महादेव ऐप केस: सौरभ चंद्राकर के खिलाफ फिर जारी हुआ ओपन-एंडेड गिरफ्तारी वारंट

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Update: 2026-07-27 14:31 GMT
Raipur. रायपुर। महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले में कथित मास्टरमाइंड और प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को भारत लाने की दिशा में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। एजेंसी ने ओमान से उसके प्रत्यर्पण (एक्सट्राडिशन) की प्रक्रिया को गति देने के लिए रायपुर की विशेष पीएमएलए (PMLA) अदालत से दोबारा ओपन-एंडेड गिरफ्तारी वारंट जारी कराया है। वारंट मिलने के बाद प्रत्यर्पण से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज तैयार कर भारत के हाई कमीशन को भेज दिए गए हैं। अब आगे की प्रक्रिया ओमान के संबंधित अधिकारियों और भारतीय एजेंसियों के समन्वय से पूरी की जाएगी।
ईडी के इस कदम को महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप से जुड़े बहुचर्चित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी प्रगति माना जा रहा है। एजेंसी लंबे समय से विदेश में मौजूद सौरभ चंद्राकर को भारत लाने के प्रयास कर रही है, ताकि उससे पूछताछ कर पूरे नेटवर्क और वित्तीय लेन-देन की जांच को आगे बढ़ाया जा सके। ईडी के विशेष लोक अभियोजक सौरभ पांडे ने बताया कि जांच एजेंसी को पहले सूचना मिली थी कि सौरभ चंद्राकर दुबई में मौजूद है। इस आधार पर स्पेशल पीएमएलए कोर्ट से उसके खिलाफ ओपन-एंडेड गिरफ्तारी वारंट जारी कराया गया था और प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू करने के लिए आवश्यक दस्तावेज दुबई भेजे गए थे।
हालांकि बाद की जांच में एजेंसी को जानकारी मिली कि सौरभ चंद्राकर दुबई छोड़कर ओमान चला गया है। इसके बाद ईडी ने रायपुर स्थित विशेष पीएमएलए अदालत में नया आवेदन प्रस्तुत किया। अदालत ने 16 और 17 जुलाई के दौरान दोबारा ओपन-एंडेड गिरफ्तारी वारंट जारी किया, जिससे ओमान के माध्यम से प्रत्यर्पण की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके। सौरभ पांडे के अनुसार, अदालत से वारंट जारी होने के बाद प्रत्यर्पण से संबंधित सभी दस्तावेजों पर आवश्यक न्यायिक एंडोर्समेंट कराया गया। इसके बाद पूरे दस्तावेज भारत के हाई कमीशन को भेज दिए गए हैं। अब यह मामला भारत और ओमान के बीच लागू कानूनी प्रावधानों तथा अंतरराष्ट्रीय प्रत्यर्पण प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ेगा।
ईडी के अधिकारियों का कहना है कि एजेंसी ने अपनी ओर से प्रत्यर्पण के लिए आवश्यक सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं। अब आगे की कार्रवाई संबंधित देशों की एजेंसियों और अधिकारियों के बीच समन्वय पर निर्भर करेगी। यदि सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी हो जाती हैं तो सौरभ चंद्राकर को भारत लाकर उससे पूछताछ की जाएगी। इस मामले में जारी किया गया ओपन-एंडेड गिरफ्तारी वारंट विशेष महत्व रखता है। सामान्य गिरफ्तारी वारंट के विपरीत इस प्रकार के वारंट की कोई निश्चित समय-सीमा नहीं होती। यह तब तक प्रभावी रहता है जब तक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो जाती या संबंधित अदालत इसे वापस नहीं लेती। विदेश में फरार आरोपियों के मामलों में प्रत्यर्पण प्रक्रिया को प्रभावी बनाए रखने के लिए ऐसे वारंट का उपयोग किया जाता है, ताकि आरोपी किसी अन्य देश में स्थान बदलने पर भी कानूनी कार्रवाई जारी रह सके।
महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामला देश के सबसे चर्चित आर्थिक अपराधों और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में शामिल है। जांच एजेंसियों के अनुसार इस नेटवर्क के माध्यम से बड़े पैमाने पर ऑनलाइन सट्टेबाजी का संचालन किया गया और अवैध रूप से अर्जित धन को विभिन्न माध्यमों से वैध दिखाने का प्रयास किया गया। इसी सिलसिले में ईडी लगातार देश के विभिन्न राज्यों में छापेमारी और वित्तीय जांच कर रही है। प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार अब तक इस मामले में 175 से अधिक स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया जा चुका है। जांच के दौरान 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 74 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इसके अलावा रायपुर की विशेष पीएमएलए अदालत में इस मामले से संबंधित पांच अभियोजन शिकायतें (प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट) भी दाखिल की जा चुकी हैं।
एजेंसी ने वित्तीय जांच के दौरान बड़ी मात्रा में चल और अचल संपत्तियों का पता लगाया है। ईडी के मुताबिक अब तक इस प्रकरण में ₹4,336 करोड़ से अधिक मूल्य की संपत्तियां अटैच, सीज या फ्रीज की जा चुकी हैं। इनमें बैंक खातों में जमा राशि, अचल संपत्तियां, निवेश और अन्य वित्तीय परिसंपत्तियां शामिल हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि इन संपत्तियों का संबंध कथित अवैध कमाई और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है। सौरभ चंद्राकर की भारत वापसी को इस पूरे मामले की जांच के लिए अहम माना जा रहा है। एजेंसी का मानना है कि उसके प्रत्यर्पण के बाद पूछताछ से ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क, धन के अंतरराष्ट्रीय प्रवाह, सहयोगियों की भूमिका और कथित मनी लॉन्ड्रिंग के तरीकों से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। फिलहाल सभी निगाहें भारत और ओमान के बीच चल रही प्रत्यर्पण प्रक्रिया पर टिकी हैं। यदि कानूनी प्रक्रिया समय पर पूरी होती है तो महादेव ऐप मामले की जांच में एक महत्वपूर्ण मोड़ आ सकता है।
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