धान के खेतों में दोहरी मुसीबत: आर्सेनिक और कैडमियम एक साथ, इनसे कैसे निपटें किसान
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शुचिता नैयर एवं दीपक शर्मा, अनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग, इदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर
रायपुर। छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है और चावल यहाँ के प्रमुख भोजन में शामिल है। खेत की मिट्टी और सिंचाई के पानी से आर्सेनिक और कैडमियम (ब्क) धान के दाने तक पहुँच सकते हैं। दोनों धातुओं का न रंग, न गंध और न स्वाद होता है। लंबे समय तक इनका सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। छत्तीसगढ़ में आर्सेनिक की समस्या अंबागढ़ चैकी और कांकेर के कुछ क्षेत्रों में, जबकि कैडमियम का जोखिम कोरबा सहित औद्योगिक और खनन क्षेत्रों में सामने आया है। खास बात यह है कि दोनों धातुएँ एक ही खेत में साथ हो सकती हैं।
इन धातुओं का स्रोत क्या है?
आर्सेनिक प्राकृतिक चट्टानों, आर्सेनिकयुक्त भूजल, पुराने कीटनाशकों, खदान के मलबे और कोयले की राख से आ सकता है। खेती में सिंचाई इसका प्रमुख माध्यम है। कैडमियम जिंक अयस्क, रॉक-फॉस्फेट उर्वरक, फ्लाई ऐश, औद्योगिक अपशिष्ट और खदान के मलबे से खेत में पहुँच सकता है।
छत्तीसगढ़ में आर्सेनिक और कैडमियमकी स्थिति
छत्तीसगढ़ में अभी दोनों धातुओं का पूर्ण विकासखंडवार नक्शा उपलब्ध नहीं है, लेकिन अध्ययनों से जोखिम वाले क्षेत्र स्पष्ट हुए हैं। अंबागढ़ चैकी के 10 गाँवों में हैंडपंप के पानी में आर्सेनिक 0.03-0.75 मिलीग्राम प्रति लीटर और औसतन 0.32 मिला। 13 गाँवों की मिट्टी में यह 0.9-5.7 तथा कौड़ीकसा में 7.5 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम तक पाया गया। कांकेर के 89 स्थानों के भूजल में औसत आर्सेनिक 0.144 मिलीग्राम प्रति लीटर मिला, जोॅभ्व्सीमा का लगभग 14 गुना है। कोरबा के औद्योगिक क्षेत्रों और बिलासपुर के राजमार्ग किनारे खेतों में कैडमियम व अन्य धातुओं का प्रदूषण भी सामने आया है।
मानव स्वास्थ्य पर आर्सेनिक और कैडमियम के दुष्प्रभाव
आर्सेनिक लंबे समय तक शरीर में जाने पर त्वचा में बदलाव तथा त्वचा, फेफड़े और मूत्राशय के कैंसर से जुड़ा है। कैडमियम गुर्दों को नुकसान पहुँचा सकता है और हड्डियों को कमजोर कर सकता है। प्रदूषित धान का पैरा पशुओं के माध्यम से भी भोजन-श्रृंखला में धातुओं को पहुँचा सकता है। चित्र 1ण् आर्सेनिक और कैडमियम के दीर्घकालिक संपर्क का मानव शरीर पर असर। बाएँरू हथेलियों पर काले धब्बे और कठोर चकत्ते ;केराटोसिसद्ध, पीने के पानी से आर्सेनिक विषाक्तता का क्लासिक संकेत। दाएँरू दोनों धातुओं से प्रभावित अंग और रोग।
धान में दोनों धातुएँ एक साथ हों तो क्या होता है?
