लिखित शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई घोटालेबाज पर, सस्पेंड या नौकरी से करना था बर्खास्त
अदालत में चालान पेश, घोटाले बाज अधिकारी आशीष श्रीवास्तव को बचाने में बड़े -बड़े नेताओं और अधिकारियों का वरदहस्त
रायपुर (जसेरि)। पूर्ववर्ती सरकार से लेकर वर्तमान सरकार के कार्यकाल में हुए शराब घोटाले के मु य आरोपी बनाने के बाद भी आबकारी विभाग के सर्वेसर्वा अधिकारी आशीष श्रीवास्तव के खिलाफ एसीबी/ईओडब्ल्यू में शिकायतकर्ता ने लिखित शिकायत की लेकिन मजेदार बात यह है कि आशीष श्रीवास्तव को छोड़कर सभी आरोपियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई हो रही है। हर रोज शराब घोटाले के लेकर ईडी और एसीबी/ईओडब्ल्य़ू 27 हजार पन्नों की 10 वां चालान पेश हो गया पर आशीष श्रीवास्तव के खिलाफ जिन मामलों की शिकायत की गई उस पर कोई एक्शन नहीं लिय़ा जा रहा है। खबरदारों का मामना है कि आशीष श्रीवास्तव को बचाने के पीछे बड़े अधिकारियों से लेकर बड़े राजनेताओं का वृहद हस्त माना जा रहा है। जबिक आशीष के खिलाफ की गई शिकायत में घोटालों की प्रूफ के सभी दस्तावेज संलग्न किए गए थे।
व्यक्तिगत आरोपियों में रामगोपाल अग्रवाल, नवीन केडिया, राजेन्द्र जायसवाल उर्फ चुन्नू जायसवाल, भूपेन्द्र पाल सिंह भाटिया उर्फ गोल्डी भाटिया, प्रिन्स भाटिया, विधु गुप्ता, अशोक सिंह, नवनीत गुप्ता, सत्येन्द्र प्रकाश गर्ग, विकास कुमार, राजीव द्विवेदी, एन. उदय राव, आशीष सौरभ केडिया, सुमित कुमार मालू उर्फ टिंकू मालू, आशीष श्रीवास्तव, यश टुटेजा, अ तर ढेबर, बीआर लोहिया तथा कुमार भाई ठक्कर उर्फ खंजन ठक्कर शामिल हैं। आरोपित संस्थाओं में छत्तीसगढ़ डिस्टिलरी लिमिटेड, वेलकम डिस्टिलरी प्रा.लि., भाटिया वाइन्स मर्चेन्ट्स प्रा.लि., प्रिज्म होलोग्राफी एण्ड सिक्योरिटी फिल् स प्रा.लि., दिशिता वेंचर्स प्रा.लि., ओम साई ब्रेवरेजेस प्रा.लि., नेक्सजेन पावर इंजीटेक प्रा.लि. तथा अन्य संबंधित फर्में व कंपनियां शामिल हैं।
हर महीने 80 लाख का कमीशन, जांच में सामने आए नए तथ्य : पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में स्टेट मार्केटिंग कार्पोरेशन लिमिटेड (सीएसएमसीएल) मैनपावर भुगतान घोटाले में कमीशन वसूली के नेटवर्क को लेकर जांच में नए तथ्य सामने आए हैं।
ईओडब्ल्यू के पूरक आरोपपत्र के अनुसार, शासकीय शराब दुकानों के कर्मचारियों के ओवरटाइम, बोनस और चार अतिरिक्त दिनों के भुगतान के नाम पर मैनपावर एजेंसियों को अतिरिक्त राशि दी गई। इसके बाद एजेंसियों से नकद कमीशन वसूला जाता था। सभी एजेंसियों से हर महीने करीब 70 से 80 लाख रुपये कमीशन आता था।
