Janjgir-Champa. जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में प्रकाश इंडस्ट्रीज लिमिटेड से फर्जी ई-मेल के जरिए 28 लाख रुपये की साइबर ठगी करने वाले गिरोह के मुख्य आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपी को बिहार के सीतामढ़ी जिले से पकड़ा। आरोपी के बैंक खाते और तकनीकी साक्ष्यों की जांच के बाद उसकी पहचान हुई। पुलिस ने आरोपी को स्थानीय न्यायालय में पेश करने के बाद ट्रांजिट रिमांड पर जांजगीर-चांपा लाया, जहां न्यायालय में पेश करने के बाद उसे जेल भेज दिया गया। मामले में एक अन्य आरोपी की गिरफ्तारी अभी बाकी है। जानकारी के अनुसार, प्रकाश इंडस्ट्रीज लिमिटेड कोटाडबरी चांपा के पर्चेस विभाग में कार्यरत कर्मचारी ने साइबर थाना जांजगीर में शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में बताया गया कि कंपनी को राउरकेला इस्पात संयंत्र के नाम से एक ई-मेल प्राप्त हुआ था। इस ई-मेल के माध्यम से कंपनी को बैंक खाता बदलने की जानकारी दी गई। कंपनी के कर्मचारियों ने ई-मेल को वास्तविक समझकर नए बैंक खाते में 28 लाख रुपये की राशि ट्रांसफर कर दी। बाद में जब कंपनी ने राउरकेला इस्पात संयंत्र से भुगतान के संबंध में जानकारी ली तो वहां से बताया गया कि उन्हें कोई भुगतान प्राप्त नहीं हुआ है। इसके बाद प्रकाश इंडस्ट्रीज के अधिकारियों को पूरे मामले में साइबर ठगी की आशंका हुई। जांच करने पर पता चला कि ठगों ने राउरकेला इस्पात संयंत्र से मिलती-जुलती ई-मेल आईडी तैयार की थी। ई-मेल आईडी में केवल एक शब्द में बदलाव किया गया था। इसी मामूली अंतर पर ध्यान नहीं जाने के कारण कंपनी ठगी का शिकार हो गई।
मामले की शिकायत के आधार पर साइबर थाना जांजगीर में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) और आईटी एक्ट की धारा 66(C), 66(D) के तहत अपराध दर्ज किया गया। मामला बड़ी रकम से जुड़ा होने के कारण पुलिस ने इसे गंभीरता से लेते हुए आरोपियों की तलाश शुरू की। पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय के निर्देश पर साइबर थाना जांजगीर की टीम ने मामले की तकनीकी जांच शुरू की। जांच के दौरान ठगी की रकम जिस बैंक खाते में ट्रांसफर हुई थी, उसकी जानकारी जुटाई गई। बैंक खाते की जांच करने पर वह खाता पंकज मुखिया पिता जहरा मुखिया, उम्र 42 वर्ष, निवासी ग्राम परिगमा, जिला सीतामढ़ी, बिहार के नाम पर दर्ज पाया गया। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने अपने आधार कार्ड में पता बदला था। पहले उसके आधार कार्ड में दिल्ली का पता दर्ज था, जिसे बाद में अपडेट कर बिहार का पता दर्ज कराया गया। पुलिस ने बैंक खाते से जुड़े मोबाइल नंबर, कॉल डिटेल रिकॉर्ड यानी सीडीआर और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच की। इन जानकारियों के आधार पर आरोपी की गतिविधियों और उसके बिहार में मौजूद होने का पता लगाया गया।
इसके बाद साइबर थाना जांजगीर की पुलिस टीम बिहार पहुंची। टीम ने थाना चरौत और जिला सीतामढ़ी की स्थानीय पुलिस के सहयोग से आरोपी पंकज मुखिया को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि उसने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर अपने नाम से बैंक खाता खुलवाया था। साइबर ठगी से प्राप्त रकम इसी खाते में मंगाई जाती थी और बाद में रकम को आरोपियों के बीच बांट लिया जाता था। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने अपने हिस्से में मिली रकम को खाने-पीने और अन्य खर्चों में इस्तेमाल करना बताया है। पूछताछ और जांच के दौरान आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। बिहार में सक्षम न्यायालय के समक्ष पेश करने के बाद आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर जांजगीर-चांपा लाया गया। इसके बाद जांजगीर न्यायालय में पेश करने पर उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
पुलिस ने बताया कि ठगी की कुल 28 लाख रुपये की रकम में से करीब 23 लाख रुपये को होल्ड करा दिया गया है। अब इस रकम को पीड़ित कंपनी को वापस कराने की प्रक्रिया की जा रही है। इससे कंपनी को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। मामले में पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है। जांच में यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि आरोपियों ने इससे पहले इसी तरह किसी अन्य कंपनी या संस्थान को फर्जी ई-मेल भेजकर ठगी की है या नहीं। पुलिस का कहना है कि डिजिटल भुगतान और ई-मेल के माध्यम से होने वाली साइबर ठगी से बचने के लिए कंपनियों को बैंक खाता बदलने से संबंधित किसी भी ई-मेल की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करनी चाहिए।
Tags: