Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश की कथित अवहेलना कर एक चिकित्सक को रिलीव करने का मामला सामने आया है। मेडिकल ऑफिसर डॉ. पीएम सिंह के स्थानांतरण से जुड़े विवाद में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. मनोज दानी की कार्रवाई पर सवाल उठे हैं। याचिकाकर्ता का आरोप है कि हाईकोर्ट द्वारा किसी भी प्रकार की प्रतिकूल कार्रवाई नहीं करने के निर्देश दिए जाने के बावजूद उन्हें बिलासपुर के लिए कार्यमुक्त कर दिया गया। मामला दोबारा न्यायालय पहुंचने और अवमानना संबंधी कार्यवाही की बात सामने आने के बाद राज्य स्थानांतरण समिति ने चिकित्सक के स्थानांतरण को लेकर नया आदेश जारी कर दिया। इसके तहत डॉक्टर को सुपेला स्थित लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल में पदस्थ करने का आदेश दिया गया है।
हाईकोर्ट के निर्देश के बावजूद डॉक्टर को किया रिलीव
जानकारी के अनुसार, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज दानी ने 24 सितंबर को मेडिकल ऑफिसर डॉ. पीएम सिंह को स्थानांतरण आदेश जारी होने के लगभग 15 महीने बाद बिलासपुर के लिए रिलीव कर दिया था। इसके बाद 16 अक्टूबर को राज्य शासन ने नया आदेश जारी किया, जिसमें चिकित्सक का स्थानांतरण बिलासपुर से लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल, सुपेला कर दिया गया। इस तरह महज 22 दिनों के भीतर चिकित्सक की पदस्थापना को लेकर दो अलग-अलग आदेश जारी होने से विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे।
स्थानांतरण आदेश को हाईकोर्ट में दी थी चुनौती
मेडिकल ऑफिसर डॉ. पीएम सिंह ने अपने स्थानांतरण संबंधी आदेशों को चुनौती देते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में स्थानांतरण प्रक्रिया और संबंधित विभागीय आदेशों पर आपत्ति जताई गई थी। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य स्थानांतरण समिति को निर्देश दिया था कि चिकित्सक के स्थानांतरण के संबंध में विधिसम्मत नया आदेश जारी किया जाए। इसके लिए राज्य सरकार को दो सप्ताह का समय दिया गया था।
कोर्ट ने प्रतिकूल कार्रवाई नहीं करने के दिए थे निर्देश
याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य शासन को निर्धारित समयसीमा के भीतर नियमानुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया था। साथ ही कोर्ट ने आदेश में कहा था कि इस अवधि के दौरान याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई प्रतिकूल या दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। न्यायालय ने अपने आदेश में No coercive steps shall be taken का उल्लेख किया था। इसके बावजूद सीएमएचओ द्वारा चिकित्सक को बिलासपुर के लिए रिलीव किए जाने पर याचिकाकर्ता ने इसे न्यायालयीन आदेश की अवहेलना बताया।
सीएमएचओ के आदेश के खिलाफ दो याचिकाएं
डॉ. पीएम सिंह ने अपने अधिवक्ता सोमकांत वर्मा के माध्यम से हाईकोर्ट में दो याचिकाएं प्रस्तुत कीं। एक याचिका में सीएमएचओ द्वारा जारी रिलीविंग आदेश को निरस्त करने की मांग की गई। दूसरी याचिका में न्यायालय के पूर्व आदेश का पालन नहीं किए जाने का आरोप लगाते हुए सीएमएचओ के खिलाफ अवमानना संबंधी कार्यवाही की मांग की गई। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि जब हाईकोर्ट ने दो सप्ताह के भीतर नया आदेश जारी करने और तब तक प्रतिकूल कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया था, तो चिकित्सक को रिलीव करना उचित नहीं था।
अवमानना का मामला उठते ही सक्रिय हुई समिति
अधिवक्ता सोमकांत वर्मा के अनुसार, सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सीएमएचओ के साथ राज्य स्थानांतरण समिति के खिलाफ भी अवमानना याचिका दायर करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि समिति के सदस्यों के खिलाफ अवमानना याचिका दाखिल करने की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही स्थानांतरण समिति ने चिकित्सक के संबंध में नया आदेश जारी कर दिया। नए आदेश में डॉ. पीएम सिंह को बिलासपुर से सुपेला स्थित लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल स्थानांतरित किया गया।
तबादला विवाद से विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल
इस मामले ने स्वास्थ्य विभाग में स्थानांतरण आदेशों के क्रियान्वयन और न्यायालयीन निर्देशों के पालन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया कि हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद संबंधित अधिकारी ने रिलीविंग आदेश जारी किया। हालांकि, न्यायालय की अवमानना हुई है या नहीं, इसका अंतिम निर्धारण न्यायिक कार्यवाही के आधार पर ही होगा। फिलहाल राज्य स्थानांतरण समिति की ओर से नया आदेश जारी किए जाने के बाद चिकित्सक की पदस्थापना से जुड़ी स्थिति में बदलाव आया है। पूरे मामले में आगे की न्यायिक कार्यवाही पर नजर बनी हुई है।