शराब सिंडिकेट प्रमुख अनवर ढेबर तक पहुंचाने के साक्ष्य मिले : तत्कालीन सीएसएमसीएल प्रबंध संचालक अरुणपति त्रिपाठी के कार्यकाल में एजेंसियों से 28 से 32 करोड़ रुपये नकद कमीशन लेकर शराब सिंडिकेट प्रमुख अनवर ढेबर तक पहुंचाने के साक्ष्य मिले हैं। कमीशन की रकम एकत्र कर त्रिपाठी तक पहुंचाने की जि मेदारी सिद्धार्थ सिंघानिया निभाता था।
एक एजेंसी से 15.65 करोड़ रुपये देने का दावा : आरोपपत्र में सिद्धार्थ सिंघानिया के कथन का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि अक्टूबर 2019 से मार्च 2023 के बीच अकेले सुमीत फैसिलिटीज लिमिटेड की ओर से लगभग 15.65 करोड़ रुपये दिए गए। जांच में यह भी सामने आया कि त्रिपाठी का कार्यकाल समाप्त होने के बाद नवीन प्रताप सिंह तोमर के माध्यम से कथित कमीशन वसूली जारी रही।
दो कंपनियों को 48 करोड़ से अधिक का भुगतान : ईगल हंटर सॉल्यूशन लिमिटेड और अलर्ट कमांडोज प्राइवेट लिमिटेड को मिलाकर 48.08 करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त भुगतान हुआ। ईगल हंटर को 33.45 करोड़ और अलर्ट कमांडोज को 14.63 करोड़ रुपये मिले। इनमें से 38.31 करोड़ रुपये अरुणपति त्रिपाठी के कार्यकाल में भुगतान किए गए। जांच एजेंसी के अनुसार, ईगल हंटर के संस्थापक बीआर लोहिया दोनों कंपनियों के प्रमुख निर्णय लेते थे। उनके निर्देश पर कर्मचारियों के ओवरटाइम और अतिरिक्त दिनों के बिल तैयार कराए गए, जबकि संबंधित कर्मचारियों को रकम नहीं मिलने की बात सामने आई।
बिल पास कराने के लिए 28.80 लाख रुपये : 29 नवंबर 2023 को लंबित बिल पारित कराने के बदले तत्कालीन उप महाप्रबंधक नवीन प्रताप सिंह तोमर को कथित तौर पर 28.80 लाख रुपये दिए जाने थे। इसके लिए दिल्ली से 29.40 लाख रुपये का चेक भेजा गया। बैंक से रकम निकालने के बाद 60 हजार रुपये कार्यालयीन खर्च के लिए रखे गए और शेष राशि कमीशन के लिए अलग की गई।
रकम पहुंचाने से पहले ईडी की कार्रवाई में यह राशि बरामद हुई। जांच एजेंसी ने इसे मैनपावर भुगतान से जुड़ी कथित कमीशन वसूली के नेटवर्क का हिस्सा बताया है।
शराब घोटाला कांग्रेस शासन का आरोपी अधिकारी वर्तमान में आबकारी विभाग का सर्वेसर्वा निर्णयकर्ता बना जबकि चालान पेश होते ही नौकरी से सस्पेंड किया जाना था विभागीय कार्रवाई शुरु होकर जांच के उपरांत नौकरी से निकाला भी जा सकता है। शराब घोटाले में सभी आरोपी जेल गए या जमानत पर बाहर आए लेकिन आरोपी क्रमांक 20 घोटाले का बादशाह आशीष श्रीवास्तव कि न गिर तारी हुई न ही जमानत लिया और फिलहाल किसकी ताकत से विभाग का प्रमुख बनकर सारे निर्णय लेकर भारतीय जनता पार्टी की सरकार को बदनाम कर रहा है, जबकि पिछली कांग्रेस सरकार के शराब घोटाले को उजागर कर भारतीय जनता पार्टी ने छत्तीसगढ़ में सरकार बनाई थी और शराब घोटाले की सभी तरह की जांच आगे बढ़कर सभी आरोपियों की गिर तारी हुई थी।