डेयरी एनालॉग उत्पादों पर प्रतिबंध, नकली पनीर-क्रीम-मक्खन की बिक्री पर तत्काल रोक
छग
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने आम उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा और खाद्य गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बड़ा कदम उठाते हुए राज्य में अमानक डेयरी उत्पादों पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। अब ऐसे सभी "डेयरी एनालॉग" या गैर-दुग्ध उत्पादों के निर्माण, प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर रोक रहेगी, जो देखने, पैकेजिंग या लेबलिंग में असली दूध से बने उत्पादों जैसे प्रतीत होते हैं और उपभोक्ताओं को भ्रमित करते हैं। इस संबंध में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने राजपत्र में अधिसूचना जारी कर दी है। राज्य सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 18 एवं धारा 30 के तहत की गई है। सरकार का कहना है कि बाजार में ऐसे कई उत्पाद बेचे जा रहे थे जिनमें दूध की जगह वनस्पति वसा, वनस्पति तेल या अन्य गैर-दुग्ध पदार्थों का उपयोग किया जा रहा था, लेकिन उन्हें इस प्रकार प्रस्तुत किया जाता था कि उपभोक्ता उन्हें वास्तविक डेयरी उत्पाद समझकर खरीद लेते थे। इससे न केवल उपभोक्ताओं के साथ धोखा होता है, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बढ़ जाते हैं।
प्रतिबंध के दायरे में विशेष रूप से ऐसे पनीर, क्रीम और मक्खन जैसे उत्पाद शामिल किए गए हैं, जो निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं हैं और जिनमें दूध के स्थान पर अन्य कृत्रिम या गैर-दुग्ध सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी उत्पाद की पैकेजिंग, लेबलिंग, विज्ञापन या प्रस्तुति उपभोक्ताओं को यह विश्वास दिलाती है कि वह शुद्ध दुग्ध उत्पाद है, जबकि वास्तव में ऐसा नहीं है, तो उस उत्पाद पर यह प्रतिबंध लागू होगा। हालांकि सरकार ने कुछ मानकीकृत खाद्य उत्पादों को इस आदेश से बाहर रखा है। इनमें फ्रोजन डेजर्ट, प्रोसेस्ड चीज़ और मिक्स्ड फैट स्प्रेड जैसे उत्पाद शामिल हैं, जिनके लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा अलग-अलग मानक निर्धारित किए गए हैं। ऐसे उत्पादों का निर्माण और बिक्री निर्धारित नियमों के अनुरूप जारी रह सकेगी।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह प्रतिबंध राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से प्रभावी हो गया है और यह एक वर्ष तक या फिर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा इस विषय पर अंतिम नियम जारी होने तक लागू रहेगा। यदि एफएसएसएआई इससे पहले नए नियम जारी करता है तो उसी के अनुरूप आगे की व्यवस्था लागू होगी। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग तथा खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने राज्य के सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाए। साथ ही डेयरी उत्पादों का निर्माण, भंडारण, परिवहन और बिक्री करने वाले सभी खाद्य कारोबार संचालकों को भी नियमों का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि गुरुवार को प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की थी कि छत्तीसगढ़ में डेयरी एनालॉग पनीर की बिक्री की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा था कि उपभोक्ताओं को शुद्ध और सुरक्षित खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है तथा मिलावटी या भ्रामक डेयरी उत्पादों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मंत्री की घोषणा के महज एक दिन बाद सरकार ने राजपत्र अधिसूचना जारी कर प्रतिबंध को औपचारिक रूप से लागू कर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से बाजार में बिक रहे नकली अथवा कम गुणवत्ता वाले डेयरी उत्पादों पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा। साथ ही उपभोक्ताओं को असली और मानक गुणवत्ता वाले दूध उत्पाद उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। डेयरी उद्योग से जुड़े कारोबारियों को भी अब यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके उत्पाद निर्धारित मानकों के अनुरूप हों और उनकी लेबलिंग पूरी तरह पारदर्शी हो। सरकार का यह कदम खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।