Sarangarh. सारंगढ़। छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले से वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। जिले के बिलाईगढ़ वन परिक्षेत्र अंतर्गत धाराशिव बीट के जंगल में करीब 12 वर्षीय तेंदुए का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिलने से वन विभाग में हड़कंप मच गया। हाथियों की मौजूदगी और उनकी आवाजाही को लेकर चलाए जा रहे सर्चिंग अभियान के दौरान वन विभाग की टीम को तेंदुए का शव दिखाई दिया। घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी सक्रिय हो गए और मामले की जांच शुरू कर दी गई। तेंदुए की मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए तीन पशु चिकित्सकों की टीम से पोस्टमार्टम कराया गया है। वहीं जंगल और आसपास के क्षेत्रों में साक्ष्य जुटाने के लिए डॉग स्क्वायड की दो टीमों को भी लगाया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह मामला बिलाईगढ़ वन परिक्षेत्र के धाराशिव बीट स्थित कक्ष क्रमांक 446 का है। यहां जंगल के भीतर एक तेंदुए का शव संदिग्ध अवस्था में पाया गया। बताया जा रहा है कि शव करीब 48 घंटे बाद वन विभाग की टीम को मिला। तेंदुए का शव मिलने के बाद तत्काल इसकी जानकारी विभाग के उच्च अधिकारियों को दी गई। सूचना मिलते ही वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी घटनास्थल पर पहुंचे तथा आसपास के क्षेत्र का निरीक्षण शुरू किया। जानकारी के मुताबिक, वन विभाग को बिलाईगढ़ वन परिक्षेत्र के जंगलों में हाथियों की मौजूदगी और आवाजाही की सूचना प्राप्त हुई थी। इसी सूचना के आधार पर विभागीय टीम जंगल में हाथियों की तलाश और उनकी गतिविधियों की निगरानी के लिए सर्चिंग अभियान चला रही थी। इसी दौरान धाराशिव बीट के कक्ष क्रमांक 446 में टीम की नजर एक तेंदुए के शव पर पड़ी। जंगल के भीतर वन्यजीव का शव मिलने से विभागीय कर्मचारियों ने तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सारंगढ़-बिलाईगढ़ की वन मंडलाधिकारी पुष्पलता टंडन अपनी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचीं। उन्होंने मौके का निरीक्षण किया और संबंधित अधिकारियों तथा कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। वन मंडलाधिकारी ने तेंदुए की मौत से जुड़ी परिस्थितियों की जांच और संभावित साक्ष्य जुटाने के लिए विभागीय टीम को कार्रवाई करने के निर्देश दिए। वन विभाग की प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मृत तेंदुए की उम्र लगभग 12 वर्ष बताई जा रही है। हालांकि, उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसका वास्तविक कारण अभी स्पष्ट नहीं हो सका है। इसी वजह से विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच की प्रक्रिया शुरू की है। तेंदुए का शव जंगल के भीतर मिलने और मौत की परिस्थितियां स्पष्ट नहीं होने के कारण पोस्टमार्टम के जरिए आवश्यक जानकारी जुटाई जा रही है।
तेंदुए की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए वन विभाग ने तीन पशु चिकित्सकों की टीम गठित की। चिकित्सकों की टीम द्वारा तेंदुए के शव का पोस्टमार्टम किया गया है। पोस्टमार्टम के निष्कर्षों से मौत के कारणों को समझने में मदद मिल सकती है। फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट के परिणामों के संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इसके अलावा वन विभाग ने घटनास्थल और आसपास के जंगल में जांच के लिए डॉग स्क्वायड की दो टीमों को लगाया है। इन टीमों के माध्यम से संभावित साक्ष्य जुटाने और घटनास्थल से जुड़ी परिस्थितियों की जानकारी प्राप्त करने का प्रयास किया जा रहा है। वन विभाग की टीम आसपास के क्षेत्रों में भी सर्चिंग कर रही है, ताकि तेंदुए की मौत से संबंधित कोई महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सके।
इस पूरे मामले में विशेष बात यह है कि वन विभाग की टीम मूल रूप से हाथियों की मौजूदगी और आवाजाही की सूचना पर जंगल में सर्चिंग करने पहुंची थी। इसी दौरान तेंदुए का शव मिलने से जांच का दायरा बढ़ गया। विभाग अब तेंदुए की मौत के कारणों को स्पष्ट करने के लिए पशु चिकित्सकों की जांच और डॉग स्क्वायड की सहायता ले रहा है। फिलहाल तेंदुए की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई या इसके पीछे कोई अन्य वजह है, इस संबंध में कोई निष्कर्ष सामने नहीं आया है। वन विभाग द्वारा जांच पूरी होने और पोस्टमार्टम से संबंधित जानकारी मिलने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। सारंगढ़-बिलाईगढ़ वन विभाग की टीम घटनास्थल और आसपास के जंगल में जांच कर रही है। वन मंडलाधिकारी पुष्पलता टंडन के निरीक्षण के बाद विभागीय स्तर पर आवश्यक कार्रवाई जारी है। करीब 12 वर्षीय तेंदुए की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला फिलहाल जांच के अधीन है।