Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में जारी प्रदर्शन को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विपक्ष के विरोध प्रदर्शन पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि कुछ विरोधी ताकतें भारत में अस्थिरता और अराजकता फैलाने की कोशिश कर रही हैं। वित्त मंत्री ने बांग्लादेश और नेपाल के घटनाक्रमों का उदाहरण देते हुए कहा कि देश के भीतर और
अंतरराष्ट्रीय स्तर
पर हो रही गतिविधियों को एक साथ समझने की जरूरत है। ओपी चौधरी ने दावा किया कि जिस तरह पड़ोसी देशों में अराजकता की स्थिति पैदा हुई, उसी तरह भारत में भी कथित तौर पर अस्थिरता फैलाने की कोशिश की जा सकती है। उन्होंने इसके पीछे 'डीप स्टेट' जैसी ताकतों की भूमिका होने की आशंका जताई। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में उनके बयान में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है।
बांग्लादेश और नेपाल के घटनाक्रमों का दिया उदाहरण
वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि देश और दुनिया में हो रही घटनाओं को अलग-अलग देखने के बजाय उनके बीच संभावित संबंधों पर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने बांग्लादेश और नेपाल की परिस्थितियों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि इन देशों में अराजकता फैलाकर जिस तरह के घटनाक्रम सामने आए, उसी प्रकार का मॉडल भारत में भी अपनाने का प्रयास किया जा सकता है। चौधरी ने इसे कथित 'डीप स्टेट' की गतिविधियों से जोड़ते हुए कहा कि कुछ ताकतें देश में अस्थिरता पैदा करना चाहती हैं। हालांकि, उन्होंने अपने बयान में किसी विशिष्ट संगठन या व्यक्ति की संलिप्तता का प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया।
भारत में ऐसी कोशिशें सफल नहीं होंगी: चौधरी
ओपी चौधरी ने विश्वास जताया कि भारत में अराजकता फैलाने की कोई भी कोशिश सफल नहीं होगी। उन्होंने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और यहां नागरिकों को संविधान के तहत लोकतांत्रिक अधिकार प्राप्त हैं। उनके मुताबिक, लोकतंत्र में प्रत्येक व्यक्ति को अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने का अधिकार है। इसके साथ ही कानून-व्यवस्था का पालन करना भी आवश्यक है। वित्त मंत्री ने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन किसी भी व्यक्ति को कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
लोकतांत्रिक अधिकारों और कानून-व्यवस्था पर जोर
अपने बयान में वित्त मंत्री ने लोकतांत्रिक अधिकारों और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा हैं, लेकिन इन गतिविधियों के दौरान कानून का पालन करना जरूरी है। किसी भी परिस्थिति में कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। चौधरी के बयान में विरोध प्रदर्शन के अधिकार को स्वीकार करने के साथ सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया।
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन
दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के विरोध में CJP तथा विपक्षी समूहों के प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक विवाद बना हुआ है। प्रदर्शनकारियों की ओर से चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। वहीं वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने इस विरोध प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए देश में संभावित अस्थिरता का मुद्दा उठाया है। विशेष गहन पुनरीक्षण मतदाता सूची की जांच और अद्यतन करने की प्रक्रिया है। इसे लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतदाताओं के अधिकारों और चुनावी निष्पक्षता से संबंधित बहस जारी है।
साजिश के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं
ओपी चौधरी ने विरोध प्रदर्शन को अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों से जोड़ते हुए कथित साजिश की आशंका जताई है। हालांकि, उपलब्ध बयान में इन आरोपों के समर्थन में कोई विशिष्ट प्रमाण नहीं दिया गया है। इसलिए बांग्लादेश और नेपाल की घटनाओं तथा दिल्ली के प्रदर्शन के बीच किसी संगठित संबंध को स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता। वित्त मंत्री की टिप्पणी के बाद चर्चा का केंद्र लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार, चुनावी प्रक्रिया में विश्वास और कानून-व्यवस्था बनाए रखने का सवाल है।
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