बिलासपुर पुलिस की बाल संरक्षण बैठक में बच्चों की सुरक्षा और पुनर्वास पर मंथन

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Update: 2026-07-22 13:52 GMT
Bilaspur. बिलासपुर। बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण, पुनर्वास और उनके सकारात्मक विकास को लेकर बिलासपुर पुलिस ने महत्वपूर्ण पहल करते हुए जिला स्तरीय बाल संरक्षण हितधारकों की तृतीय अभिसरण बैठक का आयोजन किया। यह बैठक पुलिस ग्राउंड स्थित बिलासगुड़ी हॉल में आयोजित की गई, जिसमें जिले के विभिन्न विभागों, संस्थाओं और संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य बच्चों से जुड़े मामलों में सभी हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और बाल संरक्षण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना था। बिलासपुर पुलिस द्वारा आयोजित इस बैठक का आयोजन यूनिसेफ, काउंसेल टू सिक्योर जस्टिस (CSJ) और बिलासपुर पुलिस के संयुक्त सहयोग से किया गया। कार्यक्रम में बच्चों के अधिकारों, उनकी सुरक्षा, पुनर्वास व्यवस्था और भविष्य को बेहतर बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा की गई। बैठक में शामिल सभी हितधारकों ने बच्चों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए एक मजबूत और संवेदनशील बाल संरक्षण तंत्र विकसित करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
बैठक की अध्यक्षता बिलासपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने की। इस अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) के सचिव अनिल कुमार चौहान और काउंसेल टू सिक्योर जस्टिस (CSJ) की वरिष्ठ निदेशक उर्वशी तिलक विशेष रूप से उपस्थित रहीं। इसके अलावा बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न विभागों और संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी बैठक में भाग लिया। बैठक के दौरान कानून से संघर्ष की स्थिति में आए बच्चों के लिए संचालित "दिशांत – नव नभ की ओर" कार्यक्रम की उपलब्धियों और प्रगति की जानकारी साझा की गई। इस कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों को सकारात्मक दिशा देने, उनके पुनर्वास और सामाजिक मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयासों पर चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि ऐसे बच्चों के लिए केवल कानूनी प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि मानसिक, सामाजिक और शैक्षणिक सहयोग भी बेहद जरूरी है।
बैठक में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और परामर्श सेवाओं को मजबूत करने के मुद्दे पर विशेष चर्चा हुई। अधिकारियों और विशेषज्ञों ने कहा कि कई बार बच्चे तनाव, हिंसा, पारिवारिक समस्याओं या अन्य परिस्थितियों के कारण मानसिक दबाव का सामना करते हैं। ऐसे बच्चों को समय पर काउंसलिंग और उचित सहयोग उपलब्ध कराना आवश्यक है, ताकि वे बेहतर भविष्य की ओर आगे बढ़ सकें। इसके अलावा बच्चों के लिए नशामुक्ति सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी चर्चा की गई। बैठक में कहा गया कि नशे की समस्या बच्चों और किशोरों के जीवन को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। इसलिए नशे से प्रभावित बच्चों के लिए उपचार, परामर्श और पुनर्वास की बेहतर व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता है।
बैठक में विद्यालय से बाहर रहने वाले बच्चों के लिए रात्रिकालीन विद्यालय जैसी पहल शुरू करने के सुझाव पर भी विचार किया गया। अधिकारियों ने कहा कि शिक्षा से वंचित बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना जरूरी है। इसके लिए सभी संबंधित विभागों को मिलकर काम करने की आवश्यकता है। अपने संबोधन में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने कहा कि बच्चों के समग्र संरक्षण और पुनर्वास के लिए सभी विभागों और संस्थाओं के बीच लगातार सहयोग और समन्वय जरूरी है। उन्होंने कहा कि बाल संरक्षण केवल किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके लिए पुलिस, प्रशासन, शिक्षा विभाग, समाज कल्याण विभाग, गैर सरकारी संगठन और समाज के सभी वर्गों को मिलकर काम करना होगा।
एसएसपी ने सभी हितधारकों से अपील की कि वे एक संवेदनशील, सशक्त और बाल-अनुकूल संरक्षण व्यवस्था तैयार करने की दिशा में लगातार प्रयास करें। उन्होंने कहा कि बच्चों को सुरक्षित वातावरण देना और उन्हें बेहतर अवसर उपलब्ध कराना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। बैठक में किशोर न्याय बोर्ड (JJB) और बाल कल्याण समिति (CWC) के सदस्य एवं प्रतिनिधि, महिला एवं बाल विकास विभाग, समाज कल्याण विभाग, शिक्षा विभाग और श्रम विभाग के अधिकारी शामिल हुए। इसके अलावा सेंदरी मानसिक चिकित्सालय के प्रतिनिधि, विभिन्न गैर सरकारी संगठनों के सदस्य, एनटीपीसी और एसईसीएल के सीएसआर प्रतिनिधि तथा हस्तक्षेप करने वाले पुलिस थानों के चाइल्ड वेलफेयर पुलिस अधिकारी (CWPOs) भी उपस्थित रहे।
बैठक में सभी विभागों और संस्थाओं ने बच्चों की सुरक्षा, पुनर्वास और सकारात्मक विकास के लिए आपसी सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई। अधिकारियों ने कहा कि नियमित संवाद और बेहतर तालमेल से बाल संरक्षण से जुड़े मामलों में प्रभावी परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। बिलासपुर पुलिस का कहना है कि जिले में बच्चों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस तरह की बैठकें लगातार आयोजित की जाएंगी। पुलिस और संबंधित विभागों का प्रयास है कि बच्चों को सुरक्षित वातावरण मिले, उन्हें उनके अधिकारों की जानकारी हो और किसी भी परिस्थिति में उन्हें उचित सहायता एवं संरक्षण उपलब्ध कराया जा सके।
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