Mahasamund. महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे 'ऑपरेशन निश्चय' के तहत पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। सिंघोड़ा थाना क्षेत्र में 225 किलोग्राम गांजा जब्ती के पुराने मामले की जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने ओडिशा से दो कथित मुख्य सप्लायरों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान ध्यानेन्द्र बिश्वाल और प्रशांत नाग के रूप में हुई है। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, जब्त मोबाइल फोन के डेटा विश्लेषण और पहले गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर दोनों तक पहुंचने का दावा किया है। दोनों आरोपियों को 27 अक्टूबर 2026 को गिरफ्तार कर महासमुंद लाया गया और न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।
225 किलो गांजा तस्करी मामले में पुलिस को मिली बड़ी सफलता
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, थाना सिंघोड़ा में दर्ज अपराध क्रमांक 33/2026 की जांच के दौरान गांजा तस्करी के स्रोत का पता लगाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे थे। इस मामले में पहले पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। उनके कब्जे से 225 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ था, जिसकी अनुमानित कीमत 1 करोड़ 12 लाख 50 हजार रुपये बताई गई थी। पुलिस का कहना है कि इस कार्रवाई के बाद भी मामले की जांच बंद नहीं की गई। गांजा कहां से आया, किसने उपलब्ध कराया और इसे कहां पहुंचाया जाना था, इन सभी पहलुओं पर जांच जारी रखी गई।
26 मार्च को तरबूज के नीचे छिपाकर ले जा रहे थे गांजा
घटना 26 मार्च 2026 की है। महासमुंद पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि ओडिशा से छत्तीसगढ़ की ओर दो वाहनों के माध्यम से गांजे की तस्करी की जा रही है। सूचना के आधार पर सिंघोड़ा पुलिस ने राष्ट्रीय राजमार्ग-53 पर ग्राम रेहटीखोल के पास नाकाबंदी की। इस दौरान पुलिस ने हुंडई ऑरा कार क्रमांक UP 96 Q 3658 और उसके पीछे आ रहे टाटा योद्धा पिकअप क्रमांक OD 15 V 4676 को रोककर जांच की। पुलिस के अनुसार, हुंडई ऑरा कार का उपयोग पायलटिंग वाहन के रूप में किया जा रहा था, जबकि पिकअप में गांजा रखा गया था। जांच के दौरान पता चला कि पिकअप में तरबूज के नीचे प्लास्टिक की बोरियों में गांजा छिपाया गया था।
ओडिशा से उत्तरप्रदेश ले जाई जा रही थी खेप
पुलिस की पूछताछ में सामने आया था कि गांजे की खेप ओडिशा के संबलपुर से उत्तरप्रदेश के चित्रकूट ले जाई जा रही थी। वाहनों की तलाशी में कुल 225 किलोग्राम गांजा बरामद किया गया। इसके बाद पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था। प्रारंभिक कार्रवाई के बाद पुलिस ने तस्करी नेटवर्क के अन्य लोगों की तलाश शुरू की।
मोबाइल डेटा एनालिसिस से मुख्य सप्लायरों तक पहुंची पुलिस
महासमुंद पुलिस ने इस मामले में एंड-टू-एंड जांच की रणनीति अपनाई। इसके तहत गांजा परिवहन करने वाले आरोपियों से पूछताछ के साथ उनके जब्त मोबाइल फोन के डेटा का तकनीकी विश्लेषण किया गया। पुलिस के अनुसार, जांच में मिले सुरागों से ओडिशा के दो व्यक्तियों की कथित भूमिका सामने आई। इनकी पहचान ओडिशा के केंद्रापड़ा जिले के ध्यानेन्द्र बिश्वाल और कोरापुट जिले के प्रशांत नाग के रूप में हुई। इसके बाद पुलिस ने दोनों की तलाश शुरू की और संबंधित क्षेत्रों में कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
ओडिशा से गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपी
पुलिस द्वारा गिरफ्तार आरोपियों का विवरण इस प्रकार है।
1. ध्यानेन्द्र बिश्वाल (36 वर्ष) – पिता राजेन्द्र बिश्वाल, निवासी ग्राम गंजा, थाना राजकनिका, जिला केंद्रापड़ा, ओडिशा।
2. प्रशांत नाग (33 वर्ष) – पिता नीलो नाग, निवासी जयपुर, थाना जयपुर, जिला कोरापुट, ओडिशा।
दोनों आरोपियों को 27 अक्टूबर 2026 को गिरफ्तार कर महासमुंद लाया गया। पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्हें न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया, जहां से न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।
पहले गिरफ्तार हो चुके हैं पांच आरोपी
इस मामले में 26 मार्च 2026 को पुलिस ने जिन पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया था, उनमें उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश के निवासी शामिल हैं।
- सूरज गुप्ता (24 वर्ष) – निवासी अलीगंज, बांदा, उत्तरप्रदेश।
- योगेश कुशवाहा (23 वर्ष) – निवासी खूंटी चौराहा, बांदा, उत्तरप्रदेश।
- हरिबाबू वर्मा (40 वर्ष) – निवासी चित्रकूट क्षेत्र, सतना, मध्यप्रदेश।
- रामबाबू वर्मा (48 वर्ष) – निवासी चित्रकूट क्षेत्र, सतना, मध्यप्रदेश।
- घनश्याम गुप्ता (35 वर्ष) – निवासी सीतापुर, चित्रकूट, उत्तरप्रदेश।
इन आरोपियों से मिली जानकारी को आधार बनाकर पुलिस ने आगे की जांच की।
एनडीपीएस एक्ट के तहत जारी है कार्रवाई
सिंघोड़ा थाने में दर्ज अपराध क्रमांक 33/2026 में एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(बी)(II)(सी) और 29(1) के तहत कार्रवाई की जा रही है। महासमुंद पुलिस के अनुसार, अवैध मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए केवल गांजा परिवहन करने वालों की गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि इसकी आपूर्ति करने वाले लोगों और पूरे नेटवर्क की पहचान करना भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स द्वारा स्रोत, गंतव्य और वित्तीय लेनदेन से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच में अन्य व्यक्तियों की भूमिका सामने आने पर उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।