IG राम गोपाल गर्ग ने दिए ‘एक गुंडा-एक जवान’ नीति लागू करने के निर्देश

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Update: 2026-07-21 18:51 GMT
Raigarh. रायगढ़। अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण और प्रिवेंटिव पुलिसिंग को मजबूत करने के उद्देश्य से बिलासपुर रेंज पुलिस ने उच्च स्तरीय ऑनलाइन कार्यशाला का आयोजन किया। पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज राम गोपाल गर्ग के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यशाला में गुंडा और निगरानी बदमाशों की सघन निगरानी, रिकॉर्ड अपडेट करने और सक्रिय अपराधियों पर सख्त कार्रवाई को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए। 21 जुलाई 2026 को पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय बिलासपुर रेंज के मीटिंग हॉल में आयोजित इस ऑनलाइन बैठक एवं कार्यशाला में रेंज के सभी जिलों के पुलिस अधिकारी, एसडीओपी और थाना प्रभारी शामिल हुए। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में कानून व्यवस्था को मजबूत करना और संपत्ति तथा शरीर संबंधी अपराधों पर प्रभावी रोक लगाना था।
कार्यशाला के दौरान सक्ती जिले के पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर ने ‘गुंडा एवं निगरानी बदमाश’ विषय पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए निवारक पुलिसिंग यानी प्रिवेंटिव पुलिसिंग और बेसिक पुलिसिंग को मजबूत करने पर जोर दिया। आईजी राम गोपाल गर्ग ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि अपराधियों पर लगातार निगरानी रखी जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि सक्रिय बदमाश दोबारा अपराध करने की स्थिति में न आएं। उन्होंने कहा कि पुलिस की प्राथमिकता अपराध होने के बाद कार्रवाई करने के साथ-साथ अपराध को पहले ही रोकना भी होना चाहिए।
कार्यशाला में अपराधियों के वर्गीकरण को लेकर विशेष दिशा-निर्देश दिए गए। पुलिस रेगुलेशन के पैरा 855 से 860 के तहत आदतन चोरों और लुटेरों को ए-क्लास निगरानी बदमाश तथा मारपीट, रंगदारी, भू-माफिया जैसे अपराधों में शामिल लोगों को बी-क्लास गुंडा बदमाश के रूप में वर्गीकृत करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि सभी बदमाशों का पूरा रिकॉर्ड अपडेट रखा जाए। इसमें उनकी फोटो, फिंगरप्रिंट, बैंक खाते और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल होंगी। गंभीर अपराधों में शामिल अपराधियों की गैंग हिस्ट्रीशीट तैयार करने के निर्देश भी दिए गए।
कार्यशाला में बदमाशों की सरप्राइज चेकिंग को लेकर भी एसओपी जारी की गई। पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि चेकिंग का समय निश्चित नहीं होना चाहिए, ताकि अपराधियों को पहले से इसकी जानकारी न मिल सके। जांच टीम को सुरक्षा के लिहाज से दो से तीन सदस्यों के समूह में रहने और बदमाशों की गतिविधियों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए। रिकॉर्ड संधारण को लेकर भी कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। रोजनामचा में पुलिसकर्मियों की रवानगी और वापसी की क्रॉस एंट्री अनिवार्य करने, रजिस्टर-7, परवाना फाइल और ए टू जेड अल्फाबेटिकल रजिस्टर को व्यवस्थित रखने कहा गया। इसके साथ ही बीट जवानों के लिए ए, बी नोटबुक और क्राइम से जुड़ी सी नोटबुक को फिर से प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया।
आईजी राम गोपाल गर्ग ने ‘एक गुंडा-एक जवान’ नीति लागू करने के निर्देश दिए। इसके तहत प्रत्येक बदमाश की निगरानी के लिए एक जिम्मेदार पुलिसकर्मी नियुक्त किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जमानत पर बाहर आने के बाद यदि कोई अपराधी दोबारा अपराध करता है तो बीएनएसएस की धारा 480 के तहत जमानत निरस्तीकरण की कार्रवाई तत्काल की जाए। इसके अलावा धारा 110 बीएनएसएस, 20 से 50 हजार रुपये के बाउंड ओवर, जिला बदर और PIT NDPS जैसे कठोर कानूनी प्रावधानों का उपयोग करने के निर्देश दिए गए। फरार आरोपियों को पकड़ने के लिए Natgrid और CDR तकनीक का इस्तेमाल कर ट्रैकिंग करने पर भी जोर दिया गया।
कार्यशाला में मानवाधिकारों के पालन को लेकर भी अधिकारियों को जागरूक किया गया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और निजता के अधिकार से जुड़े फैसलों का पालन करते हुए विमुक्त जनजातियों, पिछड़े वर्गों और नाबालिगों के खिलाफ किसी भी प्रकार की मनमानी कार्रवाई नहीं करने के निर्देश दिए गए। ग्राम अपराध नोटबुक (VCNB) और मूवमेंट ट्रैकिंग सिस्टम को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। गांव के प्रतिष्ठित नागरिकों, कोटवारों और पेंशनर्स का डेटा अपडेट रखने तथा मुसाफिर रजिस्टर और कोटवारों की रोस्टर हाजिरी अनिवार्य करने के निर्देश दिए गए।
आईजी ने यह भी कहा कि जो अपराधी लंबे समय से अपराध छोड़कर सामान्य जीवन जी रहे हैं, उन्हें निगरानी सूची से हटाने पर विचार किया जाए, ताकि पुलिस का पूरा ध्यान सक्रिय अपराधियों पर केंद्रित रह सके। कार्यशाला में यह भी निर्देश दिए गए कि राष्ट्रीय पर्वों और त्योहारों से पहले थानों में गुंडा और निगरानी बदमाशों की परेड कराई जाए तथा उन्हें कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए चेतावनी दी जाए। इस ऑनलाइन कार्यशाला में बिलासपुर रेंज के सभी जिलों से करीब 200 पुलिस अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए। बैठक के अंत में आईजी राम गोपाल गर्ग ने सभी पुलिस अधीक्षकों को निर्देशों की स्वयं निगरानी करने और उनका सख्ती से पालन सुनिश्चित करने कहा।
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