CG CRIME: फर्जी एरियर्स बिल घोटाले में नया खुलासा, रिश्वत मांगने का आरोप
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Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बेलतरा के बहुचर्चित 77 लाख 71 हजार 932 रुपए के कथित एरियर्स बिल घोटाले में नया मोड़ सामने आया है। मामले में विभागीय जांच का सामना कर रहे लिपिक कैलाश चंद्र सूर्यवंशी द्वारा कथित तौर पर आत्महत्या की चेतावनी दिए जाने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि लिपिक ने सीएम हेल्पलाइन में शिकायत कर निलंबन अवधि का निराकरण और लंबित राशि के भुगतान की मांग की है। इस घटनाक्रम के बाद एक बार फिर शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और वर्षों पुराने वित्तीय अनियमितता के मामले की जांच चर्चा में आ गई है।
11 महीने में 22 फर्जी बिलों से गबन का आरोप
जानकारी के अनुसार, बेलतरा स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में वर्ष 2018 से 2019 के बीच करीब 11 महीने 20 दिनों की अवधि में वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया था। आरोप है कि तत्कालीन नियमित प्राचार्य नरेंद्र राठौर के अवकाश पर रहने के दौरान प्रभारी प्राचार्य पीएल मरावी, लिपिक कैलाश चंद्र सूर्यवंशी, निर्मला सिदार और व्याख्याता पुन्नीलाल कुर्रे की कथित मिलीभगत से एरियर्स के 22 फर्जी बिल तैयार किए गए। इन बिलों के माध्यम से सरकारी खजाने से 77 लाख 71 हजार 932 रुपए निकाले जाने और राशि पुन्नीलाल कुर्रे के बैंक खाते में स्थानांतरित किए जाने का आरोप है।
मामला सामने आने के बाद दर्ज हुई थी FIR
वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने कार्रवाई शुरू की थी। उपलब्ध विवरण के अनुसार, पुन्नीलाल कुर्रे को निलंबित किया गया और रतनपुर थाने में संबंधित लोगों के खिलाफ तत्कालीन भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 420 और 34 के तहत प्रकरण दर्ज कराया गया था। वर्ष 2022 में प्रकाशित एक रिपोर्ट में भी बेलतरा विद्यालय के लिपिक कैलाश चंद्र सूर्यवंशी के निलंबन और व्याख्याता पीएल कुर्रे के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा का उल्लेख मिलता है।
सेवानिवृत्त हो गए थे व्याख्याता पुन्नीलाल कुर्रे
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस मामले से जुड़े तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य पीएल मरावी का कोरोना काल में निधन हो गया था। वहीं गबन के आरोपों का सामना कर रहे व्याख्याता पुन्नीलाल कुर्रे अपनी सेवा अवधि पूरी कर सेवानिवृत्त हो गए थे। बताया जा रहा है कि सेवानिवृत्ति के बाद एक सड़क दुर्घटना में उनका भी निधन हो गया। हालांकि, उनके खिलाफ आपराधिक मामले की अंतिम न्यायिक स्थिति की पुष्टि नहीं हो सकी है।
बहाली के बाद लिपिक के खिलाफ विभागीय जांच
मामले में नामजद लिपिक कैलाश चंद्र सूर्यवंशी को बाद में विभाग ने सेवा में बहाल कर दिया। इसके साथ ही उनके खिलाफ अलग से विभागीय जांच जारी रखने का निर्णय लिया गया। जानकारी के अनुसार, बहाली आदेश में उल्लेख है कि निलंबन अवधि का निराकरण विभागीय जांच पूरी होने के बाद किया जाएगा।
50 हजार रुपए रिश्वत मांगने का भी आरोप
इस बीच लिपिक कैलाश चंद्र सूर्यवंशी ने कथित तौर पर विभागीय कर्मचारी हेमंत शर्मा पर निलंबन अवधि का वेतन निकालने के बदले 50 हजार रुपए की रिश्वत मांगने का आरोप लगाया है। बताया जा रहा है कि इस संबंध में कलेक्टर और कमिश्नर कार्यालय में भी शिकायत की गई है। हालांकि, रिश्वत मांगने के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित कर्मचारी और विभाग का आधिकारिक पक्ष भी सामने नहीं आया है।
सीएम हेल्पलाइन में शिकायत से नया विवाद
सूत्रों के अनुसार, विभागीय जांच अंतिम चरण में बताई जा रही है। इसी बीच कैलाश चंद्र सूर्यवंशी द्वारा सीएम हेल्पलाइन में शिकायत कर एक सप्ताह के भीतर लंबित राशि का भुगतान और निलंबन अवधि का निराकरण करने की मांग किए जाने की जानकारी सामने आई है। शिकायत में कथित तौर पर मांग पूरी नहीं होने पर कलेक्टर कार्यालय परिसर में आत्महत्या करने की चेतावनी दी गई है। इस चेतावनी को गंभीरता से लेते हुए संबंधित कर्मचारी की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी प्रशासन के लिए आवश्यक है।
जांच की निष्पक्षता और कार्रवाई पर सवाल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि 77 लाख रुपए से अधिक की कथित वित्तीय अनियमितता के मामले में जांच और राशि की वसूली की वर्तमान स्थिति क्या है। विभागीय जांच के निष्कर्ष, आरोपियों की कानूनी स्थिति और निलंबन अवधि के भुगतान संबंधी विवाद पर स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने आना आवश्यक है। फिलहाल नए आरोपों और शिकायतों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। ऐसे में प्रशासनिक जांच और संबंधित पक्षों के जवाब के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।