Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने प्रयास आवासीय विद्यालय अंबिकापुर में कक्षा 9वीं के प्रवेश से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस एके प्रसाद की सिंगल बेंच ने विशेष परिस्थितियों को देखते हुए राउंडिंग ऑफ का नियम लागू करते हुए छात्र के कक्षा 8वीं में प्राप्त 59.7 प्रतिशत अंकों को 60 प्रतिशत मानने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को 10 दिनों के भीतर छात्र को प्रवेश देने के निर्देश दिए हैं। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि यह राहत केवल इस विशेष मामले की परिस्थितियों को देखते हुए दी गई है और इसे JEE, NEET या CLAT जैसी उच्च प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए नजीर नहीं माना जाएगा।
उत्तर छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के बतौली निवासी 14 वर्षीय छात्र विधाता गुप्ता ने प्रवेश नहीं मिलने पर हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। छात्र ने सत्र 2026-27 के लिए प्रयास आवासीय विद्यालय अंबिकापुर में कक्षा 9वीं में प्रवेश के लिए आवेदन किया था। प्रवेश नियमों के अनुसार आवेदक का कक्षा 8वीं में प्रथम श्रेणी यानी न्यूनतम 60 प्रतिशत अंक या समकक्ष ग्रेड के साथ उत्तीर्ण होना जरूरी था। विधाता ने CBSE बोर्ड से कक्षा 8वीं की परीक्षा पास की थी। उसे C1 ग्रेड के साथ कुल 59.7 प्रतिशत अंक मिले थे। सीबीएसई की संबंधित ग्रेडिंग व्यवस्था में C1 ग्रेड 51 से 60 प्रतिशत के बीच बताया गया।
छात्र का आवेदन स्वीकार होने के बाद उसे प्रयास आवासीय विद्यालय की राज्य स्तरीय प्रवेश परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी गई। इस परीक्षा में उसने शानदार प्रदर्शन करते हुए 100 में से 82 अंक प्राप्त किए और मेरिट सूची में स्थान बनाया। इसके बाद 23 जुलाई 2026 को छात्र पहली काउंसिलिंग में शामिल हुआ। याचिका के अनुसार वहां स्कूल प्रशासन ने उसे मौखिक रूप से प्रवेश के लिए अपात्र बताते हुए कहा कि कक्षा 8वीं में उसके अंक न्यूनतम 60 प्रतिशत के बजाय 59.7 प्रतिशत हैं। यानी केवल 0.3 प्रतिशत अंक कम होने के कारण उसे प्रवेश नहीं दिया गया।
इस फैसले को चुनौती देते हुए छात्र ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि विभाग ने उसका आवेदन स्वीकार किया, उसे प्रवेश परीक्षा में बैठने की अनुमति दी और उसने मेरिट में भी जगह बनाई। इसके बाद महज 0.3 प्रतिशत अंकों के अंतर के आधार पर प्रवेश से वंचित करना उचित नहीं है। इसे संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के विपरीत भी बताया गया। राज्य शासन ने कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए कहा कि प्रवेश के लिए न्यूनतम पात्रता 60 प्रतिशत निर्धारित थी। शासन की ओर से सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि निर्धारित पात्रता शर्तों में छूट या राउंडिंग ऑफ की अनुमति नहीं दी जा सकती। चूंकि छात्र के अंक 59.7 प्रतिशत थे, इसलिए वह निर्धारित अर्हता पूरी नहीं करता था।
दूसरी तरफ याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि छात्र ने प्रवेश परीक्षा में 82 प्रतिशत अंक हासिल कर अपनी योग्यता साबित कर दी है। कोर्ट के सामने यह तर्क भी रखा गया कि सामान्य राउंडिंग ऑफ सिद्धांत के अनुसार दशमलव का भाग 0.5 या उससे अधिक होने पर संख्या को अगले पूर्ण अंक तक माना जाता है। छात्र के 59.7 प्रतिशत में दशमलव भाग 0.7 होने के कारण इसे 60 प्रतिशत माना जाना चाहिए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने मामले की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए छात्र के पक्ष में फैसला दिया। कोर्ट ने माना कि बड़ी प्रतियोगी भर्ती परीक्षाओं और उच्च तकनीकी चयन प्रक्रियाओं के मामले अलग हो सकते हैं, लेकिन एक नाबालिग छात्र के स्कूल प्रवेश के मामले में व्यावहारिक और न्यायसंगत दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।
अदालत ने इस तथ्य को भी महत्वपूर्ण माना कि छात्र ने राज्य स्तरीय प्रवेश परीक्षा में 100 में से 82 अंक हासिल किए हैं। ऐसे में कक्षा 8वीं में केवल 0.3 प्रतिशत की कमी के आधार पर उसे प्रवेश से वंचित करना उचित नहीं माना गया। हाई कोर्ट ने 59.7 प्रतिशत को राउंड ऑफ करते हुए 60 प्रतिशत मानने और छात्र को 10 दिनों के भीतर प्रयास आवासीय विद्यालय अंबिकापुर में प्रवेश देने का निर्देश दिया। साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह फैसला मामले की विशेष परिस्थितियों पर आधारित है और इसका उपयोग JEE, NEET या CLAT जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में राउंडिंग ऑफ का दावा करने के लिए नजीर के रूप में नहीं किया जा सकेगा।
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