तिमूल का मेगा प्लान: हर पंचायत में नई दूध समिति, डेढ़ लाख किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
पंचायत में नई दूध समिति, डेढ़ लाख किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
BIHAR: त्रिपुरा के डेयरी क्षेत्र को नई गति देने के लिए त्रिपुरा स्टेट कोऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स यूनियन लिमिटेड (तिमूल) ने राज्यभर में बड़ा विस्तार अभियान शुरू करने की घोषणा की है। इस पहल के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत में नई दुग्ध सहकारी समिति स्थापित की जाएगी, जिससे लगभग 1.5 लाख नए किसानों को डेयरी व्यवसाय से जोड़ने और उनकी आय बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
राज्य सरकार और तिमूल का मानना है कि इस अभियान से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और दूध उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। डेयरी क्षेत्र को कृषि के साथ जोड़कर किसानों की नियमित आय सुनिश्चित करने की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
हर पंचायत में बनेगी नई दूध समिति
योजना के तहत राज्य की सभी ग्राम पंचायतों में चरणबद्ध तरीके से नई दुग्ध सहकारी समितियां गठित की जाएंगी। इन समितियों के माध्यम से किसानों से सीधे दूध की खरीद की जाएगी और उन्हें उचित मूल्य उपलब्ध कराया जाएगा।
नई समितियों के गठन से छोटे और सीमांत किसानों को भी डेयरी व्यवसाय से जुड़ने का अवसर मिलेगा। इससे बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी और किसानों को उनकी उपज का बेहतर लाभ मिल सकेगा।
डेढ़ लाख किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
तिमूल का लक्ष्य करीब 1.5 लाख नए दुग्ध उत्पादक किसानों को सहकारी नेटवर्क से जोड़ना है। इससे ग्रामीण परिवारों की अतिरिक्त आय बढ़ेगी और महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को भी बढ़ावा मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि डेयरी व्यवसाय खेती के साथ अतिरिक्त आय का भरोसेमंद स्रोत बन सकता है, क्योंकि किसानों को प्रतिदिन दूध बेचने से नियमित नकदी प्रवाह मिलता है।
दूध उत्पादन बढ़ाने पर रहेगा जोर
अभियान के तहत किसानों को उन्नत नस्ल के पशु, पशु चिकित्सा सेवाएं, टीकाकरण, पशु आहार, कृत्रिम गर्भाधान और आधुनिक डेयरी प्रबंधन का प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जाएगा।
सरकार का उद्देश्य केवल दूध संग्रह बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रति पशु दूध उत्पादन में सुधार करना और गुणवत्ता मानकों को मजबूत बनाना भी है।
आधुनिक डेयरी नेटवर्क होगा मजबूत
तिमूल दूध संग्रह केंद्रों, चिलिंग प्लांट, परिवहन व्यवस्था और प्रोसेसिंग क्षमता का भी विस्तार करेगा। इससे गांवों से शहरों तक दूध की आपूर्ति अधिक व्यवस्थित होगी और किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जा सकेगा।
डिजिटल भुगतान और पारदर्शी खरीद प्रणाली को भी इस अभियान का हिस्सा बनाया जाएगा, जिससे किसानों को सीधे उनके बैंक खातों में भुगतान मिल सके।
महिलाओं के लिए भी नया अवसर
दुग्ध सहकारी समितियों में महिला स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में महिलाएं पशुपालन से जुड़ी हैं, ऐसे में यह योजना उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में भी मदद करेगी।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि योजना तय समय पर लागू होती है तो त्रिपुरा में डेयरी क्षेत्र तेजी से विकसित होगा। किसानों की आय बढ़ने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे और राज्य का दुग्ध उत्पादन आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ेगा।