Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ में मानसून सक्रिय होने के साथ ही खेती-किसानी का काम तेजी से शुरू हो गया है। प्रदेश के किसान खरीफ फसलों की बुवाई और अन्य कृषि कार्यों में जुटे हुए हैं। इस समय किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण जरूरत उर्वरक यानी खाद की है। खाद की उपलब्धता को लेकर किसानों को किसी भी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में किसानों से जुड़े इस अहम मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि प्रदेश में खरीफ और रबी मौसम के दौरान किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराने के लिए मंत्री मंडलीय उप समिति का गठन किया जाएगा। इस समिति की अध्यक्षता उप मुख्यमंत्री अरुण साव करेंगे।
राज्य सरकार ने यह फैसला किसानों की जरूरतों और खाद आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से लिया है। समिति का मुख्य काम प्रदेश में उर्वरकों की उपलब्धता, वितरण व्यवस्था और प्रबंधन की लगातार निगरानी करना होगा। इसके अलावा समिति किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक सुझाव और अनुशंसाएं राज्य शासन को देगी। सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, मंत्री मंडलीय उप समिति खरीफ और रबी दोनों कृषि मौसमों में उर्वरकों की समयबद्ध एवं सुचारू उपलब्धता सुनिश्चित करने का काम करेगी। समिति खाद की मांग, आपूर्ति, भंडारण व्यवस्था और वितरण प्रणाली से जुड़े सभी पहलुओं की समीक्षा करेगी।
उप समिति को आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विभागों के अधिकारियों, कृषि विशेषज्ञों और अन्य संस्थाओं के प्रतिनिधियों को बैठक में आमंत्रित करने का अधिकार भी दिया गया है। इसके माध्यम से खाद से जुड़े जमीनी हालात की जानकारी जुटाई जाएगी और किसानों को होने वाली समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे। इस समिति में कृषि विकास एवं किसान कल्याण विभाग के कैबिनेट मंत्री, सहकारिता विभाग के कैबिनेट मंत्री और वित्त विभाग के कैबिनेट मंत्री को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। वहीं कृषि उत्पादन आयुक्त को समिति का संयोजक बनाया गया है। समिति सभी संबंधित विभागों के साथ समन्वय बनाकर खाद व्यवस्था को मजबूत करने का काम करेगी।
दरअसल, विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान खाद की उपलब्धता का मुद्दा जोर-शोर से उठा था। कई विधायकों ने सदन में किसानों को समय पर खाद नहीं मिलने की शिकायत की थी। विधायकों ने बताया था कि कई क्षेत्रों में किसानों को उर्वरक प्राप्त करने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। विधानसभा में खाद भंडारण की कमी को लेकर भी चिंता जताई गई थी। विशेष रूप से मैदानी इलाकों में भंडारण क्षमता कम होने के कारण संभावित खाद संकट की बात सामने आई थी। विधायकों ने सरकार से मांग की थी कि किसानों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए समय रहते खाद की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
राज्य सरकार ने विधायकों की शिकायतों और किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए यह निर्णय लिया है। मंत्री मंडलीय उप समिति अब खाद की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था की नियमित समीक्षा करेगी। समिति के माध्यम से यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा कि किसानों को खेती के महत्वपूर्ण समय में उर्वरक की कमी का सामना न करना पड़े। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, खरीफ फसलों के लिए मानसून के शुरुआती दौर में खाद की उपलब्धता बेहद जरूरी होती है। समय पर उर्वरक मिलने से फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। ऐसे में सरकार का यह कदम किसानों के लिए राहत देने वाला माना जा रहा है।
छत्तीसगढ़ एक कृषि प्रधान राज्य है और यहां बड़ी संख्या में किसान खेती पर निर्भर हैं। धान सहित कई प्रमुख फसलों के उत्पादन में उर्वरकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए सरकार का ध्यान खाद की पर्याप्त उपलब्धता और बेहतर वितरण व्यवस्था पर है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार का कहना है कि किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। खाद, बीज और अन्य कृषि संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। मंत्री मंडलीय उप समिति के गठन के बाद अब खाद आपूर्ति व्यवस्था की निगरानी और मजबूत होने की उम्मीद है। आने वाले दिनों में यह समिति प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में खाद की स्थिति की समीक्षा करेगी और जरूरत के अनुसार सरकार को सुझाव देगी। इससे किसानों को समय पर खाद मिलने और कृषि कार्यों में तेजी आने की संभावना है।