CG BREAKING: नक्सलियों को विस्फोटक सप्लाई करने वाले पति-पत्नी समेत 3 दोषी

छग

Update: 2026-08-10 15:10 GMT
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में नक्सलियों को विस्फोटक सामग्री पहुंचाने के मामले में विशेष एनआईए कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मामले में पति-पत्नी समेत तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए अलग-अलग धाराओं के तहत सश्रम कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है। दोषियों में रवि मरकाम, उसकी पत्नी चमेली बाई और कोसरू वड्डे शामिल हैं। इस मामले की जांच राज्य अन्वेषण अभिकरण यानी SIA रायपुर द्वारा की गई थी।
मामला 19 मार्च 2024 का है। उस समय नारायणपुर पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि ग्राम तारागांव में कुछ लोग जड़ी-बूटी बेचने के नाम पर विस्फोटक सामग्री से भरी गठरियां लेकर पहुंचे हैं। सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर संदिग्धों की घेराबंदी की। जांच के दौरान गठरियों की तलाशी ली गई, जिसमें पोटassium नाइट्रेट, कार्डेक्स वायर और डेटोनेटर सहित अन्य विस्फोटक सामग्री बरामद की गई।
पुलिस ने मौके से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था। उनकी पहचान रवि मरकाम उम्र 45 वर्ष और उसकी पत्नी चमेली बाई उम्र 35 वर्ष, दोनों निवासी मध्यप्रदेश के रूप में हुई। पूछताछ के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि बरामद विस्फोटक सामग्री को नक्सलियों तक पहुंचाने की तैयारी थी। जांच आगे बढ़ने पर मामले में कोसरू वड्डे उम्र 39 वर्ष, निवासी ओरछा की भूमिका भी सामने आई। पुलिस के अनुसार तीनों आरोपियों की भूमिका नक्सलियों को विस्फोटक सामग्री उपलब्ध कराने की साजिश में सामने आई थी। आरोपियों के खिलाफ नारायणपुर थाने में अपराध दर्ज किया गया। इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए आगे की जांच राज्य अन्वेषण अभिकरण रायपुर यानी SIA को सौंप दी गई।
SIA ने मामले की विस्तृत जांच करते हुए आरोपियों से पूछताछ की और बरामद विस्फोटक सामग्री, उनके संपर्कों तथा नक्सली नेटवर्क से जुड़े तथ्यों को जांच का हिस्सा बनाया। जांच के दौरान सामने आया कि जब्त की गई विस्फोटक सामग्री को पूर्व बस्तर डिवीजन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी माओवादी के सप्लायर टीम और अन्य नक्सलियों तक पहुंचाया जाना था। हालांकि, इससे पहले ही नारायणपुर पुलिस ने आरोपियों को पकड़ लिया। जांच पूरी होने के बाद SIA ने नारायणपुर स्थित विशेष न्यायालय में तीनों आरोपियों के खिलाफ अभियोग पत्र पेश किया। न्यायालय में पेश किए गए साक्ष्यों और मामले से जुड़े तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने तीनों को दोषी माना। इसके बाद आरोपियों को विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और विधि विरुद्ध क्रियाकलाप निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत सजा सुनाई गई।
कोर्ट के फैसले के अनुसार विस्फोटक पदार्थ अधिनियम 1908 की धारा 4 के तहत 7 वर्ष का सश्रम कारावास और 1000 रुपये जुर्माना, जबकि धारा 5 के तहत भी 7 वर्ष का सश्रम कारावास और 1000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। इसके अलावा विधि विरुद्ध क्रियाकलाप निवारण अधिनियम 1967 की धारा 10(1) के तहत 2 वर्ष का सश्रम कारावास और 500 रुपये जुर्माना, धारा 13(1) के तहत 5 वर्ष का सश्रम कारावास और 500 रुपये जुर्माना लगाया गया। वहीं धारा 38(2) और 39(2) के तहत भी प्रत्येक में 5 वर्ष के सश्रम कारावास और 500-500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई।
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