Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के पंडरी और मोवा इलाके में किराए पर मकान दिलाने के नाम पर कथित धोखाधड़ी का मामला चर्चा में है। आरोप है कि दो प्रॉपर्टी ब्रोकर मकान मालिकों को किराएदारों के रिश्ते के बारे में गलत जानकारी देकर मकान उपलब्ध करवाते हैं। दावा किया जा रहा है कि लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों को पति-पत्नी बताकर मकान किराए पर दिलवाए जाते हैं। इसके अलावा किराएदारों के पुलिस वेरिफिकेशन में भी कथित गड़बड़ी की बात सामने आई है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पति-पत्नी बताकर मकान दिलाने का आरोप
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पंडरी क्षेत्र में सक्रिय दो प्रॉपर्टी ब्रोकरों पर मकान मालिकों को किराएदारों के बारे में गलत जानकारी देने का आरोप लगाया गया है। दावा है कि दोनों व्यक्ति किराए पर मकान दिलाने के दौरान कुछ जोड़ों को पति-पत्नी के रूप में प्रस्तुत करते हैं, जबकि वे लिव-इन रिलेशनशिप में होते हैं। आरोपों के मुताबिक, मकान मालिकों को किराएदारों की सही जानकारी दिए बिना ही मकान का कब्जा सौंप दिया जाता है। हालांकि, लिव-इन रिलेशनशिप में रहना अपने आप में अपराध नहीं है। इस मामले में मुख्य सवाल मकान मालिकों को दी गई जानकारी और किरायेदारी दस्तावेजों की सत्यता का है।
पुलिस वेरिफिकेशन में फर्जीवाड़े का भी दावा
मामले में आरोप लगाया गया है कि किराएदारों का पुलिस सत्यापन भी गलत जानकारी या कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कराया जाता है। यदि किरायेदार सत्यापन में गलत पहचान या कूटरचित दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ है, तो इसकी जांच आवश्यक होगी। रायपुर में किराएदारों के सत्यापन के लिए पुलिस की डिजिटल व्यवस्था भी उपलब्ध है, जिसके माध्यम से मकान मालिक किराएदारों की जानकारी दर्ज करा सकते हैं।
वृद्धि कैपिटल नामक फर्म पर भी सवाल
आरोपों में 'वृद्धि कैपिटल' नामक फर्म का उल्लेख किया गया है। दावा है कि इस नाम से प्रॉपर्टी संबंधी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं और फर्म के पास आवश्यक रेरा पंजीयन नहीं है। हालांकि, संबंधित फर्म की पंजीयन स्थिति और उसकी वास्तविक गतिविधियों की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। यह भी स्पष्ट करना आवश्यक है कि प्रत्येक किरायेदारी या प्रॉपर्टी ब्रोकरेज गतिविधि के लिए रेरा पंजीयन अनिवार्य हो, ऐसा नहीं है। पंजीयन की आवश्यकता संबंधित गतिविधि और लागू कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करती है।
युवती की शिकायत से जोड़कर लगाए गए आरोप
इस मामले को मोवा क्षेत्र में एक युवती द्वारा युवक के खिलाफ दुष्कर्म की शिकायत दर्ज कराने के कथित प्रकरण से भी जोड़कर देखा जा रहा है। आरोप लगाया गया है कि संबंधित युवक और युवती को मकान दिलाने में इन्हीं ब्रोकरों की भूमिका थी तथा मकान मालिक को उनके रिश्ते के संबंध में गलत जानकारी दी गई थी। हालांकि, संबंधित एफआईआर और किरायेदारी दस्तावेजों की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए ब्रोकरों की कथित गतिविधियों और दुष्कर्म के आरोप के बीच कोई आपराधिक संबंध स्थापित नहीं माना जा सकता।
मकान मालिकों की सुरक्षा को लेकर उठे सवाल
इन आरोपों के सामने आने के बाद किराएदारों की पहचान, पुलिस सत्यापन और प्रॉपर्टी ब्रोकरों की जवाबदेही को लेकर सवाल उठे हैं। मकान किराए पर देते समय किराएदारों के पहचान पत्र, किरायानामा और आवश्यक पुलिस सत्यापन की जांच करना महत्वपूर्ण है। साथ ही गलत जानकारी देकर मकान दिलाने की शिकायत होने पर दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल वृद्धि कैपिटल या संबंधित दो ब्रोकरों के खिलाफ इस मामले में फर्म और संबंधित व्यक्तियों का पक्ष भी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में मकान मालिकों के आरोप, किरायेदारी दस्तावेज, पुलिस सत्यापन और संबंधित शिकायतों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किसी तरह की धोखाधड़ी हुई है या नहीं।