मंगला वार्ड में पीलिया के बढ़ते मामलों से हड़कंप, स्वास्थ्य विभाग करेगा जांच

छग

Update: 2026-07-29 17:19 GMT
Bilaspur. बिलासपुर। बिलासपुर शहर के मंगला वार्ड क्रमांक 13 में पीलिया के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों का दावा है कि वार्ड के कई घरों में बच्चे, युवा और बुजुर्ग पीलिया से संक्रमित हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के पास अभी तक मरीजों की वास्तविक संख्या उपलब्ध नहीं है, क्योंकि अधिकांश लोग निजी अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं या मेडिकल स्टोर से दवा लेकर स्वयं उपचार कर रहे हैं। कुछ परिवारों द्वारा झाड़-फूंक का सहारा लेने की बात भी सामने आई है, जिससे बीमारी के सही आंकड़े विभाग तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि मंगला बस्ती में पिछले कई दिनों से दूषित पेयजल की आपूर्ति हो रही है। लोगों का मानना है कि इसी दूषित पानी के कारण पीलिया के मामले तेजी से बढ़े हैं। नागरिकों ने प्रशासन से जल आपूर्ति की गुणवत्ता की जांच कराने और प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की है। यह पहला मौका नहीं है जब मंगला क्षेत्र से पीलिया की शिकायत सामने आई हो। इससे पहले भी वार्ड पार्षद रमेश पटेल ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) को मामले की जानकारी दी थी। शिकायत मिलने के बाद मितानिनों के माध्यम से घर-घर सर्वे कराया गया था। उस समय भी कई लोगों में पीलिया जैसे लक्षण पाए जाने की सूचना मिली थी।

जिला सर्विलेंस अधिकारी डॉ. प्रमोद तिवारी ने बताया कि पहले मिली शिकायत के दौरान मितानिनों ने दूषित पानी को बीमारी का संभावित कारण बताया था। इसके बाद विभाग को कोई नई सूचना नहीं मिली थी, लेकिन अब फिर से मामले सामने आने पर बुधवार को पूरे क्षेत्र की दोबारा जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इधर, जिले के कोटा विकासखंड से भी स्वास्थ्य विभाग के लिए चिंता बढ़ाने वाली खबर आई है। औरापानी तथा केंदा गांव में मलेरिया के दो नए मरीजों की पुष्टि हुई है। दोनों मरीजों की स्थिति को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें सिम्स अस्पताल रेफर किया गया है। इन नए मामलों के बाद जिले में मलेरिया मरीजों की कुल संख्या बढ़कर 16 हो गई है।

मलेरिया के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीण क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। विभाग की टीमें स्कूलों और बालक-बालिका छात्रावासों में स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर रही हैं। इन शिविरों में बच्चों की स्वास्थ्य जांच की जा रही है, आवश्यक दवाइयों का वितरण किया जा रहा है तथा ग्रामीणों और विद्यार्थियों को मच्छरों से बचाव, साफ-सफाई बनाए रखने और समय पर उपचार कराने के प्रति जागरूक किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने कर्मचारियों की लापरवाही पर भी सख्त रुख अपनाया है। जिला मलेरिया कार्यालय के चार कर्मचारियों के बिना सूचना अनुपस्थित रहने पर उन्हें फील्ड सर्वे कार्य में लगाया गया है। सोमवार से जिला मलेरिया अधिकारी स्वयं इन कर्मचारियों के साथ गांवों का दौरा कर रहे हैं। वहीं, एक महिला कर्मचारी को बिना सूचना अनुपस्थित रहने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

इसके अलावा दो अन्य कर्मचारियों को कोटा क्षेत्र के गांवों में स्वास्थ्य कर्मियों के साथ सर्वे और जांच कार्य के लिए भेजा गया है। विभाग ने सभी स्वास्थ्य टीमों को निर्देश दिए हैं कि जहां भी पीलिया या मलेरिया की शिकायत मिले, वहां तत्काल पहुंचकर जांच, सैंपलिंग, उपचार और नियंत्रण की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि यदि किसी को बुखार, आंखों में पीलापन, कमजोरी, उल्टी या अन्य लक्षण दिखाई दें तो स्वयं इलाज करने के बजाय तुरंत सरकारी स्वास्थ्य केंद्र या चिकित्सक से संपर्क करें। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बरसात के मौसम में दूषित पेयजल और जलभराव के कारण पीलिया तथा मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में साफ पानी का उपयोग, भोजन की स्वच्छता, मच्छरों से बचाव और समय पर चिकित्सकीय जांच ही इन बीमारियों से बचने का सबसे प्रभावी उपाय है।
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