Janjgir-Champa. जांजगीर-चांपा। स्कूल में कथित रूप से शराब के नशे में पहुंचने और जनप्रतिनिधियों से बदसलूकी करने के मामलों में जिला शिक्षा अधिकारी ने दो शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। कार्रवाई बलौदा और पामगढ़ विकासखंड के अलग-अलग शासकीय प्राथमिक स्कूलों में पदस्थ शिक्षकों के खिलाफ की गई है। दोनों मामलों में संबंधित शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था, लेकिन प्रतिवाद उत्तर प्रस्तुत नहीं किए जाने के बाद निलंबन आदेश जारी किया गया।
पहला मामला विकासखंड बलौदा के शासकीय नवीन प्राथमिक शाला परसदा (संजयनगर) का है। विकासखंड शिक्षा अधिकारी बलौदा द्वारा 21 सितंबर 2026 को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को भेजे गए पत्र के अनुसार, स्कूल में पदस्थ सहायक शिक्षक एलबी ललित राम भारद्वाज 19 सितंबर को कथित रूप से शराब पीकर स्कूल पहुंचे थे। मामले की जानकारी सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर कार्रवाई शुरू की गई। ललित राम भारद्वाज को कारण बताओ नोटिस जारी कर आरोपों के संबंध में जवाब मांगा गया। विभागीय आदेश के मुताबिक संबंधित शिक्षक की ओर से नोटिस का प्रतिवाद उत्तर प्रस्तुत नहीं किया गया।
जिला शिक्षा अधिकारी ने आदेश में इस कृत्य को पदीय गरिमा के विपरीत, अनुशासनहीनता और स्वेच्छाचारिता का द्योतक माना है। आदेश में इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 3 के विपरीत गंभीर कदाचार बताते हुए कार्रवाई की गई है। इसके बाद ललित राम भारद्वाज को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। निलंबन की अवधि में उनका मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय बलौदा निर्धारित किया गया है। इस दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी।
दूसरा मामला विकासखंड पामगढ़ के शासकीय प्राथमिक शाला भांठापारा भुईगांव का है। यहां पदस्थ प्रधान पाठक योगेश्वर सिंह कंवर के खिलाफ भी स्कूल में कथित रूप से शराब पीकर पहुंचने और जनप्रतिनिधियों से बदसलूकी करने की शिकायत सामने आई थी। विभागीय जानकारी के अनुसार, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और विकासखंड शिक्षा अधिकारी पामगढ़ द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन के आधार पर मामले को संज्ञान में लिया गया। आरोप है कि 24 सितंबर 2026 को प्रधान पाठक योगेश्वर सिंह कंवर शराब पीकर स्कूल परिसर में पहुंचे और वहां जनप्रतिनिधियों के साथ बदसलूकी की।
मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने प्रधान पाठक को कारण बताओ नोटिस जारी कर तत्काल जवाब मांगा। विभागीय आदेश में कहा गया है कि संबंधित प्रधान पाठक की ओर से भी प्रतिवाद उत्तर प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके बाद उपलब्ध प्रतिवेदन एवं तथ्यों के आधार पर विभागीय कार्रवाई की गई। जिला शिक्षा अधिकारी ने योगेश्वर सिंह कंवर के कथित कृत्य को भी पदीय गरिमा के विपरीत बताते हुए अनुशासनहीनता और स्वेच्छाचारिता की श्रेणी में माना। आदेश में इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 3 के विपरीत गंभीर कदाचार बताया गया है।
योगेश्वर सिंह कंवर को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय पामगढ़ निर्धारित रहेगा। उन्हें भी नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। दोनों मामलों में जिला शिक्षा अधिकारी की ओर से अलग-अलग निलंबन कार्रवाई की गई है। एक मामला सहायक शिक्षक के कथित रूप से शराब पीकर स्कूल पहुंचने से संबंधित है, जबकि दूसरे मामले में प्रधान पाठक पर शराब के नशे में स्कूल पहुंचने के साथ जनप्रतिनिधियों से बदसलूकी करने का आरोप है।
शिक्षकों पर बच्चों को शिक्षा देने के साथ स्कूल में अनुशासन और गरिमापूर्ण वातावरण बनाए रखने की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में स्कूल परिसर में शराब के नशे में उपस्थित होने से जुड़े आरोपों को शिक्षा विभाग ने गंभीरता से लिया है। दोनों शिक्षकों को निलंबित करते हुए उनके लिए अलग-अलग विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय को मुख्यालय निर्धारित किया गया है।