिंदगी भारत के इतिहास का जीवंत दस्तावेज है। इनके अनुभव नई पीढ़ी को यह बताते हैं कि आजादी आसानी से नहीं मिली, बल्कि इसके लिए लाखों लोगों ने त्याग और बलिदान दिया।
सरकार देती है सम्मान और सहायता
केंद्र सरकार स्वतंत्रता सेनानियों और उनके आश्रितों के लिए सम्मान पेंशन योजना संचालित करती है। इसके तहत पात्र स्वतंत्रता सेनानियों को आर्थिक सहायता और अन्य सुविधाएं दी जाती हैं। राज्य सरकारें भी समय-समय पर स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मानित करती रही हैं। स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर उन्हें विशेष सम्मान दिया जाता है।
इतिहास को संजोने की जरूरत
समय के साथ स्वतंत्रता आंदोलन के प्रत्यक्ष गवाहों की संख्या लगातार कम हो रही है। ऐसे में इतिहासकारों और शोधकर्ताओं का मानना है कि इन सेनानियों की कहानियों को संरक्षित करना जरूरी है। इनकी यादें केवल इतिहास की किताबों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि युवाओं तक पहुंचनी चाहिए ताकि वे देश की आजादी के महत्व को समझ सकें। आज जब भारत स्वतंत्रता दिवस मना रहा है, तब इन स्वतंत्रता सेनानियों का योगदान एक बार फिर याद किया जा रहा है। उनका संघर्ष और साहस देश के लिए हमेशा प्रेरणा बना रहेगा।