नूरसराय : नालंदा के नूरसराय थाना क्षेत्र के दरुआरा बथानी में मजदूरी मांगने को लेकर हुए विवाद के दौरान एक युवक को खौलते तेल की कड़ाही में धकेलने का आरोप सामने आया है। गंभीर रूप से झुलसे युवक की आठ दिनों तक इलाज चलने के बाद सोमवार की सुबह मौत हो गई। मृतक की पहचान बालगोविंद चौहान के पुत्र कामो चौहान के रूप में हुई है। उनकी उम्र 30 वर्ष थी। परिजनों का कहना है कि उपचार पर छह लाख रुपये से अधिक खर्च किए गए, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी।
परिजनों के अनुसार, विवाद मजदूरी मांगने को लेकर हुआ था। इसी विवाद के दौरान कामो चौहान को खौलते तेल की कड़ाही में धकेल दिया गया। इस घटना में वह गंभीर रूप से झुलस गए। परिजनों ने युवक की मौत से पहले हुए घटनाक्रम को मजदूरी के विवाद से जोड़ते हुए यह आरोप लगाया है। हालांकि, किस व्यक्ति पर उन्हें धकेलने का आरोप है और विवाद के समय वहां कौन मौजूद था, इसका विस्तृत विवरण सामने नहीं आया है।
गंभीर रूप से झुलसने के बाद कामो का इलाज शुरू हुआ। आठ दिनों तक उनका उपचार चलता रहा। परिवार ने उनकी जान बचाने के लिए इलाज पर छह लाख रुपये से अधिक खर्च होने की बात कही है। उपचार जारी रहने के बावजूद सोमवार की सुबह उनकी मौत हो गई। युवक की मृत्यु के बाद मजदूरी के विवाद और खौलते तेल में धकेले जाने के आरोप का मामला सामने आया है। परिवार के लिए आठ दिनों का उपचार भी उन्हें बचाने में सफल नहीं रहा।
यह घटना नूरसराय थाना क्षेत्र के दरुआरा बथानी की बताई गई है। मृतक का नाम कामो चौहान और पिता का नाम बालगोविंद चौहान है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, युवक 30 वर्ष के थे। घटना की वजह के तौर पर परिजनों ने मजदूरी मांगने को लेकर हुए विवाद का उल्लेख किया है। मजदूरी की रकम कितनी थी, वह किस काम के बदले मांगी जा रही थी और भुगतान को लेकर विवाद कैसे शुरू हुआ, इसकी जानकारी नहीं दी गई है।
परिजनों के आरोप में सबसे गंभीर बात युवक को खौलते तेल की कड़ाही में धकेले जाने की है। उनका कहना है कि इसी कारण कामो गंभीर रूप से झुलसे और उन्हें उपचार की जरूरत पड़ी। फिलहाल यह घटनाक्रम परिजनों के बयान के आधार पर सामने आया है। आरोप की स्वतंत्र पुष्टि या घटना के संबंध में किसी प्रत्यक्षदर्शी का बयान उपलब्ध विवरण में शामिल नहीं है। इसलिए युवक को धकेले जाने की बात को परिजनों के आरोप के रूप में ही प्रस्तुत किया जा रहा है।
कामो की मृत्यु से पहले आठ दिनों तक चले इलाज के बारे में परिवार ने आर्थिक खर्च का भी उल्लेख किया है। उनके मुताबिक, उपचार में छह लाख रुपये से अधिक खर्च हो गए। यह राशि परिवार की ओर से बताई गई है। किस अस्पताल में इलाज हुआ और उपचार के दौरान कौन-कौन सी चिकित्सा प्रक्रियाएं अपनाई गईं, इसका विवरण सामने नहीं आया है। युवक के शरीर का कितना हिस्सा झुलसा था, इसकी भी जानकारी उपलब्ध नहीं है।
परिवार के बयान के अनुसार, घटना के बाद युवक गंभीर हालत में थे और उनकी जान बचाने के लिए उपचार कराया गया। आठ दिनों तक इलाज चलने के बाद सोमवार की सुबह उनकी मृत्यु हुई। इस अवधि के दौरान परिवार उपचार पर बड़ी रकम खर्च होने की बात कह रहा है। हालांकि, खर्च की व्यवस्था कैसे की गई, इसके बारे में कोई विवरण नहीं दिया गया है। ऐसे में कर्ज लेने, संपत्ति बेचने या किसी अन्य आर्थिक कदम के बारे में निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
मजदूरी मांगने को लेकर विवाद होने का आरोप इस मामले का प्रमुख पहलू है। परिजनों ने युवक के झुलसने को उसी विवाद से जोड़ा है। लेकिन घटना का सटीक समय, कड़ाही किस स्थान पर रखी थी और वहां क्या काम हो रहा था, यह स्पष्ट नहीं है। सामने आई जानकारी में संबंधित दूसरे पक्ष का बयान भी शामिल नहीं है। विवाद और युवक के झुलसने की पूरी परिस्थितियां स्पष्ट होने के लिए घटना से जुड़े अन्य विवरण आवश्यक हैं।
युवक की मौत के संबंध में फिलहाल परिजनों का पक्ष ही उपलब्ध है। किसी शिकायत, प्राथमिकी, गिरफ्तारी या पुलिस कार्रवाई का विवरण साझा जानकारी में नहीं दिया गया है। इसलिए इन विषयों पर कोई दावा नहीं किया जा सकता। इसी तरह चिकित्सकीय रिपोर्ट या मृत्यु के कारण पर डॉक्टरों की टिप्पणी भी सामने नहीं आई है। उपलब्ध घटनाक्रम के अनुसार, कामो गंभीर रूप से झुलसे थे, उनका आठ दिनों तक इलाज चला और सोमवार की सुबह उनकी मौत हो गई।
दरुआरा बथानी के इस मामले में 30 वर्षीय कामो चौहान की मृत्यु और परिजनों के आरोप मुख्य तथ्य हैं। परिवार का कहना है कि मजदूरी मांगने पर हुए विवाद में उन्हें खौलते तेल की कड़ाही में धकेला गया था। उपचार पर छह लाख रुपये से अधिक खर्च होने के बावजूद उनकी जान नहीं बच सकी। घटना में शामिल लोगों की पहचान और अन्य परिस्थितियों का विस्तृत ब्योरा सामने आना बाकी है। फिलहाल युवक की मौत के साथ परिवार द्वारा लगाए गए गंभीर आरोप इस मामले के केंद्र में हैं।