कोरबा में 79 लाख के घोटाले में आरोपी गौरव शुक्ला के खिलाफ अभियोग पत्र पेश
छग
Raipur. रायपुर। राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) एवं एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB), रायपुर ने गरीबों की आवास योजना राशि गबन से जुड़े एक बड़े मामले में आरोपी गौरव शुक्ला के खिलाफ विशेष न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया है। यह मामला अपराध क्रमांक 20/2018 से संबंधित है, जिसमें कुल लगभग 3000 पन्नों का विस्तृत चालान न्यायालय कोरबा में पेश किया गया। जानकारी के अनुसार, आरोपी गौरव शुक्ला, जो बैंक ऑफ इंडिया की कोरबा शाखा में कियोस्क संचालक के रूप में कार्यरत था, पर इंदिरा आवास योजना के तहत हितग्राहियों को मिलने वाली सरकारी सहायता राशि के गबन का गंभीर आरोप है। यह राशि गरीब और जरूरतमंद परिवारों के आवास निर्माण के लिए दी जाती थी, जिसे आरोपी द्वारा गलत तरीके से अपने खातों में स्थानांतरित कर लिया गया।
जांच में सामने आया है कि आरोपी ने बैंक कर्मचारियों की स्टाफ आईडी का दुरुपयोग कर निष्क्रिय (डॉर्मेंट) खातों को सक्रिय कराया। इसके बाद उसने हितग्राहियों के आधार कार्ड को अपने, अपने पिता, माता, पत्नी और पुत्र के आधार नंबरों से लिंक कर दिया। इस प्रक्रिया के माध्यम से AEPS (Aadhaar Enabled Payment System) का दुरुपयोग करते हुए हितग्राहियों की राशि आरोपी के नियंत्रण वाले खातों में ट्रांसफर होती रही। विवेचना में यह भी पाया गया कि वर्ष 2017 में Finacle सॉफ्टवेयर सिस्टम की तकनीकी खामियों का भी आरोपी ने फायदा उठाया। उस समय सिस्टम में बिना आधार लिंकिंग सत्यापन के लेन-देन संभव था और ऑटो लॉगआउट फीचर भी उपलब्ध नहीं था। इन्हीं खामियों का उपयोग करते हुए आरोपी ने लंबे समय से निष्क्रिय पड़े खातों को सक्रिय किया और अवैध तरीके से राशि का लेन-देन किया।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी ने कुल 9 स्टाफ यूजर आईडी का उपयोग करते हुए 426 खातों में 620 से अधिक प्रविष्टियां कीं। इनमें से कई लेन-देन बिना आधार सत्यापन के किए गए, जबकि कुछ प्रविष्टियां कियोस्क ऑपरेटर आईडी के माध्यम से भी दर्ज की गईं। यह पूरा कार्य योजनाबद्ध तरीके से किया गया, जिसमें बैंकिंग प्रणाली के तकनीकी और प्रशासनिक कमजोरियों का फायदा उठाया गया। जांच एजेंसियों ने पाया कि वर्ष 2010-11 में इंदिरा आवास योजना के तहत कोरबा जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए जारी की गई राशि को वर्ष 2017 में गलत तरीके से ट्रांसफर किया गया। आरोपी ने ग्रामीण और कमजोर आर्थिक स्थिति वाले हितग्राहियों की जानकारी का दुरुपयोग करते हुए उनके खातों से पैसे निकाल लिए।
इस पूरे प्रकरण में कुल ₹79 लाख रुपये के गबन की पुष्टि हुई है। यह राशि गरीबों के आवास निर्माण के लिए आवंटित थी, जिसे आरोपी द्वारा निजी उपयोग के लिए हड़प लिया गया। इस घटना ने न केवल सरकारी योजना की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर चिंता उत्पन्न की है। EOW और ACB की संयुक्त जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि आरोपी ने बैंकिंग सिस्टम में लंबे समय तक काम करने के दौरान अपने तकनीकी ज्ञान का दुरुपयोग किया। उसने स्टाफ आईडी और सिस्टम एक्सेस का गलत उपयोग कर पूरे घोटाले को अंजाम दिया।
जांच पूरी होने के बाद पर्याप्त साक्ष्य और डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), कोरबा न्यायालय में लगभग 3000 पृष्ठों का विस्तृत अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया है। इसमें बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल ट्रांजेक्शन डाटा और आधार लिंकिंग संबंधी दस्तावेज शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, यह मामला सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और डिजिटल सिस्टम की सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया है। फिलहाल न्यायालय में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है और आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की संभावना है।