अध्ययन के अनुसार आर्सेनिक और कैडमियम का संयुक्त प्रभाव केवल दोनों प्रभावों का जोड़ नहीं है। मध्यम और लगभग समान मात्रा में दोनों का कुछ प्रभाव एक-दूसरे को कम कर सकता है, लेकिन अधिक या असंतुलित मात्रा में नुकसान बढ़ सकता है। इसलिए दोनों धातुओं की एक साथ जाँच और प्रबंधन जरूरी है। अपने खेत को जानिए: मिट्टी, सिंचाई के पानी और चभ् की जाँच कराएँ। एक धातु अधिक मिले तो दूसरी की भी जाँच करें। आर्सेनिक प्रभावित क्षेत्र, कोयला पट्टी, औद्योगिक क्षेत्र और व्यस्त सडक़ों के आसपास जाँच को प्राथमिकता दें।
स्रोत रोकिए: नलकूप के पानी में आर्सेनिक 0.10 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक हो तो ग्रीष्मकालीन धान में इसका उपयोग कम करें। संभव हो तो तालाब या नहर का पानी लें। कम-कैडमियम वाले उर्वरक चुनें और फ्लाई ऐश व औद्योगिक अपशिष्ट को खेत में जाने से रोकें। पानी को दोनों के लिए साधिए: आर्सेनिक पानी भरे खेत में, जबकि कैडमियम लंबे समय तक खेत सूखने पर अधिक उपलब्ध हो सकता है। इसलिए बाली बनने से पहले नियंत्रित गीला-सूखा प्रबंधन करें और बाद में मिट्टी में पर्याप्त नमी रखें। मिट्टी में बाँधिए: चूना कैडमियम की उपलब्धता घटा सकता है। चूना और आयरन ऑक्साइड के प्रयोग से आर्सेनिक लगभग 64 प्रतिशत और कैडमियम 35 प्रतिशत तक कम होने की रिपोर्ट है। संशोधित बायोचार, वर्मीकम्पोस्ट और सिलिकॉन स्रोत भी उपयोगी हो सकते हैं।
सही किस्म चुनिए: धान की किस्मों में धातु संचय की क्षमता अलग-अलग होती है। मुक्तोश्री कम आर्सेनिक संचय वाली किस्म है। अंबागढ़ चैकी में लुचई और सरना ने प्त्-64 की तुलना में कम विषैले तत्व जमा किए। स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार ज्ञटज्ञ से किस्म की सलाह लें। छिडक़ाव से पौधे को बचाइए: दाना भरने के समय कुछ पर्णीय छिडक़ाव धातुओं का दाने तक पहुँचना कम कर सकते हैं। परीक्षणों में सेलेनियम और काइटोसान आधारित उपचारों से लाभ मिला है। इनका प्रयोग विशेषज्ञज्ञटज्ञकी सलाह से ही करें। सबसे खराब जमीन और पैरे को भोजन-शृंखला से बाहर कीजिए: अत्यधिक प्रदूषित खेतों में कुछ मौसम गैर-खाद्य या सफाई वाली फसलें ली जा सकती हैं। च्जमतपे अपजजंजंजैसे पौधे आर्सेनिक का अधिक संचय करते हैं। प्रदूषित पैरा पशुओं को न खिलाएँ और खेत में न जलाएँ। रसोई में: चावल को अच्छी तरह धोकर अधिक पानी में पकाएँ और अतिरिक्त पानी निकाल दें। इससे आर्सेनिक कम हो सकता है। संदिग्ध क्षेत्र का पानी पीने और भोजन पकाने में उपयोग न करें। तालिका 3. धान के दाने में आर्सेनिक और कैडमियम के विरुद्ध खेत का उपाय-संदूक पानीऔर चभ् कीजाँचय सिंचाईस्रोतबदलना दोनों पानी का स्रोत बदलने पर दो बाराजाँचकराएँ।
पैरे की खाद बनाएँ या निपटान करें
छत्तीसगढ़ में अब धान की मिट्टी, सिंचाई के पानी और अनाज में आर्सेनिक व कैडमियम का विकासखंडवार नक्शा तैयार करना जरूरी है। साथ ही कम-संचय वाली किस्मों और दोनों धातुओं को एक साथ नियंत्रित करने वाली तकनीकों पर काम करना होगा।
आर्सेनिक और कैडमियम एक ही धान के खेत में साथ पहुँच सकते हैं। इसलिए केवल एक धातु पर आधारित उपाय पर्याप्त नहीं हैं। मिट्टी-पानी की जाँच, सुरक्षित सिंचाई, संतुलित जल प्रबंधन, उचित मृदा सुधारक, कम-संचय वाली किस्में, विशेषज्ञ की सलाह और प्रदूषित पैरे को पशु आहार से दूर रखनाकृइन सभी उपायों को अपनाकर ही किसान, उपभोक्ता, पशुधन और पर्यावरण की सुरक्षा बेहतर ढंग से की जा सकती है।