Surguja. सरगुजा। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत स्वीकृत आवास का निर्माण अधूरा रहने और ढलाई के नाम पर कथित रूप से 80 हजार रुपये लिए जाने का मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत चिपरकाया निवासी विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा समुदाय की वृद्ध महिला केदली बाई ने एक आवास मित्र पर रकम लेने का आरोप लगाया है। महिला ने मामले की शिकायत थाना बतौली में की है। शिकायत सामने आने के बाद पुलिस और प्रशासनिक जांच की मांग तेज हो गई है। शिकायत के अनुसार, केदली बाई के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत आवास स्वीकृत हुआ था। आवास निर्माण के दौरान ढलाई का काम कराने के नाम पर कथित तौर पर उनसे 80 हजार रुपये लिए गए। वृद्धा का आरोप है कि रकम लेने के बावजूद ढलाई का काम नहीं कराया गया। जब उन्होंने अपनी रकम वापस मांगी तो राशि लौटाने के बजाय उनके साथ कथित रूप से दुर्व्यवहार किया गया और धमकी भी दी गई।

रकम देने के बाद भी अधूरा पड़ा आवास
वृद्धा के मुताबिक, प्रधानमंत्री आवास का निर्माण पूरा नहीं होने के कारण उन्हें रहने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बताया गया है कि केदली बाई अकेली रहती हैं। उनका कोई बेटा नहीं है, जबकि उनकी बेटियों की शादी हो चुकी है। ऐसे में अधूरा मकान उनके लिए बड़ी समस्या बन गया है। आवास पूरा नहीं होने के कारण उन्हें दूसरे लोगों के घर में आश्रय लेकर रहने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। वृद्धा का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर मिलने की उम्मीद से उन्हें राहत की उम्मीद थी, लेकिन निर्माण अधूरा रहने के कारण उनकी परेशानी कम होने के बजाय बढ़ गई है।

शिकायत के बाद जांच पर टिकी नजर
थाना बतौली में शिकायत दिए जाने के बाद अब पूरे मामले में पुलिस और प्रशासन की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। शिकायत में लगाए गए 80 हजार रुपये लेने के आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। पुलिस और प्रशासन को शिकायत में बताए गए तथ्यों के साथ-साथ आवास निर्माण से संबंधित दस्तावेजों और मौके की स्थिति की भी जांच करनी होगी। यह भी जांच का विषय है कि आवास निर्माण के लिए कितनी राशि स्वीकृत हुई, हितग्राही के खाते में कितनी राशि जारी की गई और निर्माण की प्रगति किस स्तर तक दर्ज की गई है। इसके अलावा निर्माण कार्य की निगरानी और सत्यापन किस स्तर पर किया गया, इसकी भी जांच आवश्यक होगी।

मौके की स्थिति का सत्यापन जरूरी
प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत स्वीकृत मकानों के निर्माण की प्रगति की निगरानी और सत्यापन की व्यवस्था होती है। ऐसे में केदली बाई के मामले में प्रशासनिक जांच के दौरान दस्तावेजों में दर्ज निर्माण की स्थिति और मौके पर वास्तविक स्थिति का मिलान किया जाना जरूरी है। जांच में यह भी देखा जाना चाहिए कि आवास निर्माण के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं। यदि किसी व्यक्ति ने हितग्राही से योजना के नाम पर अवैध रूप से राशि ली है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं यदि निर्माण कार्य में किसी अन्य स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।

वृद्धा को जल्द आवास मिलने की उम्मीद
मामले में कलेक्टर सरगुजा, जिला पंचायत सीईओ, एसडीएम और जनपद पंचायत प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ता पक्ष चाहता है कि मामले की गंभीरता से जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही प्रशासन से यह भी मांग की गई है कि वृद्ध महिला के अधूरे आवास को नियमानुसार जल्द पूरा कराया जाए, ताकि उन्हें किसी दूसरे के घर में आश्रय लेकर रहने के लिए मजबूर न होना पड़े। विशेष पिछड़ी जनजाति से आने वाली वृद्ध महिला के आवास से जुड़ा यह मामला सामने आने के बाद अब प्रशासन की कार्रवाई पर नजर है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि 80 हजार रुपये लेने के आरोप कितने सही हैं और आवास निर्माण अधूरा रहने के लिए कौन जिम्मेदार है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि शिकायत के बाद केदली बाई को उनका पक्का आवास आखिर कब तक मिल पाएगा।
Tags: