सहकारी समिति में खाद घोटाले का खुलासा, अध्यक्ष और प्रभारी प्रबंधक हटाए गए
छग
Surajpur. सूरजपुर। जिले के आदिम जाति सेवा सहकारी समिति जयनगर में खाद घोटाले का बड़ा मामला सामने आया है। समिति में खाद की कमी और अनियमितताओं की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद प्रशासन ने जांच शुरू की, जिसमें प्रारंभिक तौर पर करीब 20 लाख रुपये मूल्य की खाद कम पाए जाने की बात सामने आई है। मामले में कार्रवाई करते हुए समिति के अध्यक्ष और प्रभारी प्रबंधक को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया गया है। साथ ही नए प्रभारी को जिम्मेदारी सौंप दी गई है।
जानकारी के अनुसार, जयनगर सहकारी समिति में पिछले कुछ समय से खाद की किल्लत को लेकर किसानों द्वारा लगातार शिकायतें की जा रही थीं। किसानों का आरोप था कि समिति में पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए सूरजपुर कलेक्टर रेना जमील ने मामले की जांच के निर्देश दिए थे। कलेक्टर के निर्देश के बाद उप आयुक्त सहकारी समिति द्वारा मामले की जांच शुरू की गई। जांच के दौरान समिति के प्रभारी प्रबंधक को रिकॉर्ड और आवश्यक जानकारी के साथ उपस्थित होने के लिए बुलाया गया था, लेकिन प्रारंभिक चरण में प्रभारी प्रबंधक जांच में सहयोग करने के लिए उपस्थित नहीं हुए। इसके बाद प्रशासनिक मदद से उन्हें बुलाया गया और फिर समिति में उपलब्ध खाद के स्टॉक और दस्तावेजों की जांच की गई।
जांच के दौरान समिति में बड़ी मात्रा में खाद की कमी सामने आई है। उप आयुक्त सहकारी समिति के अनुसार, प्रारंभिक जांच में 1356 बोरी डीएपी खाद, 502 बोरी यूरिया और 137 बोरी एसएसपी खाद कम पाई गई है। इस कमी के कारण लगभग 20 लाख रुपये की खाद का अंतर सामने आया है। हालांकि अभी मामले की विस्तृत जांच जारी है और आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी। प्रशासन ने जांच प्रक्रिया को प्रभावित होने से रोकने के लिए तत्काल कदम उठाए हैं। उप आयुक्त ने बताया कि जांच में सहयोग नहीं करने और जांच प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए समिति के प्रभारी प्रबंधक और अध्यक्ष को पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह नए प्रभारी को समिति की जिम्मेदारी दी गई है, ताकि किसानों को खाद वितरण व्यवस्था में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
खाद की कमी का मामला सामने आने के बाद किसानों में भी नाराजगी देखी जा रही है। किसानों का कहना है कि कृषि सीजन के दौरान खाद की जरूरत सबसे अधिक होती है। ऐसे समय में यदि समिति स्तर पर अनियमितता होती है तो इसका सीधा असर खेती-किसानी पर पड़ता है। किसानों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। प्रशासन का कहना है कि सहकारी समितियों में खाद, बीज और अन्य कृषि सामग्री के वितरण में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है। किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से जिले की अन्य समितियों में भी व्यवस्थाओं की निगरानी बढ़ाई जा सकती है। फिलहाल जयनगर सहकारी समिति में खाद कमी मामले की जांच जारी है। अधिकारियों ने कहा है कि जांच में यदि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी या जिम्मेदारी तय होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने किसानों को भरोसा दिलाया है कि खाद वितरण व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।